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मां बनने के बाद विनेश की वापसी पर हाई कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली: भारतीय स्टार पहलवान विनेश फोगाट की मातृत्व के बाद प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी का मामला एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। विनेश ने अदालत से मांग की है कि गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और प्रसव के बाद खेल में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित नीति बनाई जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से जवाब मांगा है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने विनेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल विनेश फोगाट तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की उन सभी महिला खिलाड़ियों से जुड़ा है जिन्हें मातृत्व के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी करनी होती है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला खिलाड़ियों को मातृत्व अवकाश के दौरान रैंकिंग समेत कई तरह का संरक्षण दिया जाता है।
विनेश फोगाट जुलाई 2025 में मां बनी थीं। उनकी याचिका में कहा गया है कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने दोबारा कुश्ती में वापसी की तो उन्हें मातृत्व के कारण प्रतियोगिताओं से दूर रहने की अवधि के लिए कोई विशेष राहत नहीं मिली। इसके बजाय उन्हें सामान्य खिलाड़ियों की तरह फिर से प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
याचिका में सवाल उठाया गया है कि अगर किसी महिला खिलाड़ी की गर्भावस्था और प्रसव के कारण रैंकिंग या प्रदर्शन प्रभावित होता है तो उसकी खेल में वापसी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए। विनेश ने चयन और नामांकन के लिए स्पष्ट मानदंड के साथ घरेलू प्रतियोगिताओं का निश्चित और समयबद्ध कैलेंडर बनाने की भी मांग की है। इस याचिका की अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की गई है।
इसके अलावा विनेश ने WFI की ओर से 9 मई और 17 जून को जारी दो कारण बताओ नोटिस और उनसे जुड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई को अलग याचिका में चुनौती दी है। उनका आरोप है कि ये कार्रवाइयां मनमानी हैं और मातृत्व के बाद उनकी प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी को प्रभावित कर रही हैं। इस मामले में अदालत ने WFI के वकील से महासंघ का पक्ष लेकर आने को कहा है और सुनवाई 29 सितंबर के लिए तय की है।
विनेश का यह भी कहना है कि इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए योग्य माना था। इसके बावजूद WFI की ओर से अपनाई गई पात्रता व्यवस्था और अनुशासनात्मक कार्रवाई ने उनकी वापसी में बाधा पैदा की।
यह पहली बार नहीं है जब विनेश की मातृत्व के बाद वापसी का मामला अदालत पहुंचा है। मई में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि मातृत्व को किसी महिला खिलाड़ी के पेशेवर करियर में बाधा नहीं बनाया जा सकता और विनेश को एशियन गेम्स चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।
अब इस मामले का दायरा विनेश की व्यक्तिगत वापसी से आगे बढ़कर महिला खिलाड़ियों के लिए व्यापक मातृत्व नीति तक पहुंच गया है। अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई इस लिहाज से महत्वपूर्ण होगी कि भारत में मातृत्व के बाद खेल में लौटने वाली महिला एथलीटों के लिए भविष्य में किस तरह का संस्थागत ढांचा तैयार किया जाता है।
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