
Sports स्पोर्ट्स: श्रेयस पाटिल के लिए फुटबॉल कभी शुरुआती पसंद नहीं थी, लेकिन हालात और मौके ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। 2019 में अपार्टमेंट में दोस्तों के साथ खेलने से शुरू हुआ उनका यह सफर धीरे-धीरे एक पेशेवर दिशा की ओर बढ़ गया और आज वह बेंगलुरु एफसी की युवा प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं।
ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल (GISS) में जगह मिलने के बाद पाटिल का फुटबॉल के प्रति रुझान बढ़ता गया। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु FC सॉकर शील्ड जैसे स्कूल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया, जिसे क्लब नए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान के लिए आयोजित करता है। इसी प्रतियोगिता ने उनके करियर को एक निर्णायक मोड़ दिया।
बेलगावी में जन्मे श्रेयस पाटिल ने इस टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन से स्काउट्स का ध्यान तुरंत आकर्षित किया। उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए न केवल अपनी टीम को मजबूती दी बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिसके चलते उन्हें ‘बेस्ट प्लेयर’ का अवॉर्ड मिला।
पाटिल के अनुसार, उनकी फुटबॉल यात्रा वास्तव में नौ साल की उम्र में शुरू हुई, जब उन्होंने स्कूल स्तर पर खेलना शुरू किया। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु FC सॉकर शील्ड में कई स्काउट्स मौजूद थे और उनके प्रदर्शन के बाद उन्हें अंडर-10 टीम में चयन का मौका मिला।
उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर कोचों ने आगे की संभावनाओं को परखने का निर्णय लिया। इसके बाद श्रेयस को BFC की अंडर-10 अकादमी में शामिल किया गया, जहां उनके खेल में और निखार आया।
यहीं से उनका सफर आगे बढ़ा और उन्हें स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत बेल्लारी स्थित इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में BFC की अंडर-13 रेजिडेंशियल अकादमी में प्रमोट किया गया। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने उन्हें प्रोफेशनल फुटबॉल के करीब पहुंचा दिया।
श्रेयस पाटिल का यह सफर इस बात का उदाहरण है कि कैसे स्कूल स्तर की प्रतियोगिताएं और सही मौके युवा खिलाड़ियों के भविष्य को बदल सकते हैं। दोस्तों के साथ शुरू हुआ उनका खेल अब एक संगठित और पेशेवर प्रशिक्षण प्रणाली का हिस्सा बन चुका है।
आज वे लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने में जुटे हैं और आने वाले समय में बड़े स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखते हैं।





