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सहवाग और जॉन राइट का चर्चित विवाद, टीम से बाहर करने की चेतावनी का भी जिक्र

nidhi
22 Oct 2026 8:23 AM IST
सहवाग और जॉन राइट का चर्चित विवाद, टीम से बाहर करने की चेतावनी का भी जिक्र
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ड्रेसिंग रूम में सहवाग पर क्यों भड़के थे जॉन राइट?
भारतीय क्रिकेट के ड्रेसिंग रूम से जुड़े कई किस्से वर्षों बाद भी चर्चा में रहते हैं। ऐसा ही एक घटनाक्रम पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और तत्कालीन मुख्य कोच जॉन राइट के बीच हुआ था। इंग्लैंड में नेटवेस्ट सीरीज के दौरान सहवाग के एक गैरजिम्मेदाराना शॉट पर आउट होने से राइट इतने नाराज हुए कि उन्होंने ड्रेसिंग रूम में उनका कॉलर पकड़ लिया। इस घटना का उल्लेख राइट ने अपनी पुस्तक में किया था। सहवाग और तत्कालीन टीम मैनेजर राजीव शुक्ला ने भी अलग-अलग अवसरों पर इस विवाद को याद किया है।
यह हाल की घटना नहीं है। राइट की पुस्तक पर आधारित वर्ष 2006 की रिपोर्ट इसे इंग्लैंड में खेली गई 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी से जोड़ती है। उस समय सौरव गांगुली भारतीय टीम के कप्तान थे। भारत, इंग्लैंड और श्रीलंका के बीच त्रिकोणीय एकदिवसीय प्रतियोगिता खेली जा रही थी। मैदान पर टीम के प्रदर्शन के बीच ड्रेसिंग रूम में हुआ यह विवाद बाद में सार्वजनिक चर्चा का विषय बना।
श्रीलंका के खिलाफ मैच में आउट होने पर भड़के थे राइट
राइट के विवरण के अनुसार, ओवल में श्रीलंका की टीम 202 रन पर आउट हो गई थी। लक्ष्य का पीछा करते समय भारत ने कप्तान गांगुली का विकेट जल्दी गंवा दिया। इसके बाद सहवाग ने गेंदबाज के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने का प्रयास किया और कैच आउट हो गए। भारत का स्कोर दो विकेट पर 26 रन रह गया। कोच पहले से चाहते थे कि सहवाग अपनी आक्रामकता के साथ मैच की जरूरत का भी ध्यान रखें। इसी पृष्ठभूमि में उनकी नाराजगी बढ़ गई। राइट का मानना था कि स्वाभाविक खेल का तर्क देकर हर परिस्थिति में जोखिम लेना उचित नहीं है। अपनी पुस्तक में उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय उनका गुस्सा सीमा पार कर गया था। सहवाग के ड्रेसिंग रूम में पहुंचने पर वह उनके पास गए, कॉलर पकड़ा और खराब शॉट खेलने पर नाराजगी जताई। इस प्रतिक्रिया से वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। बाद में खिलाड़ियों ने भी उनसे कहा कि उनका व्यवहार जरूरत से ज्यादा कठोर था।
टीम से बाहर करने की चेतावनी का भी उल्लेख
इस पुराने किस्से पर प्रकाशित एक अन्य विवरण में राइट की राहुल द्रविड़ से बातचीत का जिक्र मिलता है। उसके अनुसार, कोच ने नाराजगी में कहा था कि सहवाग दोबारा ऐसा खराब शॉट खेलकर आउट हुए तो उन्हें टीम से बाहर कर देंगे। हालांकि, यह चेतावनी बाद की रिपोर्ट में दर्ज विवरण है; इसे किसी आधिकारिक चयन आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उस घटना के बाद सहवाग को इसी कारण टीम से बाहर किए जाने की पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है। इस प्रसंग में दो बातें अलग हैं—बल्लेबाजी के तरीके पर कोच की नाराजगी और खिलाड़ी के साथ शारीरिक व्यवहार। राइट की आपत्ति शॉट के चयन तथा जिम्मेदारी को लेकर थी, लेकिन कॉलर पकड़ने से विवाद का स्वरूप बदल गया। सहवाग के लिए मामला केवल खराब प्रदर्शन पर मिली फटकार तक सीमित नहीं रहा। बाद में दोनों के बीच बातचीत हुई और संबंध सामान्य हुए।
सहवाग ने मैनेजर के सामने जताई थी नाराजगी
सहवाग ने वर्षों बाद घटना याद करते हुए बताया था कि कॉलर पकड़ने और धक्का दिए जाने से वह नाराज थे। उन्होंने तत्कालीन मैनेजर राजीव शुक्ला से शिकायत की थी। उनके बयान के अनुसार, उन्होंने कोच से माफी की मांग रखी और बाद में बातचीत से विवाद सुलझा। सहवाग ने यह भी कहा था कि सचिन तेंदुलकर ने इस मामले को अतीत में छोड़कर आगे बढ़ने की सलाह दी थी। शुक्ला ने अपने विवरण में सहवाग के बेहद दुखी होने की बात कही। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर उन्होंने खिलाड़ी को शांत किया और कोच से बातचीत की। उनके अनुसार, राइट चाहते थे कि सहवाग अधिक रन बनाएं, लेकिन आउट होने के बाद वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके। शुक्ला का कहना था कि विवाद के बाद कोच और बल्लेबाज के संबंध सामान्य बने रहे।
गांगुली की भूमिका पर अलग-अलग विवरण
इस घटना से जुड़े सभी संस्मरण पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। कुछ विवरणों में कप्तान गांगुली के नाराज होने और माफी की मांग का उल्लेख मिलता है। हालांकि, वर्ष 2013 में गांगुली ने कहा था कि घटना के समय वह वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया था कि उन्हें बाद में हरभजन सिंह से जानकारी मिली। इसलिए पूरे घटनाक्रम को सुनाते समय गांगुली के इस स्पष्टीकरण को भी ध्यान में रखना जरूरी है। राइट का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट की कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से जुड़ा रहा। उनके समय भारत ने 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यादगार टेस्ट सीरीज जीती, 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी अपने नाम की और 2003 के एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा। सहवाग के साथ विवाद उसी दौर का एक तनावपूर्ण प्रसंग था। बाद की बातचीत और समझौते ने दोनों को आगे साथ काम करने का अवसर दिया, जबकि यह किस्सा खिलाड़ी की आक्रामक शैली, कोच की अपेक्षाओं और आपसी सम्मान की सीमाओं को लेकर याद किया जाता है।
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