
x
एशियाई पैरा खेलों की तीरंदाजी में मिली बड़ी सफलता
भुवनेश्वर: ओडिशा की पैरा तीरंदाज पायल नाग ने जापान में आयोजित आइची-नागोया एशियाई पैरा खेल 2026 में रजत पदक जीतकर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने भारतीय तीरंदाज शीतल देवी के साथ महिला कंपाउंड युगल स्पर्धा में यह उपलब्धि हासिल की। बुधवार को खेले गए फाइनल में भारतीय जोड़ी को चीन की जोड़ी के खिलाफ 141-150 से हार मिली। स्वर्ण पदक से चूकने के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने भारत के लिए महत्वपूर्ण रजत पदक सुनिश्चित किया। पायल की उपलब्धि उनके खेल कौशल, नियमित अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता का प्रमाण है। बलांगीर जिले के जामुनाबहाल गांव से निकलकर उन्होंने तीरंदाजी में अपनी पहचान बनाई है। एशियाई पैरा खेलों जैसे बड़े मंच पर पदक जीतना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है। ओडिशा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने पायल और शीतल को बधाई देते हुए भविष्य में और सफलताओं की कामना की है।
फाइनल में चीन की जोड़ी से मुकाबला
जापान के ओकाजाकी चुओ सोगो पार्क में हुए खिताबी मुकाबले की शुरुआत बराबरी से हुई। भारतीय जोड़ी ने पहले राउंड में 36 अंक बनाए और चीन ने भी इतने ही अंक हासिल किए। इसके बाद चीनी खिलाड़ियों ने बढ़त बना ली। भारत के अगले तीन राउंड के अंक 35, 34 और 36 रहे, जबकि चीन ने तीनों राउंड में 38-38 अंक जुटाए। इस तरह मुकाबला नौ अंकों के अंतर से चीन के पक्ष में समाप्त हुआ।
भारतीय खिलाड़ियों का सफर क्वालिफिकेशन से ही प्रभावशाली रहा था। शीतल और पायल ने संयुक्त रूप से 1379 अंक बनाकर नया एशियाई और खेलों का रिकॉर्ड स्थापित किया। इसमें पायल ने 675 अंकों का योगदान दिया। दोनों ने क्वालिफिकेशन रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया था। इस प्रदर्शन ने दिखाया कि भारतीय जोड़ी पदक की मजबूत दावेदार थी। ddnews.gov.in
सेमीफाइनल में दर्ज की स्पष्ट जीत
फाइनल तक पहुंचने से पहले पायल और शीतल ने सेमीफाइनल में थाईलैंड की जोड़ी को 151-135 से हराया। सोलह अंकों की इस जीत से उनका रजत पदक पक्का हो गया था। पायल ने व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में भी हिस्सा लिया, जहां क्वार्टर फाइनल में जापान की आया शिनोहारा से 131-135 के अंतर से हारकर उनका अभियान समाप्त हुआ। युगल पदक उनके पहले एशियाई पैरा खेलों को यादगार बनाने वाला परिणाम रहा।
बचपन के हादसे के बाद सीखी नई तकनीक
पायल बचपन में हाई-वोल्टेज बिजली की चपेट में आ गई थीं। हादसे के बाद उनके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े। इसके बाद उन्होंने दैनिक कामों के लिए नई तकनीकें सीखीं और आगे चलकर तीरंदाजी अपनाई। शीतल देवी से प्रेरित पायल ने विशेष उपकरण तथा मुंह से संचालित व्यवस्था की मदद से कंपाउंड तीरंदाजी का अभ्यास किया। प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उनके खेल सफर के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। उन्होंने कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी तीरंदाजी अकादमी में कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफल प्रदर्शन के बाद पायल ने अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों तक जगह बनाई। वर्ष 2025 की राष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप और खेलो इंडिया पैरा खेलों में मिले पदकों ने उनकी आगे की यात्रा को मजबूती दी।
पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाया दम
अप्रैल 2026 में बैंकाक की विश्व पैरा तीरंदाजी सीरीज में पायल ने दो स्वर्ण पदक जीते थे। व्यक्तिगत मुकाबले में उन्होंने शीतल देवी को हराकर खिताब हासिल किया था। अब उन्हीं शीतल के साथ मिलकर उन्होंने एशियाई पैरा खेलों में भारत को रजत दिलाया है। पायल ने इस पदक पर खुशी जताते हुए भविष्य में व्यक्तिगत स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और स्वर्ण जीतने की इच्छा व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनकी टीम भावना और खेल उत्कृष्टता की सराहना की। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी इसे देश और प्रदेश के लिए गर्व का अवसर बताया तथा आगे की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
Next Story





