
SPORT: विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में जगह नहीं मिलने के बाद क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सदागोपन रमेश ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने दावा किया कि अगरकर के कार्यकाल को आगे बढ़ाने में संजू सैमसन की अहम भूमिका रही है। भारत को 23 जुलाई से जिम्बाब्वे दौरे पर तीन टी20 मैचों की सीरीज खेलनी है। इसके लिए घोषित टीम में संजू सैमसन का नाम शामिल नहीं है। सैमसन ने हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की खिताबी जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया था और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार भी मिला था। ऐसे में उन्हें टीम से बाहर किए जाने पर कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाए हैं।
भारत के लिए 19 टेस्ट और 24 वनडे मैच खेलने वाले सदागोपन रमेश ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा कि संजू सैमसन के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें ज्यादा मौके मिलने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि टी20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को सिर्फ कुछ खराब मैचों के आधार पर बाहर करना सही फैसला नहीं है। रमेश ने दावा किया कि अजीत अगरकर का कार्यकाल बढ़ने में टी20 वर्ल्ड कप जीत का बड़ा योगदान रहा और उस जीत में संजू सैमसन की भूमिका अहम थी। उन्होंने कहा कि अगर भारत विश्व कप नहीं जीतता तो शायद अगरकर का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता। उनके अनुसार, संजू की वजह से ही अगरकर आज भी चयन समिति में बने हुए हैं।
पूर्व क्रिकेटर ने संजू के साथ हुए व्यवहार को गलत बताते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी को विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद केवल तीन मैचों के प्रदर्शन के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टीम के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों को मुश्किल समय में समर्थन की जरूरत होती है। संजू सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप में कई यादगार पारियां खेली थीं। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 मुकाबले में नाबाद 97 रन बनाए थे। इसके अलावा सेमीफाइनल और फाइनल जैसे बड़े मुकाबलों में भी उन्होंने टीम के लिए महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। रमेश ने कहा कि सैमसन के पास शतक पूरा करने का मौका था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बजाय टीम की जीत को प्राथमिकता दी।
उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और उन्हें लगातार मौके दिए जाने चाहिए। रमेश ने यह भी कहा कि चयनकर्ताओं को केवल हालिया तीन मैचों के आंकड़े नहीं देखने चाहिए, बल्कि खिलाड़ी के पूरे योगदान और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन को ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि, संजू सैमसन को टीम से बाहर किए जाने के पीछे चयनकर्ताओं की ओर से कोई विस्तृत कारण सामने नहीं आया है। पिछले कुछ मुकाबलों में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था, जिसके बाद टीम प्रबंधन ने अन्य खिलाड़ियों को मौका देने का फैसला किया।
संजू के प्रशंसक भी सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को लंबा मौका मिलना चाहिए। वहीं, कुछ क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि टीम चयन में मौजूदा फॉर्म और टीम संयोजन को भी ध्यान में रखना पड़ता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संजू सैमसन आने वाले मुकाबलों में वापसी कर पाते हैं या नहीं। फिलहाल उनके समर्थन में आए सदागोपन रमेश के बयान ने भारतीय क्रिकेट में चयन प्रक्रिया को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।





