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Noida नोएडा। प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 की ट्रॉफी के पीछे की सोच और उसके प्रतीकात्मक महत्व को समझाते हुए चेयरमैन दयान फारूकी ने इसके डिजाइन और उससे जुड़े विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ट्रॉफी को लीग की भावना और पहलवानों के संघर्ष से जोड़ने के मकसद से इसे खास तौर पर डिजाइन किया गया है, और इसके निर्माण की पूरी प्रक्रिया इसी सोच को ध्यान में रखकर की गई। पीडब्ल्यूएल 2026 की शुरुआत 15 जनवरी को हुई थी, जिसका ग्रैंड फिनाले 1 फरवरी को होना है, जो छह साल के ब्रेक के बाद लीग की वापसी का प्रतीक है।
फारूकी ने आईएएनएस को बताया, “ट्रॉफी के पीछे की कहानी दिखाती है कि हमने लीग की छोटी से छोटी डिटेल पर भी कितना ध्यान दिया है। इसमें हिस्सा लेने वाली सभी छह टीमों के अखाड़ों और राज्यों से, हमारी टीम ने जाकर मिट्टी इकट्ठा की है, जिसे ट्रॉफी में लगाया गया है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि ट्रॉफी देश की मिट्टी से जुड़ी रहे। हमने साइड में भगवान हनुमान की गदा को दिखाने वाले एलिमेंट भी जोड़े हैं। इस पर बहुत सोचा गया है- ट्रॉफी को बहुत ध्यान से डिजाइन किया गया है।
इससे पहले, जापान की यूई सुसाकी, जिन्हें हरियाणा थंडर ने 60 लाख रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर खरीदा, महिला पहलवान प्लेयर ऑक्शन में टॉप आकर्षण बनकर उभरीं। टोक्यो 2020 की गोल्ड मेडलिस्ट सुसाकी के साथ, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट अंतिम पंघाल को यूपी डोमिनेटर्स ने महिला 53 किलोग्राम कैटेगरी में 52 लाख में खरीदा, जबकि प्यूर्टो रिको की एना गोडिनेज को पंजाब रॉयल्स ने महिला 62 किलोग्राम कैटेगरी में 46 लाख में खरीदा। दिल्ली दंगल वॉरियर्स ने अज़रबैजान की अनास्तासिया अल्पाएवा को महिला 76 किलोग्राम कैटेगरी में 27 लाख में खरीदकर अपनी टीम को और मजबूत किया।
सभी कैटेगरी ए प्लस के पहलवान 18 लाख के बेस प्राइस के साथ ऑक्शन में उतरे थे, लेकिन कई नामों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई। पुरुषों में, मुख्य खिलाड़ियों में पोलैंड के रॉबर्ट बारन (55 लाख) को महाराष्ट्र केसरी और पेरिस 2024 के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट अमन सहरावत (51 लाख) को टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल ने खरीदा, जो अलग-अलग वेट कैटेगरी में साबित हो चुके खिलाड़ियों की लगातार मांग को दिखाता है।
कुश्ती और देश के बीच इमोशनल बॉन्ड पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, "मुझे यह टैगलाइन इतनी पसंद आई है कि मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब भी मैं कुश्ती के बारे में सोचता हूं, तो इसे सिर्फ एक खेल के तौर पर नहीं देखता। मैं मिट्टी के बारे में सोचता हूं। वह भावना मन में आती है, आंखों में आंसू आ जाते हैं और दिल की धड़कन बढ़ जाती है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि यह मेरा खेल है, आपका खेल है और देश का खेल है। जो भी खिलाड़ी यहां से मेडल जीतेगा, वह सिर्फ पीडब्ल्यूएल की जीत नहीं होगी, बल्कि भारत की जीत होगी।"
पावर मिनट इनोवेशन और भारतीय कुश्ती पर इसके असर के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, "यह गेम-चेंजर बन गया है। पिछले ओलंपिक में हमने देखा कि हमारे खिलाड़ी फिजिकली फिट थे, लेकिन आखिरी पलों में मेडल हाथ से फिसल रहे थे। पीडब्ल्यूएल के जरिए हमने पावर मिनट शुरू किया, जो पहलवानों को आखिरी पल तक लड़ने की प्रेरणा देता है। पीडब्ल्यूएल और रेसलिंग फेडरेशन के जरिए कुश्ती को जबरदस्त पहचान मिल रही है।
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