खेल
विनोद कांबली: अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सके, असीमित संभावनाओं वाला करियर रहा निराशाजनक
jantaserishta.com
17 Jan 2026 10:46 AM IST

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नई दिल्ली: गुरु रमाकांत आचरेकर ने भारतीय क्रिकेट को कई नामचीन सितारे दिए हैं। इसमें सबसे चमकदार सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली का माना जाता है। सचिन ने तो अपनी प्रतिभा और क्षमता का पूर्ण उपयोग अपने करियर के दौरान किया और अपनी उपलब्धियों की बदौलत 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाते हैं। आलोचकों और क्रिकेट विशेषज्ञों के मुताबिक विनोद कांबली की प्रतिभा तेंदुलकर से ज्यादा थी, लेकिन वे अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं कर सके और असाधारण तरीके से शुरू हुए उनके करियर का अंत निराशाजनक रहा।
विनोद कांबली का जन्म 18 जनवरी 1972 को मुंबई में हुआ था। उनका करियर सचिन के समानांतर ही था। बचपन से ही भारत के लिए खेलने का सपना देखने वाले विनोद कांबली पहली बार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने सचिन तेंदुलकर के साथ स्कूल क्रिकेट में इतिहास रच दिया। शारदाश्रम विद्यामंदिर के लिए दोनों ने 664 रन की नाबाद साझेदारी की थी, जो आज भी एक रिकॉर्ड है।
कांबली की टाइमिंग और बल्लेबाजी के बेखौफ अंदाज ने उन्हें जल्द ही घरेलू क्रिकेट में बड़ी पहचान दी थी। घरेलू क्रिकेट की सफलता के बाद कांबली ने 1993 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया। अपने दूसरे ही टेस्ट में मुंबई में उन्होंने 224 रन की शानदार पारी खेली। दिल्ली में जिम्बाब्वे के खिलाफ 227 रन बनाए। इन दो पारियों के दम पर वह सबसे तेज 1,000 टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इस प्रदर्शन के बाद कांबली को भारत का अगला महानतम बल्लेबाज माना जाने लगा था, लेकिन वे अपनी शुरुआती सफलता को बरकरार नहीं रख सके और उसे बनाए रखने के लिए शायद जरूरी समर्पण नहीं दिखा सके।
समय के साथ उनकी कमजोरियां भी सामने आने लगीं। विदेशी पिचों पर तेज और उछाल वाली गेंदबाजी के खिलाफ उन्हें परेशानी हुई। चोटें, फिटनेस और टेम्परामेंट से जुड़े सवालों ने भी उनके करियर को प्रभावित किया। मैदान के बाहर अपनी लाइफस्टाइल और विवादों की वजह से वे चर्चा में रहे, जिसने उनके करियर को प्रभावित किया।
निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कांबली को टीम से ड्रॉप कर दिया गया और एक बड़ी संभावना वाले करियर का निराशाजनक अंत हो गया। कांबली ने 1993 से 1995 के बीच 17 टेस्ट मैचों की 21 पारियों में 4 शतक लगाते हुए 1,084 रन बनाए। वहीं, 1991 से 2000 के बीच 104 वनडे की 97 पारियों में 2 शतक और 14 अर्धशतकों की मदद से 2,477 रन बनाए। वर्तमान में कांबली आर्थिक और शारीरिक परेशानी से गुजर रहे हैं।
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