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नई दिल्ली: तन्वी पत्री ने 2026 समर यूथ ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। वह सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला सिंगल्स बैडमिंटन खिलाड़ी बन गईं। सेनेगल के डकार में गुरुवार को खेले गए बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में उन्हें मौजूदा वर्ल्ड जूनियर चैंपियन झांग यी शिन के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
गोल्ड मेडल के लिए हुए इस मुकाबले में तन्वी ने छह मैच पॉइंट बचाए, लेकिन वह खुद तीन मौकों को भुनाने से चूक गईं। एक घंटे 22 मिनट तक चले इस कड़े मुकाबले में उन्हें 15-21, 21-13, 26-24 से हार मिली। यह मैच इतना रोमांचक था कि इसे लाइव देख रहे दर्शकों की सांसें थमी रहीं।
बुधवार को तन्वी यूथ ओलंपिक में बैडमिंटन के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं।
तन्वी से पहले, एचएस प्रणय (2010) और लक्ष्य सेन (2018) यूथ ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। लक्ष्य सेन ने 'टीम अल्फा' के साथ मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल भी जीता था, जिसमें आठ अलग-अलग देशों के खिलाड़ी शामिल थे।
गुरुवार को गोल्ड मेडल मैच के पहले गेम में तन्वी ने संभलकर शुरुआत की, लेकिन फिर लगातार सात पॉइंट जीतकर 3-5 के स्कोर से 10-5 की बढ़त बना ली। भारतीय खिलाड़ी ने अपने 'पंच टॉस' से कई मौके बनाए और नेट पर शानदार कंट्रोल दिखाते हुए 25 मिनट में पहला गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में उन्होंने 4-0 की बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन पीछे से आ रही हवा (ड्रिफ्ट) के कारण 'क्लियर' शॉट्स पर तन्वी का कंट्रोल बिगड़ने लगा। मिड-गेम इंटरवल के बाद झांग ने खेल पर पकड़ बना ली और मैच को निर्णायक गेम (डिसाइडर) तक पहुंचा दिया।
निर्णायक गेम में झांग ने अपने बेहतरीन 'क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप' शॉट्स की मदद से शुरुआत में ही 19-10 की बढ़त बना ली। तन्वी ने वापसी करते हुए स्कोर 19-15 तक पहुंचाया, लेकिन एक 'क्रॉस-कोर्ट स्मैश' में गलती करने की वजह से उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को पांच मैच पॉइंट दे दिए।
तन्वी ने उन पांचों मैच पॉइंट को बचा लिया और उनके पास खुद गोल्ड मेडल जीतने के तीन मौके भी आए। लेकिन अंत में झांग के अनुभव ने ही जीत-हार का फैसला तय किया। डकार यूथ ओलंपिक में तन्वी के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए, बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव ने कहा, "तन्वी पात्री ने यूथ ओलंपिक खेलों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करके पूरे देश को गौरवान्वित किया है। महज 15 साल की उम्र में सिल्वर मेडल जीतना एक असाधारण उपलब्धि है और भारत के लिए बेहद गर्व का क्षण है।"
उन्होंने आगे कहा, "पूरे टूर्नामेंट के दौरान उनका जज्बा, संयम और प्रदर्शन हमारी युवा खेल पीढ़ी की अपार क्षमता को दर्शाता है। यह उपलब्धि भारतीय खेलों के लिए एक अहम पड़ाव है और वैश्विक मंच पर हमारे खिलाड़ियों की बढ़ती मौजूदगी का प्रमाण है। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया और इसके सभी सदस्यों की ओर से, मैं तन्वी और उन सभी लोगों को बधाई देता हूं जिन्होंने उनके इस सफर में उनका साथ दिया है।"
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