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सर्वश्रेष्ठ थ्रो से जीता कांस्य
भारत की अनुभवी पैरा एथलीट करमज्योति दलाल ने एशियाई पैरा खेल 2026 में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। जापान के नागोया में बुधवार, 21 अक्टूबर को महिला चक्का फेंक एफ55 स्पर्धा में उन्होंने 21.60 मीटर का थ्रो किया। तीसरे प्रयास में आया यह प्रदर्शन उन्हें पदक तक ले गया। वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहीं करमज्योति की यह उपलब्धि उनके धैर्य और लगातार बेहतर होने की कोशिश का प्रमाण है।
उनकी सफलता को ‘उम्र बस एक नंबर है’ की भावना से जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जन्मतिथि 30 नवंबर, 1987 के अनुसार वह इस प्रतियोगिता के समय 38 वर्ष की हैं और नवंबर में 39 वर्ष की होंगी। व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ पदक जीतना बताता है कि अनुभव के साथ उनके खेल में सुधार का सिलसिला जारी है।
तीसरे प्रयास में आया पदक दिलाने वाला थ्रो
करमज्योति ने महिला चक्का फेंक एफ55 फाइनल में तीसरे प्रयास में चक्का 21.60 मीटर दूर फेंका। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रहा। इस स्पर्धा में चीन की डोंग फेइशिया ने 26.11 मीटर के खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि बहरीन की रूबा अलोमारी ने 22.81 मीटर के प्रदर्शन से रजत हासिल किया।
इस तरह करमज्योति ने मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच तीसरा स्थान प्राप्त किया। कांस्य पदक के साथ अपना पुराना सर्वश्रेष्ठ पीछे छोड़ना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है। यहां व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ का अर्थ उनके अपने करियर का सबसे अच्छा प्रदर्शन है; इसे विश्व रिकॉर्ड या एशियाई रिकॉर्ड नहीं समझना चाहिए।
हादसे ने बदला जीवन, खेल से बनाए रखा रिश्ता
करमज्योति का खेलों से जुड़ाव पैरा एथलेटिक्स से पहले का है। वह जूडो और कबड्डी में राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वर्ष 2008 में छत से गिरने की घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इस हादसे के कारण उनकी शारीरिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और बाद में उन्होंने पैरा खेलों की राह चुनी।
एक खेल से दूसरे खेल में जाना अपने आप में बड़ी चुनौती होती है। करमज्योति के सामने बदली हुई शारीरिक परिस्थितियों के अनुरूप खेल का नया तरीका अपनाने की चुनौती भी थी। चक्का फेंक में उनकी आगे की उपलब्धियां दिखाती हैं कि उन्होंने प्रतिस्पर्धी खेल से अपना संबंध बनाए रखा। नागोया का पदक इसी लंबे सफर का नया पड़ाव है।
2014 से 2026 तक पदकों का लंबा सफर
करमज्योति के लिए यह पहला एशियाई पैरा खेल पदक नहीं है। वर्ष 2014 में इंचियोन में आयोजित खेलों में भी उन्होंने पदक जीते थे। तत्कालीन राष्ट्रपति कार्यालय की जानकारी में महिला चक्का फेंक और गोला फेंक में उनके दो कांस्य पदकों का उल्लेख है। इसलिए 12 साल के संघर्ष को पहली सफलता के इंतजार के रूप में देखना सही नहीं होगा। अधिक सटीक तस्वीर यह है कि 2014 में पदक जीतने के लगभग 12 साल बाद भी वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं और अपना प्रदर्शन बेहतर कर रही हैं।
किसी खिलाड़ी के लिए लंबे समय तक खेल में बने रहना और फिर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। करमज्योति की कहानी में शुरुआती सफलता के बाद लगातार मेहनत करने और नए लक्ष्य तलाशने का पक्ष भी उतना ही अहम है।
विश्व चैंपियनशिप में भी जीत चुकी हैं कांस्य
एशियाई स्तर के अलावा करमज्योति विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2017 में लंदन में उन्होंने महिला चक्का फेंक एफ55 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। यह सफलता उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के प्रमुख पड़ावों में शामिल है।
वह पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के रिकॉर्ड के अनुसार, महिला चक्का फेंक एफ55 के फाइनल में उनका स्थान नौवां रहा था। अब नागोया में पदक और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ हासिल करना उनके सफर में एक और उल्लेखनीय परिणाम है। इन अलग-अलग प्रतियोगिताओं के परिणाम उनके करियर की व्यापक तस्वीर सामने रखते हैं। इस सफर में पदक भी हैं और ऐसे मुकाबले भी, जहां पोडियम तक पहुंचना संभव नहीं हुआ। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मौजूदगी जारी रही है।
प्रधानमंत्री ने मेहनत और आत्मविश्वास को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करमज्योति को कांस्य पदक जीतने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा संदेश में उनके व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का उल्लेख किया गया। साथ ही उनकी खेल यात्रा को दृढ़ता, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से उल्लेखनीय प्रगति हासिल करने का उदाहरण बताया गया।
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