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न्यूज़ीलैंड क्रिकेट में साउथ एशियन मूल के खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव

Kavita2
1 May 2026 3:59 PM IST
न्यूज़ीलैंड क्रिकेट में साउथ एशियन मूल के खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव
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Sports स्पोर्ट्स: ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में साउथ एशियन समुदाय तेजी से बढ़ते हुए सबसे बड़े प्रवासी समूहों में शामिल हो चुका है। इस समुदाय के साथ एक खास जुड़ाव क्रिकेट का भी है, जो कम उम्र से ही इन युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय खेल बन जाता है। इसका सीधा असर न्यूज़ीलैंड क्रिकेट (NZC) पर भी देखने को मिला है, जहां साउथ एशियन मूल के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टीम को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

न्यूज़ीलैंड जैसे देश, जिसकी आबादी लगभग 5.3 मिलियन है और क्रिकेट संसाधन भी सीमित माने जाते हैं, वहां साउथ एशियन टैलेंट ने टीम को गहराई दी है। न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड के पास वित्तीय संसाधन भी सीमित हैं, फिर भी उसने इस प्रवासी टैलेंट को पहचानकर उसे विकसित करने में सफलता हासिल की है।

इस बदलाव की शुरुआत दीपक पटेल जैसे खिलाड़ियों से मानी जाती है, जिन्हें साउथ एशियन समुदाय के उन शुरुआती खिलाड़ियों में गिना जाता है जिन्होंने ब्लैक कैप्स के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। उनके बाद कई खिलाड़ियों ने न्यूज़ीलैंड की राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह बनाई।

इनमें जीतन पटेल, जीत रावल, तरुण नेथुला, रॉनी हीरा, ईश सोढ़ी, एजाज पटेल, रचिन रवींद्र और आदित्य अशोक जैसे नाम शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग समय पर टीम का प्रतिनिधित्व किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इन खिलाड़ियों ने न्यूज़ीलैंड क्रिकेट को न सिर्फ विविधता दी है बल्कि टीम की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ाई है।

हाल के वर्षों में एक नया नाम मुहम्मद अब्बास का सामने आया है, जो इस श्रृंखला में सबसे नया जुड़ाव माना जा रहा है। लाहौर में जन्मे और पाकिस्तानी फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर अज़हर के बेटे मुहम्मद अब्बास ने मार्च 2025 में न्यूज़ीलैंड टीम में जगह बनाई। उन्होंने अपने डेब्यू मैच में ही शानदार प्रदर्शन करते हुए 24 गेंदों में सबसे तेज़ ODI अर्धशतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि न्यूज़ीलैंड क्रिकेट की यह सफलता उसकी समावेशी चयन नीति और प्रवासी समुदायों के बेहतर एकीकरण का परिणाम है। साउथ एशियन खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता, स्पिन गेंदबाजी में दक्षता और बल्लेबाजी में विविधता ने टीम को संतुलन प्रदान किया है।

क्रिकेट विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले वर्षों में न्यूज़ीलैंड में साउथ एशियन मूल के खिलाड़ियों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे टीम को और अधिक गहराई और विकल्प मिलेंगे। यह प्रवृत्ति न केवल न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के लिए फायदेमंद है, बल्कि वैश्विक क्रिकेट में भी विविधता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे रही है।

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