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कोहली से भी ज्यादा कीमती है पुजारा का विकेट : जोस हेजलवुड

Bharti
18 Nov 2020 2:47 PM GMT
कोहली से भी ज्यादा कीमती है पुजारा का विकेट : जोस हेजलवुड
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विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आखिरी तीन टेस्ट से हटने के बावजूद शायद ऑस्ट्रेलियाई टीम की दुविधा कम नहीं हुई हैं

जनता से रिश्ता वेबडेस्क | विराट कोहली के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर आखिरी तीन टेस्ट से हटने के बावजूद शायद ऑस्ट्रेलियाई टीम की दुविधा कम नहीं हुई हैं, क्योंकि कोहली से भी ज्यादा कीमती उनके लिए चेतेश्वर पुजारा का विकेट है। पुजारा का विकेट काफी अहम है। 2018-19 में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीती थी। पुजारा ने इस सीरीज में चार टेस्ट में 74.42 के औसत से 521 रन बनाए थे, जिसमें उन्होंने तीन शतक लगाए थे। यहां चौथे टेस्ट में उनकी नाबाद 193 रनों की यादगार पारी भी शामिल थी।

न्यू साउथ वेल्स के दायें हाथ के तेज गेंदबाज हेजलवुड से जब पूछा गया कि पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे बल्लेबाजों के खिलाफ क्या रणनीति होगी, खासकर पुजारा जो गेंदबाजों को थका देते हैं। हेजलवुड ने कहा, हां यह सही है। पिछली बार जब भारतीय टीम यहां आई थी तो पुजारा ने ठीक ऐसा ही किया था। वह पूरी तरह से विशुद्ध बल्लेबाज हैं, जो पहले गेंदबाजों को थकाते हैं और बाद में मध्य ओवरों में उनके थकने के बाद तेजी से रन बनाते हैं। हेजलवुड ने कहा कि पुजारा का विकेट कीमती है और इस बार वह इस चुनौती के लिए पूरी तरह से तैयार हैं

भारत के ऑस्ट्रेलिया दौरे का प्रसारण 27 नवंबर से सोनी टेन 3 पर किया जाएगा एडिलेड में 17 दिसंबर से पहली बार भारतीय टीम घर के बाहर कोई डे-नाइट टेस्ट खेलेगी। यह चार मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला होगा और भारतीय टीम से ज्यादा ऑस्ट्रेलिया को डे-नाइट टेस्ट खेलने का अनुभव है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को पहले टेस्ट में मिली बढ़त भारत के लिए सिरदर्द बढ़ा सकती है। हेजलवुड भी ऐसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमने पांच-छह वर्ष से सबसे ज्यादा डे-नाइट टेस्ट खेले हैं। हमारी टीम के तेज गेंदबाजों को गुलाबी गेंद से गेंदबाजी का अच्छा अनुभव है। हमें पता है कि नई गेंद किस तरह का बर्ताव करती है और इस बीच चीजें कैसे संभालनी है। बेशक हम इस अनुभव का फायदा उठाकर सीरीज में 1-0 की बढ़त बनाना चाहेंगे।

बुमराह एक्स फैक्टर : हेजलवुड ने विराट के अलावा बल्लेबाजों में शुभमन गिल, हाíदक पांड्या और रोहित शर्मा को बड़ी चुनौती बताया। साथ ही कहा कि टीम की गेंदबाजी अब काफी बेहतर हो गई है। खासकर जसप्रीत बुमराह के आने से बेहद प्रभाव पड़ा है। उनके पास अलग एक्शन है और गति है। वह एक एक्स फैक्टर हो सकते हैं।

स्मिथ व वार्नर से मिलेगी मजबूती : ऑस्ट्रेलियाई टीम भी स्टीव स्मिथ, डेविड वार्नर और मार्नस लाबुशाने जैसे बल्लेबाजों के शामिल होने से इस बार मजबूत हो गई है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रतिद्वंद्विता भी अब ज्यादा बढ़ गई है। हेजलवुड इन दोनों देशों के बीच होने वाली प्रतिद्वंद्विता से वाकिफ हैं और मानते हैं कि इन दोनों देशों के बीच टेस्ट सीरीज एशेज की बराबरी की है। हेजलवुड ने कहा कि भारतीय टीम जब पिछली बार यहां आई थी तो उन्होंने एतिहासिक प्रदर्शन किया था। भारतीय टीम पिछले कुछ सालों में विदेशों में अच्छा क्रिकेट खेल रही है। हेजलवुड ने साथ ही कहा कि स्मिथ और वार्नर के के आने से बड़ स्कोर बनेंगे, क्योंकि जब बल्लेबाज पहली पारी में 500 से 600 रन का स्कोर बनाते हैं, जैसा कि हमने पाकिस्तान के खिलाफ किया था, तो गेंदबाजों को आराम का काफी समय मिल जाता है। उनके चोटिल होने की संभावना कम हो जाती हैं और वह तरोताजा होकर मैदान पर गेंदबाजी करने उतरते हैं। ऐसे में इन तीनों की वापसी टीम के लिए बेहद अहम हो जाती है।

स्पिनरों का इस्तेमाल अहम : कुछ दिन पहले ग्लेन मैकग्रा ने कहा था कि ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर अब पहले जैसा उछाल नहीं रहा है। यहां पर विकेट सपाट हो गए हैं। बल्लेबाजों को यहां खेलने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती है। इस परेशानी से युवा तेज गेंदबाज हेजलवुड चिंतित नहीं है। हेजलवुड ने कहा कि हां यहां पहले जैसे विकेट नहीं रहे हैं। इस स्थिति में स्पिनरों का इस्तेमाल अहम हो जाता है। पहले जैसी विकेट नहीं होने से विदेशी टीम यहां अच्छा कर पा रही हैं। यही हमारे लिए एक चुनौती की तरह है, क्योंकि दोनों ही टीमों को एक जैसे विकेट पर ही खेलना होगा।

बायो-बबल के अनुरूप होना होगा : ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाड़ी लंबे समय से बायो-बबल (कोरोना से बचाव के लिए बनाया गया सुरक्षित माहौल) में रह रहे हैं। पहले उन्होंने इंग्लैंड का दौरा किया, उसके बाद कई खिलाड़ी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आइपीएल में खेले और अब भारत के खिलाफ सीरीज खेलनी है। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति पर हेजलवुड ने कहा कि हां यह मुश्किल समय है। हम परिवार और दोस्तों से लंबे समय से अलग हैं, लेकिन हमें इसके अनुरूप होना होगा। टी-20 विश्व कप, वनडे क्वालीफायर अंकों और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को देखते हुए हर एक मुकाबला अहम हो गया है। एक छोटी जीत भी बड़ी जीत हो सकती है। हमारी नजरें इसी पर लगी हुई हैं। यह माहौल बड़ी चुनौती तो है, लेकिन हमें इससे पूरी तरह से ध्यान हटाकर अपने देश के लिए खेलना होगा।

अगले एक साल पर ध्यान : 2013 में टी-20 में पदार्पण करने के बाद टेस्ट टीम के स्थाई सदस्य हेजलवुड मात्र आठ टी-20 मुकाबले खेल पाए हैं। हेजलवुड ने कहा कि आंकड़े कुछ और कहते हों, लेकिन मैं अभी दोनों टीम से खेल रहा हूं। मैं अगले एक साल पर ध्यान लगाना चाहता हूं। मैंने आइपीएल में जगह बनाई। मैंने एक साल में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। अब मेरा ध्यान अगले एक वर्ष पर है, क्योंकि टी-20 विश्व कप भी अब ज्यादा दूर नहीं है।

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