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तन्वी शर्मा की बड़ी जीत, BWF सुपर 300 ट्रॉफी पर कब्जा

Saba Naaz
2 Aug 2026 5:54 PM IST
तन्वी शर्मा की बड़ी जीत, BWF सुपर 300 ट्रॉफी पर कब्जा
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ताइपे सिटी, पीटीआई। भारतीय बैडमिंटन के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। युवा खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर 300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपना पहला बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर खिताब जीत लिया। पंजाब की 17 वर्षीय तन्वी ने फाइनल मुकाबले में वियतनाम की छठी वरीय खिलाड़ी थुई लिन्ह एनगुएन को सीधे गेम में हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

ताइपे सिटी में खेले गए फाइनल मुकाबले में तन्वी शर्मा ने शुरुआत से ही आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया। उन्होंने 36 मिनट तक चले मुकाबले में एनगुएन को 21-16, 21-16 के अंतर से मात दी। पूरे मुकाबले के दौरान तन्वी ने आक्रामक खेल और शानदार रणनीति का प्रदर्शन किया। उनकी तेज रफ्तार, सटीक शॉट्स और दबाव में शांत रहने की क्षमता ने उन्हें खिताबी जीत दिलाई।

यह तन्वी शर्मा के करियर का पहला BWF विश्व टूर खिताब है। इससे पहले वह पिछले साल अमेरिकी ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट में उपविजेता रही थीं। हालांकि उस समय वह खिताब से चूक गई थीं, लेकिन ताइपे ओपन में उन्होंने अपनी गलतियों से सीख लेते हुए शानदार वापसी की और आखिरकार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

तन्वी शर्मा को भारतीय बैडमिंटन की उभरती हुई प्रतिभाओं में शामिल किया जा रहा है। वह पूर्व भारतीय स्टार पीवी सिंधू के कोच रह चुके पार्क ताए संग से प्रशिक्षण ले रही हैं। उनकी कोचिंग का असर तन्वी के खेल में साफ दिखाई देता है। वह कोर्ट पर निडर अंदाज, तेज आक्रमण और लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं।

तन्वी ने इससे पहले जूनियर स्तर पर भी भारत का नाम रोशन किया है। वह विश्व जूनियर चैंपियनशिप के एक ही सत्र में दो पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने लड़कियों के सिंगल्स वर्ग में रजत पदक हासिल किया था, जबकि मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा वह उस भारतीय टीम का हिस्सा भी रही हैं, जिसने एशियाई टीम चैंपियनशिप में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था।

इस जीत के साथ तन्वी ने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह ताइपे ओपन टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की महिला सिंगल्स फाइनलिस्ट बनीं। उन्होंने 17 साल और 222 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले यह रिकॉर्ड कोरिया के डबल्स खिलाड़ी ली योंग डे के नाम था, जिन्होंने 2006 में पुरुष डबल्स फाइनल में पहुंचते समय 17 साल और 287 दिन की उम्र में यह मुकाम हासिल किया था।

तन्वी शर्मा का सफर बेहद तेजी से आगे बढ़ा है। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने 2025 अमेरिकी ओपन सुपर 300 टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसके बाद उन्होंने लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर विश्व रैंकिंग में सुधार किया और दुनिया की शीर्ष 35 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई।

इस साल भी तन्वी ने कई बड़े टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन किया। वह ताइपे ओपन के अलावा ओडिशा मास्टर्स और गुवाहाटी मास्टर्स में भी फाइनल तक पहुंची थीं। हालांकि दोनों टूर्नामेंटों में उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा था, लेकिन लगातार मेहनत और अनुभव के साथ उन्होंने ताइपे ओपन में खिताब अपने नाम कर लिया।

तन्वी शर्मा की यह जीत भारतीय बैडमिंटन के भविष्य के लिए एक बड़ी उम्मीद मानी जा रही है। पीवी सिंधू, साइना नेहवाल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के बाद अब युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व मजबूत कर रहे हैं। तन्वी की सफलता से देश के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।

उनकी इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय बैडमिंटन जगत में खुशी का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तन्वी इसी तरह मेहनत और निरंतरता बनाए रखती हैं तो आने वाले वर्षों में वह विश्व बैडमिंटन में भारत की सबसे बड़ी सितारों में शामिल हो सकती हैं।

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