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राकेश भट्ट ने खेलों में हासिल किया मुकाम
गुजरात के भावनगर जिले के छोटे से गांव मोटी बाबरियात से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स तक पहुंचे राकेश भट्ट की कहानी लगातार मेहनत और सहयोग की अहमियत बताती है। सेरेब्रल पाल्सी के कारण बचपन में चलने और संतुलन बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करने वाले राकेश आज भारत के पैरा स्प्रिंटर हैं। वह जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन पैरा गेम्स 2026 में देश का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं।
25 वर्षीय राकेश टी37 वर्ग की 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लेते हैं। इस वर्ष एशियन पैरा गेम्स 18 से 24 अक्टूबर तक आयोजित होने हैं। इसलिए उनकी मौजूदा उपलब्धि भारतीय दल में चयन है; प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन और पदक का फैसला दौड़ होने के बाद होगा। भारतीय दल की प्रकाशित सूची में भी उनका नाम दोनों स्पर्धाओं के लिए शामिल है।
किसान परिवार में जन्मे राकेश के शुरुआती वर्षों का बड़ा हिस्सा इलाज, फिजियोथेरेपी और रोजमर्रा की गतिविधियों को बेहतर बनाने के प्रयासों में बीता। परिवार की आर्थिक परिस्थितियां सीमित थीं, लेकिन उनके माता-पिता ने पढ़ाई और उपचार जारी रखने में मदद की। मां उनके साथ फिजियोथेरेपी के लिए जाती थीं, जबकि पिता खेती के साथ बेटे की देखभाल की जिम्मेदारी संभालते थे।
गांव में शुरुआती पढ़ाई के बाद गांधीनगर में सद्विचार परिवार की संस्था से उन्हें शिक्षा और सहयोग मिला। खेल गतिविधियों में भाग लेते हुए दौड़ के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। उनके लिए आगे बढ़ने का रास्ता केवल व्यक्तिगत प्रयास से नहीं बना; परिवार, शिक्षा संस्थान और प्रशिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
राकेश ने वर्ष 2022 की राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 और 200 मीटर, दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। अगले वर्ष उन्होंने चीन में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दुबई की विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री प्रतियोगिता में भी दोनों दौड़ों में रजत पदक हासिल किए।
उनकी उपलब्धियों का सिलसिला आगे भी जारी रहा। वर्ष 2025 में मोरक्को की विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में उन्होंने दोनों स्प्रिंट स्पर्धाओं में रजत पदक जीते। मार्च 2026 में नई दिल्ली की ग्रां प्री में दोनों स्पर्धाओं का स्वर्ण उनके नाम रहा। भुवनेश्वर में आयोजित 24वीं राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने 100 और 200 मीटर में स्वर्ण हासिल किया। सितंबर 2024 से राकेश अहमदाबाद की पेस अकादमी में प्रशिक्षक अपूर्व बिस्वास के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव लेकर अब वह जापान में उतरेंगे। उनका सफर दिखाता है कि सुलभ शिक्षा, उपचार, खेल प्रशिक्षण और परिवार का सहयोग मिलने पर प्रतिभा को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं।
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