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सचिन का रिकॉर्ड बचा लेकिन वैभव ने क्रिकेट जगत में छोड़ी छाप

Ratna Netam
31 Aug 2026 3:30 PM IST
सचिन का रिकॉर्ड बचा लेकिन वैभव ने क्रिकेट जगत में छोड़ी छाप
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स्पोर्ट्स : भारतीय क्रिकेट के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने दलीप ट्रॉफी 2026 में अपनी बल्लेबाजी से एक बार फिर सभी को प्रभावित किया, लेकिन वह इतिहास रचने से महज 8 रन दूर रह गए। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में तूफानी पारी खेली और 81 गेंदों में 92 रन बनाकर आउट हो गए। अगर वह 8 रन और बना लेते तो महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का वर्षों पुराना रिकॉर्ड टूट जाता।
15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अपनी इस पारी में आक्रामक बल्लेबाजी का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मैदान के चारों ओर बेहतरीन शॉट लगाए और अपनी पारी में 7 चौके और 7 छक्के जड़े। उनकी बल्लेबाजी देखकर ऐसा लग रहा था कि वह दलीप ट्रॉफी इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे, लेकिन शतक से कुछ कदम पहले ही उनका विकेट गिर गया।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड बच गया
दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड अभी भी महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम कायम है। सचिन ने 1990-91 के दलीप ट्रॉफी सीजन में 17 साल और 262 दिन की उम्र में शतक लगाया था।
वैभव सूर्यवंशी के पास इस रिकॉर्ड को तोड़ने का सुनहरा मौका था। वह सिर्फ 8 रन दूर थे, लेकिन स्पिनर हर्ष दुबे की गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में बाउंड्री पर कैच आउट हो गए। इसके साथ ही सचिन का रिकॉर्ड एक बार फिर सुरक्षित रह गया।
57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
हालांकि वैभव सूर्यवंशी इस मैच में खाली हाथ नहीं लौटे। उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
उन्होंने केवल 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 15 साल और 157 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाकर उन्होंने 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था।
अभिमन्यु ईश्वरन के साथ शानदार साझेदारी
सेंट्रल जोन के खिलाफ मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन के साथ मिलकर ईस्ट जोन को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 161 रनों की शानदार साझेदारी की।
वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर दबाव बनाया। उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास और तकनीक दोनों नजर आए। उन्होंने तेज गेंदबाजों के खिलाफ बड़े शॉट लगाए तो स्पिनरों के खिलाफ भी आसानी से रन बनाए।
शतक से चूकने का दर्द
वैभव सूर्यवंशी जब 92 रन पर आउट हुए तो उनके चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दी। वह जानते थे कि वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने के बेहद करीब पहुंच चुके थे।
हालांकि, इतनी कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसी पारी खेलना भी बड़ी उपलब्धि है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव के अंदर लंबी पारी खेलने की क्षमता है और आने वाले समय में वह कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं।
भारतीय क्रिकेट के भविष्य की झलक
वैभव सूर्यवंशी पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में हैं। कम उम्र में उन्होंने घरेलू क्रिकेट और टी20 मुकाबलों में अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान आकर्षित किया है।
उनकी आक्रामक शैली, आत्मविश्वास और बड़े मंच पर प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा बना रही है। सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भले ही इस बार बच गया हो, लेकिन वैभव ने साबित कर दिया कि वह आने वाले समय में कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ने की क्षमता रखते हैं।
रिकॉर्ड से ज्यादा यादगार रही पारी
क्रिकेट में कई बार खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाने से चूक जाते हैं, लेकिन उनकी पारी हमेशा याद रखी जाती है। वैभव सूर्यवंशी की 92 रनों की पारी भी ऐसी ही रही।
उन्होंने दिखा दिया कि उम्र केवल एक संख्या है और प्रतिभा किसी भी सीमा को पार कर सकती है। दलीप ट्रॉफी में उनकी यह पारी लंबे समय तक चर्चा में रहेगी।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन जिस अंदाज में वैभव सूर्यवंशी आगे बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि भविष्य में वह कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
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