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सुरेश रैना खुलासा, मैंने कभी नहीं कहा दादा ने बनाई है टीम इंडिया, इस खिलाड़ी को दिया श्रेय

Chandravati Verma
13 Jun 2021 10:20 AM GMT
सुरेश रैना खुलासा, मैंने कभी नहीं कहा दादा ने बनाई है टीम इंडिया, इस खिलाड़ी को दिया श्रेय
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भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) आज जिस स्थिति में है

भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) आज जिस स्थिति में है उसका श्रेय काफी हद तक पूर्व कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) को दिया जाता है. कहा जाता है कि उन्होंने इस टीम को बनाने की नींव रखी और बाहर जीतने की आदत डाली, लेकिन भारत की विश्व कप-2011 की जीत का हिस्सा रहे बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना को ऐसा नहीं लगता है. उनका मानना है कि इस भारतीय टीम को गांगुली ने बनाया है. उनके मुताबिक, टीम को गांगुली ने नहीं बल्कि राहुल द्रविड़ ने बनाया है. रैना की किताब आने वाली है जिसका नाम है 'Believe: What Life and Cricket Taught Me'. इस किताब में रैना ने कई खुलासे किए हैं.

रैना ने कहा है कि राहुल जूनियर खिलाड़ियों के हक के लिए लड़ जाया करते थे. रैना की आने वाली किताब के अंश द प्रिंट ने छापे हैं. रैना ने लिखा है, "राहुल भाई हमेशा से परिवार की तरह हैं. वह जूनियर खिलाड़ियों के लिए लड़ते रहते थे. यह अतिरिक्त प्रयास हमेशा असर छोड़ते थे. युवा खिलाड़ी उनके लिए काफी मायने रखते थे. आप देखिए उनके रहते हुए कितने खिलाड़ी परिपक्व हुए, महेंद्र सिंह धोनी, इरफान पठान, युवराज सिंह, पीयूष चावला, दिनेश कार्तिक, मुनाफ पटेल, एस. श्रीसंत और मैं. राहुल भाई जानते थे कि सात-आठ लड़के आने वाले वर्षों में टीम का चेहरा होंगे और उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया कि हम अच्छे से निखरें.
टीम बनाने का श्रेय राहुल भाई को
रैना ने लिखा है, "आमतौर पर, जब भी लोग उस भारतीय टीम की बात करते हैं तो जो 10-15 साल में निखर कर आई है तो इसका श्रेय धोनी और इससे पहले गांगुली को दिया जाता है, कि इन दोनों ने टीम बनाई और भारतीय टीम को आगे ले गए. मैं कभी इससे पूरी तरह से सहमत नहीं हूं. मैंने कभी नहीं कहा कि दादा ने यह टीम बनाई. उन्होंने और धोनी ने टीम की कप्तानी की और असर भी डाला, यह सच है, लेकिन तीन प्रारूपों में टीम को बनाने का श्रेय राहुल द्रविड़ को जाता है."
चयनकर्ताओं से लड़ जाते थे राहुल
रैना ने बताया है कि राहुल युवा खिलाड़ियों के लिए चयनकर्ताओं से लड़ जाते थे. उन्होंने कहा, "राहुल भाई टीम में युवा खिलाड़ियों को शामिल करने के लिए चयनकर्ताओं से लड़ जाते थे और एक सलाह वो हमेशा हमें देते थे कि जब भी संभव हो रणजी ट्रॉफी खेलो, अच्छा प्रदर्शन करो और खूब रन बनाओ और फिर वापस आकर भारत के लिए खेलो. वह खुद रणजी ट्रॉफी में अपनी टीम के लिए कई सारे मैच खेला करते थे


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