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मुक्केबाजों का कठिन ड्रॉ, एशियाई खेलों में भारतीय पंच की होगी परीक्षा

nidhi
21 Sept 2026 8:39 AM IST
मुक्केबाजों का कठिन ड्रॉ, एशियाई खेलों में भारतीय पंच की होगी परीक्षा
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एशियाई खेलों में मुक्केबाजों की कड़ी टक्कर

भिवानी : एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के सामने कड़ी चुनौती रहने वाली है। प्रतियोगिता के ड्रॉ में कई भारतीय खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना पड़ सकता है। अब सभी की नजरें रिंग में उतरने वाले खिलाड़ियों पर हैं, जिनमें हरियाणा के प्रवीण हुड्डा और प्रिया घणघस भी शामिल हैं। भारतीय मुक्केबाजी दल इस बार पदक की उम्मीदों के साथ मैदान में उतरा है। टीम में कई अनुभवी और युवा खिलाड़ी शामिल हैं। ड्रॉ के मुताबिक खिलाड़ियों को शुरुआती दौर से ही कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है। एशियाई स्तर पर कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और अन्य देशों के मुक्केबाजों को मजबूत दावेदार माना जाता है।

हरियाणवी मुक्केबाजों पर रहेंगी नजरें
हरियाणा को भारत में मुक्केबाजी की बड़ी प्रतिभाओं की धरती माना जाता है। यहां से कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है। इस बार भी हरियाणा के मुक्केबाजों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। प्रवीण हुड्डा और प्रिया घणघस अपने-अपने वर्ग में भारतीय चुनौती को मजबूत करने उतरेंगे। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर देशभर के खेल प्रेमियों की नजर रहेगी।
आसान नहीं होगी पदक की राह
एशियाई खेलों में मुक्केबाजी में मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी होते हैं। भारतीय खिलाड़ियों को शुरुआती दौर से ही तकनीकी रूप से मजबूत खिलाड़ियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एशियाई मुक्केबाजी में मध्य एशियाई देशों के खिलाड़ी लंबे समय से मजबूत प्रदर्शन करते रहे हैं। ऐसे में भारतीय मुक्केबाजों को रणनीति, फिटनेस और मानसिक मजबूती के साथ रिंग में उतरना होगा।
भारतीय टीम को पदक की उम्मीद
भारतीय मुक्केबाजी टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया है। महिला वर्ग में लवलीना बोरगोहेन और अन्य खिलाड़ियों से भी उम्मीदें जुड़ी हैं। कोचिंग स्टाफ का फोकस खिलाड़ियों की तकनीक, डिफेंस और मुकाबले की रणनीति पर है। टीम का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा मुकाबले जीतकर पदक तालिका में मजबूत स्थिति बनाना है।
रिंग में दिखेगा हरियाणा का दम
हरियाणा के खिलाड़ियों ने भारतीय मुक्केबाजी को नई पहचान दी है। गांवों और छोटे शहरों से निकलकर कई मुक्केबाजों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाई है। अब एशियाई खेलों में प्रवीण हुड्डा और प्रिया घणघस जैसे खिलाड़ियों के सामने खुद को साबित करने का मौका है। कड़ी चुनौती के बावजूद भारतीय दल मजबूत तैयारी के साथ उतर रहा है।

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