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टीनएज सेंसेशन से एशियन गेम्स तक शपथ भारद्वाज का शानदार सफर

nidhi
19 Sept 2026 2:47 PM IST
टीनएज सेंसेशन से एशियन गेम्स तक शपथ भारद्वाज का शानदार सफर
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छोटी उम्र में बड़ा कमाल शपथ भारद्वाज की कामयाबी की कहानी
भारतीय निशानेबाजी में युवा प्रतिभाओं की बात हो तो शपथ भारद्वाज का नाम खास तौर पर चर्चा में आता है। कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले शपथ ने ट्रैप शूटिंग में लगातार मेहनत के दम पर बड़ी प्रतियोगिताओं तक का सफर तय किया है। एशियन गेम्स 2026 में भी उनसे भारतीय निशानेबाजी दल को उम्मीदें हैं। शपथ भारद्वाज का निशानेबाजी से जुड़ाव कम उम्र में हुआ। ट्रैप शूटिंग जैसी तकनीकी और मानसिक एकाग्रता वाली स्पर्धा में सफलता के लिए लगातार अभ्यास, धैर्य और दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता जरूरी होती है। शपथ ने इन पहलुओं पर काम करते हुए अपने खेल को मजबूत किया और युवा वर्ग में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
उनका सफर आसान नहीं रहा। शूटिंग में एक छोटे से अंतर से भी परिणाम बदल सकता है। निशाने के समय शरीर का संतुलन, आंखों की एकाग्रता और सही समय पर ट्रिगर दबाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ प्रतियोगिता के दबाव को संभालना भी खिलाड़ी की सफलता में बड़ी भूमिका निभाता है। शपथ ने कम उम्र में इन चुनौतियों का सामना करते हुए अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने की कोशिश जारी रखी।
युवा स्तर पर उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय निशानेबाजी के उभरते चेहरों में शामिल किया। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अनुभव हासिल करने के साथ उनके खेल में भी निखार आया। बड़े टूर्नामेंट में दुनिया के अलग-अलग देशों के निशानेबाजों के सामने प्रतिस्पर्धा करने से उन्हें अपने खेल की कमियों और मजबूत पक्षों को समझने का अवसर मिला। ट्रैप शूटिंग में लक्ष्य हवा में छोड़ी जाने वाली डिस्क होती है, जिसे निशानेबाज को तेजी से पहचानकर निशाना लगाना होता है। लक्ष्य की गति और दिशा बदल सकती है, इसलिए खिलाड़ी को बेहद तेज प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। यही कारण है कि इस खेल में तकनीक के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी मानी जाती है।
एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर दबाव और भी बढ़ जाता है। यहां खिलाड़ी के सामने सिर्फ अपने प्रदर्शन को बेहतर करने की चुनौती नहीं होती, बल्कि कई देशों के शीर्ष निशानेबाजों के साथ मुकाबला भी करना होता है। शपथ के लिए यह प्रतियोगिता अपने अनुभव को बड़े मंच पर साबित करने का अवसर है।
भारतीय शूटिंग दल ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मजबूत प्रदर्शन किया है। युवा खिलाड़ियों के आने से टीम में नई ऊर्जा भी दिखाई दी है। शपथ जैसे निशानेबाजों के लिए बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेना भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए अनुभव हासिल करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
शपथ की कहानी यह भी दिखाती है कि खेल में कम उम्र में पहचान बनाना केवल शुरुआत होती है। असली चुनौती उस स्तर को लगातार बनाए रखना और बड़े मंच पर दबाव के बीच प्रदर्शन करना है। इसके लिए प्रशिक्षण, अनुशासन और मानसिक तैयारी तीनों जरूरी हैं।
एशियन गेम्स 2026 में शपथ भारद्वाज जब ट्रैप शूटिंग रेंज पर उतरेंगे तो उनके सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। भारतीय प्रशंसकों की नजर उनके प्रदर्शन पर रहेगी। युवा उम्र में शुरू हुआ उनका सफर अब एशिया के बड़े खेल मंच तक पहुंच चुका है और यह प्रतियोगिता उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।
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