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सचिन तेंदुलकर को Fathers day पर आई पिता की याद, वायरल हुआ वीडियो

Subhi
19 Jun 2022 9:48 AM GMT
सचिन तेंदुलकर को Fathers day पर आई पिता की याद, वायरल हुआ वीडियो
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दुनियाभर में आज यानी 19 जून 2022 को लोग फादर्स डे सेलिब्रेट कर रहे हैं. इसमें दिग्गज क्रिकेटर भी पीछे नहीं है. वो भी अपने-अपने तरीके से पिता को याद कर रहे हैं. इसमें सचिन तेंदुलकर भी शामिल हैं.

दुनियाभर में आज यानी 19 जून 2022 को लोग फादर्स डे सेलिब्रेट कर रहे हैं. इसमें दिग्गज क्रिकेटर भी पीछे नहीं है. वो भी अपने-अपने तरीके से पिता को याद कर रहे हैं. इसमें सचिन तेंदुलकर भी शामिल हैं. उनके क्रिकेटर बनने में पिता का कितना योगदान है, यह सबको मालूम है. वो कई बार इसका जिक्र कर चुके हैं. सचिन ने फादर्स डे के मौके पर अपने पिता रमेश तेंदुलकर, जो मराठी के जाने-माने उपन्यासकार थे, उन्हें याद करते हुए एक खास वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया. इस वीडियो में सचिन ने पिता से अपने रिश्ते, उनकी सिखाई बातें बताई. वीडियो में सचिन की मां भी नजर आ रही हैं. उन्होंने भी सचिन के पिता के व्यक्तित्व से जुड़ी कई खास बातें शेयर की.

सचिन ने ट्विटर पर वीडियो शेयर करने के साथ लिखा, "हर बच्चे का पहला हीरो उसके पिता ही होते हैं. मैं भी अलग नहीं था और आज भी मैं ऐसा मानता हूं. मुझे आज भी उनकी सीख, उनका प्यार याद है और कैसे उन्होंने मुझे अपना रास्ता चुनने की आजादी दी. सभी लोगों को हैप्पी फादर्स-डे."

सचिन तेंदुलकर ने आगे कहा, "पिता ने हमेशा मुझे यही सीख दी कि जिंदगी में कभी शॉर्टकट मत लेना. हमेशा अपने आप को किसी भी चुनौती और लक्ष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार करना और सबसे जरूरी कभी भी अपनी जिंदगी के मूल्यों को मत गिराना. सचिन को आज भी उनकी यह बातें याद हैं और वो इसे अपनी जिंदगी में अपनाने की कोशिश करते हैं."

पिता ने कभी सचिन पर अपनी मर्जी नहीं थोपी: मां

इस वीडियो में सचिन की मां ने कहा, "पिता ने कभी भी सचिन या बाकी बच्चों पर अपनी मर्जी नहीं थोपी. इसलिए बच्चे जब पिता के साथ अपनी पुरानी तस्वीरों को देखते हैं तो उन्हें यह समझ आता है कि पिता किस सोच के व्यक्ति थे." इसी वजह से सचिन और उनके बाकी भाई भी पिता रमेश के गुजर जाने के बरसों बाद भी उन्हें याद करते हैं. इस वीडियो के आखिरी हिस्से में सचिन ने एक पालना दिखाया, जिसपर झूलकर उनके पिता बडे़ हुए थे. इसी वजह से उनके लिए यह पालना खास है और पुराने होने के बावजूद उन्होंने इसे झूले का रूप दे दिया और आज भी इसका इस्तेमाल करते हैं.


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