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जैवलिन स्टार शिवपाल सिंह पर 10 साल की पाबंदी अब करियर खतरे में
नई दिल्ली: भारतीय जैवलिन थ्रोअर और टोक्यो ओलंपियन शिवपाल सिंह के करियर को बड़ा झटका लगा है। नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) के अनुशासनात्मक पैनल ने डोपिंग के दूसरे उल्लंघन मामले में शिवपाल सिंह पर 10 साल का प्रतिबंध लगा दिया है।
शिवपाल सिंह भारत के जाने-माने भाला फेंक खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 2019 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था और टोक्यो ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। लेकिन अब डोपिंग मामले में लगी लंबी पाबंदी ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
दूसरी बार डोपिंग उल्लंघन पड़ा भारी
रिपोर्ट के अनुसार, शिवपाल सिंह का डोप टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। उनके सैंपल में प्रतिबंधित एनाबॉलिक स्टेरॉयड मेथेंडाइनोन (Methandienone) मिला। यह उनका दूसरा डोपिंग उल्लंघन माना गया, जिसके बाद NADA पैनल ने कड़ा फैसला लेते हुए 10 साल का निलंबन लगाया।
इससे पहले भी शिवपाल सिंह डोपिंग मामले में कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। उन्हें चार साल का प्रतिबंध झेलना पड़ा था, जो बाद में अपील के बाद कम भी हुआ था।
शानदार रहा है शिवपाल का करियर
उत्तर प्रदेश के शिवपाल सिंह ने कम उम्र में ही जैवलिन थ्रो में अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने 2019 एशियन चैंपियनशिप में 86.23 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए रजत पदक जीता था।
इसके बाद उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि ओलंपिक में वह फाइनल तक नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके प्रदर्शन को भारतीय एथलेटिक्स में एक बड़ी उपलब्धि माना गया।
करियर पर मंडराया संकट
10 साल के प्रतिबंध के बाद शिवपाल सिंह के लिए दोबारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी करना बेहद मुश्किल हो गया है। लंबे समय तक खेल से दूर रहने के कारण उनकी फिटनेस, प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धी स्तर को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
डोपिंग के खिलाफ खेल जगत में सख्त नियम हैं। खिलाड़ियों से उम्मीद की जाती है कि वे प्रतिबंधित पदार्थों से पूरी तरह दूर रहें और किसी भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें।
भारतीय खेल जगत के लिए चिंता
शिवपाल सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी पर लगा प्रतिबंध भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी चिंता का विषय है। भारत ने हाल के वर्षों में एथलेटिक्स में काफी प्रगति की है, लेकिन डोपिंग के मामले खिलाड़ियों और खेल व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
अब शिवपाल सिंह के पास कानूनी विकल्पों के तहत फैसले को चुनौती देने का रास्ता हो सकता है। हालांकि मौजूदा फैसले के बाद उनका खेल भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है।
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