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रवि शास्त्री की सलाह पर भड़क गए थे श्रीसंत, ड्रेसिंग रूम में मचा था हंगामा!

nidhi
4 Nov 2026 6:49 AM IST
रवि शास्त्री की सलाह पर भड़क गए थे श्रीसंत, ड्रेसिंग रूम में मचा था हंगामा!
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Sports News: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जो अपने शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ आक्रामक स्वभाव के कारण भी सुर्खियों में रहे। इन्हीं खिलाड़ियों में एक नाम पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज एस. श्रीसंत का है। अपनी तेज रफ्तार गेंदों, जबरदस्त उत्साह और मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले श्रीसंत कई बार विवादों में भी घिरे। इसी बीच पूर्व भारतीय कप्तान और कोच रवि शास्त्री के साथ उनके एक पुराने किस्से की चर्चा होती रही है। हालांकि, रवि शास्त्री की सलाह पर श्रीसंत के ड्रेसिंग रूम में आपा खोने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भारतीय टीम के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री हमेशा से खिलाड़ियों को खुलकर खेलने और अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने की सलाह देते रहे हैं। दूसरी ओर, श्रीसंत अपने भावुक और आक्रामक व्यवहार के लिए जाने जाते थे। मैदान पर उनका जोश कई बार टीम के लिए फायदेमंद साबित हुआ, लेकिन कुछ मौकों पर उनके व्यवहार को लेकर सवाल भी उठे।
रवि शास्त्री ने श्रीसंत को दी थी खास सलाह
साल 2010 में कोच्चि में आयोजित केरल क्रिकेट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम के दौरान रवि शास्त्री ने श्रीसंत को महत्वपूर्ण सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि श्रीसंत को अपनी ताकत पर ध्यान देना चाहिए, अपने स्वाभाविक अंदाज में खेलना चाहिए और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों सहित किसी से भी डरना नहीं चाहिए। शास्त्री ने उस समय भारतीय तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा के प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया था। उनका मानना था कि श्रीसंत को दूसरे खिलाड़ियों की सफलता से प्रेरणा लेकर अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। शास्त्री ने यह भी कहा था कि श्रीसंत केरल के दूसरे युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर थे श्रीसंत
श्रीसंत ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई यादगार प्रदर्शन किए। वह भारतीय टीम की उन उपलब्धियों का हिस्सा रहे, जिन्हें क्रिकेट प्रशंसक आज भी याद करते हैं। साल 2007 के टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत के दौरान भी श्रीसंत टीम का हिस्सा थे। पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में मिस्बाह उल हक का कैच पकड़कर उन्होंने भारत की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद साल 2011 में वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम में भी वह शामिल रहे। श्रीसंत के खेल की सबसे बड़ी विशेषता उनका आक्रामक रवैया था। वह विकेट लेने के बाद खुलकर जश्न मनाते थे और बल्लेबाजों को चुनौती देने से पीछे नहीं हटते थे। हालांकि, यही आक्रामकता कई बार विवादों का कारण भी बनी।
धोनी के गुस्से का भी सामना कर चुके थे श्रीसंत
श्रीसंत के व्यवहार से जुड़ा एक पुराना किस्सा भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी साझा कर चुके हैं। अश्विन के अनुसार, एक मुकाबले के दौरान तत्कालीन भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी श्रीसंत के व्यवहार से नाराज हो गए थे। अश्विन ने बताया था कि धोनी चाहते थे कि श्रीसंत ड्रेसिंग रूम से नीचे आकर दूसरे रिजर्व खिलाड़ियों के साथ बैठें और टीम की सहायता करें। जब श्रीसंत ने तुरंत निर्देश का पालन नहीं किया, तो धोनी काफी नाराज हुए। अश्विन के मुताबिक, स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि धोनी ने टीम मैनेजर को श्रीसंत की भारत वापसी का टिकट बुक कराने का संदेश देने को कहा था। इसके बाद श्रीसंत ने अपना व्यवहार बदला और टीम की सहायता करने के लिए नीचे आ गए। अश्विन के अनुसार, बाद में दोनों खिलाड़ियों के बीच मामला सुलझ गया था।
विवादों से भी रहा श्रीसंत का पुराना नाता
श्रीसंत के क्रिकेट करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग के पहले सीजन के दौरान हरभजन सिंह और श्रीसंत के बीच हुआ विवाद भारतीय क्रिकेट की चर्चित घटनाओं में शामिल है। मुंबई इंडियंस और किंग्स इलेवन पंजाब के बीच मुकाबले के बाद हरभजन सिंह ने श्रीसंत को थप्पड़ मारा था। इस घटना ने क्रिकेट जगत में काफी विवाद खड़ा कर दिया था। बाद में हरभजन सिंह ने भी इस घटना पर अफसोस जताया। श्रीसंत का नाम मैदान के बाहर हुए कुछ अन्य विवादों से भी जुड़ा। हालांकि, इन घटनाओं के बावजूद उनकी गेंदबाजी प्रतिभा को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चा होती रही।
रवि शास्त्री और श्रीसंत के स्वभाव में था अंतर
रवि शास्त्री अपनी स्पष्टवादिता और अनुशासन को लेकर जाने जाते हैं। भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में भी उन्होंने खिलाड़ियों को निडर होकर क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया। दूसरी ओर, श्रीसंत का स्वभाव काफी भावुक रहा। वह कई बार मैदान पर अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करते दिखाई दिए। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी तेज गेंदबाज के लिए आक्रामकता उपयोगी हो सकती है, लेकिन उसके साथ अनुशासन और संयम बनाए रखना भी जरूरी होता है।
दो विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे श्रीसंत
विवादों के अलावा श्रीसंत की उपलब्धियां भी महत्वपूर्ण रही हैं। उन्होंने भारत के लिए 27 टेस्ट, 53 वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 87 विकेट, वनडे में 75 विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 7 विकेट दर्ज हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2006 में जोहानिसबर्ग टेस्ट में उनकी शानदार गेंदबाजी भारतीय क्रिकेट की यादगार प्रस्तुतियों में गिनी जाती है। श्रीसंत का करियर इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और आक्रामकता किसी खिलाड़ी को अलग पहचान दिला सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक सफलता हासिल करने के लिए संयम भी उतना ही आवश्यक है। रवि शास्त्री की श्रीसंत को दी गई सलाह का सत्यापित संदेश भी यही था कि खिलाड़ी को अपनी ताकत पहचानकर आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन करना चाहिए।
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