
मणिपुर: युवा वेटलिफ्टर ऋषिकंत सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों की 60 किलोग्राम भारवर्ग प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाते हुए भारत के लिए सिल्वर मेडल हासिल किया। ऋषिकंत ने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। इसके साथ ही उन्होंने न सिर्फ देश का नाम रोशन किया, बल्कि मणिपुर के लिए भी एक नया इतिहास बना दिया।
ऋषिकंत सिंह का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि के बाद राज्य और देशभर में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों ने उनके प्रदर्शन की जमकर सराहना की है।
प्रतियोगिता में ऋषिकंत ने स्नैच कैटेगरी में 121 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। स्नैच में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा और उन्होंने अपनी ताकत व तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क कैटेगरी में उन्होंने 143 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों कैटेगरी को मिलाकर उनका कुल वजन 264 किलोग्राम रहा।
हालांकि, ऋषिकंत स्वर्ण पदक से थोड़ा पीछे रह गए। उन्हें मलेशिया के बिन कस्डन अनिक ने पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने कुल वजन में उनसे 9 किलोग्राम अधिक उठाया। लेकिन ऋषिकंत का रिकॉर्ड प्रदर्शन उन्हें प्रतियोगिता के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल कर गया।
ऋषिकंत की इस सफलता को भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत में वेटलिफ्टिंग का खेल लगातार मजबूत हो रहा है और युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ऋषिकंत ने अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर छोटे शहरों और राज्यों से आने वाले खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर सफलता हासिल कर सकते हैं।
मणिपुर पहले से ही भारत को कई बेहतरीन खिलाड़ियों देने के लिए जाना जाता है। खासतौर पर बॉक्सिंग, हॉकी और वेटलिफ्टिंग जैसे खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है। अब ऋषिकंत सिंह का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है। उनका सिल्वर मेडल मणिपुर के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
ऋषिकंत ने प्रतियोगिता के दौरान जिस तरह दबाव को संभाला और रिकॉर्ड वजन उठाया, वह उनकी मानसिक मजबूती को भी दिखाता है। वेटलिफ्टिंग जैसे खेल में केवल शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि सही तकनीक, संतुलन और एकाग्रता की भी जरूरत होती है। ऋषिकंत ने इन सभी पहलुओं में खुद को साबित किया।
उनकी इस सफलता के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में वह भारत के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे। खेल जगत में उनकी इस उपलब्धि को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
ऋषिकंत सिंह का सिल्वर मेडल केवल एक पदक नहीं है, बल्कि यह मणिपुर और भारत के खेल इतिहास में दर्ज होने वाली एक बड़ी उपलब्धि है। उनके रिकॉर्ड प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया है और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।





