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अजहर की बातों से नाराज होकर सिद्धू ने छोड़ा था इंग्लैंड दौरा
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ घटनाएं मैदान पर बने रिकॉर्ड से अलग वजहों से याद रखी जाती हैं। वर्ष 1996 के इंग्लैंड दौरे पर नवजोत सिंह सिद्धू का अचानक टीम छोड़कर भारत लौट आना भी ऐसी ही घटना थी। उस समय भारतीय टीम की कप्तानी मोहम्मद अजहरुद्दीन कर रहे थे। दोनों के बीच नाराजगी की खबरों ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी थी। हालांकि, पूर्व बीसीसीआई सचिव जयवंत लेले ने अपनी आत्मकथा में इस प्रकरण के पीछे भाषा और संबोधन से पैदा हुई गलतफहमी का जिक्र किया है।
टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले लौट आए थे सिद्धू
भारतीय टीम 1996 में इंग्लैंड के दौरे पर गई थी। टीम को वहां वनडे और टेस्ट मुकाबले खेलने थे। सिद्धू अनुभवी बल्लेबाज थे और उनकी मौजूदगी भारतीय बल्लेबाजी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती थी। लेकिन टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही वह दौरा छोड़कर स्वदेश लौट आए। दौरे के समकालीन विवरणों में भी कप्तान से मतभेद के बाद सिद्धू के लौटने का उल्लेख मिलता है। भारतीय टीम के लिए यह दौरा परिणामों के लिहाज से भी कठिन रहा था। टीम वनडे और टेस्ट, दोनों सीरीज में पराजित हुई। ऐसे में एक वरिष्ठ बल्लेबाज का अचानक वापस जाना मैदान से बाहर की बड़ी घटना बन गया था।
लेले की किताब में सामने आया नाराजगी का कारण
जयवंत लेले ने अपनी आत्मकथा ‘आई वॉज देयर—मेमॉयर्स ऑफ अ क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर’ में लिखा कि सिद्धू को लगता था कि अजहरुद्दीन बातचीत के दौरान बार-बार उनके लिए अपमानजनक शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सिद्धू इस व्यवहार से इतने आहत हुए कि उन्होंने दौरा छोड़ने का फैसला कर लिया। इस विवरण का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह घटना के वर्षों बाद सामने आया लेले का संस्मरण है। इसलिए अजहरुद्दीन के जानबूझकर गाली देने की बात को स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करने के बजाय सिद्धू की उस समय की समझ और नाराजगी के रूप में देखना जरूरी है।
वजह पूछने पर भी चुप रहे सिद्धू
लेले के अनुसार, बीसीसीआई ने मामले की पड़ताल के लिए एक समिति बनाई। इसमें राज सिंह डूंगरपुर, आईएस बिंद्रा और सुनील गावस्कर शामिल थे, जबकि लेले संयोजक थे। समिति जानना चाहती थी कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक अनुभवी खिलाड़ी बीच दौरे से लौट आया। मुंबई में हुई शुरुआती बैठक में सिद्धू ने नाराजगी का कारण बताने से इनकार कर दिया। वह यही स्वीकार करते रहे कि इस तरह वापस आना उनकी गलती थी और वह उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हैं। समिति के सामने मुश्किल यह थी कि खिलाड़ी अपनी वापसी की जिम्मेदारी तो स्वीकार कर रहा था, लेकिन उसके पीछे की वजह नहीं बता रहा था। Rediff Cricket
मोहिंदर अमरनाथ को सौंपी गई जिम्मेदारी
मामला आगे नहीं बढ़ने पर मोहिंदर अमरनाथ की मदद ली गई। लेले के विवरण के मुताबिक, विचार यह था कि पंजाबी बोलने वाला कोई वरिष्ठ खिलाड़ी सिद्धू से सहज बातचीत करके उनकी परेशानी समझ सकता है। इसके बाद दिल्ली में दोबारा बातचीत हुई। बैठक के दौरान भी जब स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो कुछ देर का विराम लिया गया। अमरनाथ सिद्धू को अपने साथ टहलने ले गए। औपचारिक सवाल-जवाब से अलग हुई इस बातचीत में आखिरकार नाराजगी की वजह सामने आई। अमरनाथ ने लौटकर समिति को बताया कि मामला गलतफहमी से जुड़ा है। mid-day.com
संबोधन का अर्थ समझाने पर बदली तस्वीर
लेले की किताब में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार, सिद्धू ने अमरनाथ को बताया कि अजहर उनसे मिलते समय और सामान्य बातचीत में एक ऐसा संबोधन इस्तेमाल करते थे, जिसे वह गाली समझते थे। बार-बार वही शब्द सुनकर उन्हें लगने लगा कि कप्तान उनका अपमान कर रहे हैं। अमरनाथ ने उनसे इस्तेमाल किए गए वास्तविक शब्द पूछे। फिर उन्होंने समझाया कि जिस अभिव्यक्ति को सिद्धू उत्तर भारतीय संदर्भ में अपमानजनक समझ रहे हैं, उसे अजहर के हैदराबादी बोलचाल के संदर्भ में अलग भाव से इस्तेमाल किया जा सकता है। किताब के मुताबिक, अमरनाथ का कहना था कि अजहर का उद्देश्य उनका अनादर करना नहीं था। यह स्पष्टीकरण सुनकर सिद्धू हैरान हुए।
विवाद और गलतफहमी में फर्क
इस किस्से का सबसे अहम हिस्सा केवल सिद्धू की नाराजगी नहीं, बल्कि उसके पीछे बताई गई संवाद की कमी भी है। लेले के संस्मरण में अजहर के इरादे और सिद्धू की समझ के बीच अंतर को विवाद की वजह बताया गया है। हालांकि, किसी क्षेत्र की बोलचाल को लेकर इस व्याख्या को हर व्यक्ति और परिस्थिति पर लागू नहीं किया जा सकता। 1996 का यह घटनाक्रम भारतीय क्रिकेट के चर्चित ड्रेसिंग रूम विवादों में गिना जाता है। एक खिलाड़ी को लगा कि उसके सम्मान को ठेस पहुंच रही है, जबकि बाद में सामने आए विवरण ने इसे गलतफहमी बताया। अमरनाथ की भूमिका इसलिए खास रही कि उन्होंने औपचारिक बैठक से बाहर बातचीत करके उस बात तक पहुंचने की कोशिश की, जिसे सिद्धू समिति के सामने कहने से बच रहे थे।
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