
Sports स्पोर्ट्स: एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन (AAA) ने गुरुवार को हांगकांग में आयोजित अपनी एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक के बाद 2027 एशियन रिले और 2028 एशियन इंडोर चैंपियनशिप की मेजबानी के अधिकारों की घोषणा कर दी। इस निर्णय के तहत भारत को दो बड़े एथलेटिक्स आयोजनों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
Asian Athletics Association की बैठक में यह फैसला लिया गया कि 2027 एशियन रिले का आयोजन भारत के चंडीगढ़ में किया जाएगा, जबकि 2028 एशियन इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी भुवनेश्वर को दी गई है। यह निर्णय एशियाई स्तर पर एथलेटिक्स के विकास और नए आयोजनों को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस बैठक में एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) की ओर से स्पोक्सपर्सन के रूप में आदिल सुमरिवाला शामिल हुए थे। वे वर्ल्ड एथलेटिक्स के वाइस प्रेसिडेंट के रूप में भी बैठक में उपस्थित थे। उन्होंने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि एशियन रिले चंडीगढ़ में आयोजित होंगे और एशियन इंडोर चैंपियनशिप का आयोजन भुवनेश्वर में किया जाएगा।
Athletics Federation of India ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ा अवसर माना है। इससे देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलेटिक्स आयोजनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका मिलेगा।
इस बैठक में यह भी चर्चा की गई कि एशिया में एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं को और अधिक व्यापक और आधुनिक बनाया जाए, ताकि अधिक देशों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके और खेल का स्तर लगातार ऊपर उठे। मेजबानी के अधिकार मिलने से भारत में खेल ढांचे और आयोजन क्षमताओं को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
Adille Sumariwalla ने बताया कि यह निर्णय भारत के लिए एथलेटिक्स क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल खिलाड़ियों को लाभ मिलेगा, बल्कि खेल प्रबंधन और आयोजन अनुभव भी मजबूत होगा।
चंडीगढ़ और भुवनेश्वर को अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स आयोजनों के लिए पहले भी जाना जाता रहा है, और अब इन शहरों को एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिलने से उनकी खेल पहचान और मजबूत होगी। विशेष रूप से भुवनेश्वर ने पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं का सफल आयोजन किया है, जिससे उसकी तैयारियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा बढ़ा है।
इस निर्णय को एशियाई एथलेटिक्स के विस्तार और भारत की खेल कूटनीति के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन आयोजनों से खिलाड़ियों को बेहतर प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलने की उम्मीद है।





