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दो विश्व कप से पहले टीम इंडिया की बढ़ी टेंशन, ईशान किशन के आंकड़ों ने चौंकाया
Ratna Netam
30 Oct 2026 9:19 PM IST

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन का विदेशी धरती पर लगातार कमजोर प्रदर्शन टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेष रूप से दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे SENA देशों में उनका बल्लेबाजी रिकॉर्ड निराशाजनक रहा है। आगामी दो आईसीसी विश्व कप टूर्नामेंटों से पहले ईशान किशन की विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाजी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में खेले गए चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में ईशान किशन बिना खाता खोले आउट हो गए। उनकी इस असफलता के बाद विदेशी परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।ईशान किशन को भारतीय टीम के आक्रामक बल्लेबाजों में गिना जाता है। अपनी तेज बल्लेबाजी और बड़े शॉट खेलने की क्षमता के कारण वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में महत्वपूर्ण विकल्प रहे हैं। वर्ष 2026 में उन्होंने कई शानदार पारियां भी खेली हैं, लेकिन विदेशी मैदानों पर उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी स्पष्ट दिखाई दे रही है।ऑकलैंड के ईडन पार्क में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए चौथे टी20 मैच में भारतीय टीम को 260 रनों का विशाल लक्ष्य मिला था। टीम को मजबूत शुरुआत की जरूरत थी, लेकिन ईशान किशन केवल तीन गेंदों का सामना करके शून्य पर आउट हो गए। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जैकब डफी ने उन्हें पवेलियन भेजा। इससे भारत की लक्ष्य का पीछा करने की चुनौती और कठिन हो गई।इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में सात विकेट खोकर 259 रन बनाए। ग्लेन फिलिप्स ने 49 गेंदों में 107 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि माइकल ब्रेसवेल ने 25 गेंदों में 65 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 172 रन ही बना सकी और न्यूजीलैंड ने मुकाबला 87 रनों से जीत लिया। हालांकि, पांच मैचों की सीरीज में भारतीय टीम अब भी 3-1 से आगे है।
SENA देशों में ईशान किशन का निराशाजनक रिकॉर्ड
SENA शब्द दक्षिण अफ्रीका (South Africa), इंग्लैंड (England), न्यूजीलैंड (New Zealand) और ऑस्ट्रेलिया (Australia) के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन देशों की तेज और उछाल वाली पिचों पर बल्लेबाजी करना उपमहाद्वीप के खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ईशान किशन ने SENA देशों में 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों में केवल 177 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 17.70 और स्ट्राइक रेट लगभग 118 रहा है।इन 10 पारियों में उनके बल्ले से केवल एक अर्धशतक निकला है, जबकि सर्वोच्च स्कोर 56 रन रहा है। उनके आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज को देखते हुए यह रिकॉर्ड उम्मीदों के अनुरूप नहीं माना जा रहा।यदि इन देशों में खेले गए सभी प्रारूपों के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों को जोड़ दिया जाए, तो ईशान किशन ने 12 मैचों में 192 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका औसत केवल 16 रहा है।
घरेलू और विदेशी प्रदर्शन में बड़ा अंतर
वर्ष 2026 में ईशान किशन ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार बल्लेबाजी की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे मुकाबले तक उन्होंने 36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 1,159 रन बनाए थे।इस दौरान उनका बल्लेबाजी औसत 35.12 और स्ट्राइक रेट 170 से अधिक रहा है। उन्होंने एक शतक और सात अर्धशतक लगाए हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 103 रन रहा है।लेकिन जब यही बल्लेबाज SENA देशों की पिचों पर उतरता है, तो उसके आंकड़े काफी कमजोर नजर आते हैं।
| प्रदर्शन | टी20 अंतरराष्ट्रीय आंकड़े |
| वर्ष 2026 में रन | 1,159 |
| वर्ष 2026 में औसत | 35.12 |
| वर्ष 2026 में अर्धशतक | 7 |
| SENA देशों में रन | 177 |
| SENA देशों में औसत | 17.70 |
| SENA देशों में अर्धशतक | 1 |
30 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर।
इंग्लैंड दौरे पर भी नहीं दिखी निरंतरता
ईशान किशन ने वर्ष 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 0, 49, 13, 4 और 56 रन की पारियां खेलीं।इस दौरान उन्होंने एक अर्धशतक लगाया, लेकिन बाकी मुकाबलों में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके। विशेष रूप से इंग्लैंड की तेज और स्विंग गेंदबाजी के सामने उनकी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने की क्षमता पर सवाल उठे।इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला में भी उनका प्रदर्शन कमजोर रहा। दो वनडे मुकाबलों में उन्होंने क्रमशः एक और 14 रन बनाए। इससे विदेशी परिस्थितियों में उनकी बल्लेबाजी को लेकर चिंता बढ़ी है।न्यूजीलैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भी उन्होंने अब तक खेले गए दो मुकाबलों में केवल एक रन बनाया है। क्राइस्टचर्च में वह तीन गेंदों पर एक रन बनाकर आउट हुए थे, जबकि ऑकलैंड में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए।
2027 और 2028 विश्व कप से पहले बड़ी चुनौती
भारतीय टीम के सामने अगले दो वर्षों में दो महत्वपूर्ण आईसीसी टूर्नामेंट हैं। वर्ष 2027 में वनडे विश्व कप का आयोजन दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होगा।इसके बाद वर्ष 2028 में टी20 विश्व कप की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे।इन दोनों टूर्नामेंटों के संदर्भ में SENA परिस्थितियों में प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो जाता है। दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के मैदानों पर तेज गेंदबाजी, अतिरिक्त उछाल और गेंद की गति से तालमेल बैठाना बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन सकता है।ऐसे में भारतीय टीम प्रबंधन के लिए यह जरूरी होगा कि संभावित विश्व कप खिलाड़ियों को इन परिस्थितियों में पर्याप्त तैयारी और मैच अनुभव मिले।हालांकि, ईशान किशन का विश्व कप टीम में स्थान अभी निश्चित नहीं है। अंतिम चयन उनके प्रदर्शन, टीम संयोजन और अन्य उपलब्ध खिलाड़ियों की फॉर्म पर निर्भर करेगा।
विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
ईशान किशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा है। वह विकेटकीपिंग के साथ शीर्ष क्रम में तेज रन बनाने की क्षमता रखते हैं।बाएं हाथ का बल्लेबाज होने के कारण वह टीम के बल्लेबाजी संयोजन में विविधता भी जोड़ते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल आक्रामक बल्लेबाजी पर्याप्त नहीं होती। कठिन परिस्थितियों में टिककर खेलने और टीम की जरूरत के मुताबिक पारी बनाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।भारतीय टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में आगामी मुकाबलों में निरंतर प्रदर्शन चयन की दृष्टि से अहम होगा।
वापसी के बाद दिखाया था शानदार फॉर्म
ईशान किशन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। कुछ समय तक भारतीय टीम से बाहर रहने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया।सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने झारखंड की कप्तानी करते हुए टीम को खिताब दिलाया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने 517 रन बनाए और फाइनल मुकाबले में 49 गेंदों पर 101 रनों की शानदार पारी खेली थी।घरेलू क्रिकेट में इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय टीम में वापसी का रास्ता तैयार किया। उनके प्रदर्शन ने साबित किया कि उनमें बड़े स्कोर बनाने और आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की क्षमता मौजूद है।
विदेशी पिचों पर तकनीक सुधारना जरूरी
क्रिकेट विश्लेषण के लिहाज से ईशान किशन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती तेज और उछाल वाली गेंदों के खिलाफ अपनी बल्लेबाजी को अधिक प्रभावी बनाना है।ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड जैसे देशों में तेज गेंदबाज नई गेंद से अतिरिक्त उछाल और गति हासिल कर सकते हैं। इंग्लैंड में स्विंग और सीम मूवमेंट बल्लेबाजों के लिए कठिनाई पैदा कर सकते हैं।इन परिस्थितियों में बेहतर फुटवर्क, सही गेंद का चुनाव और शुरुआती ओवरों में संयम महत्वपूर्ण होता है।ईशान किशन स्वाभाविक रूप से आक्रामक बल्लेबाज हैं। उन्हें अपनी आक्रामकता बनाए रखते हुए जोखिम भरे शॉट खेलने के समय का बेहतर चुनाव करना होगा।कुल मिलाकर, ईशान किशन का वर्ष 2026 में प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है, लेकिन SENA देशों में उनके आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। आगामी दो विश्व कप से पहले भारतीय टीम प्रबंधन के लिए यह महत्वपूर्ण सवाल होगा कि क्या किशन विदेशी परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी को और बेहतर बना सकते हैं।यदि वह अपनी कमजोरियों पर काम करके प्रदर्शन में निरंतरता लाते हैं, तो भारतीय टीम के लिए उपयोगी विकल्प साबित हो सकते हैं। फिलहाल उनके सामने विदेशी मैदानों पर खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है।
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