
लंदन: टेनिस जगत के दिग्गज खिलाड़ी Novak Djokovic ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें दुनिया के सबसे बड़े फाइटर्स में क्यों गिना जाता है। विंबलडन 2026 के क्वार्टर फाइनल में उन्होंने जबरदस्त संघर्ष के बाद जीत हासिल करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली।
सर्बिया के 39 वर्षीय खिलाड़ी ने कनाडा के Felix Auger-Aliassime के खिलाफ पांच घंटे 15 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में जीत दर्ज की। यह मुकाबला विंबलडन इतिहास के सबसे लंबे पुरुष क्वार्टर फाइनल मैचों में शामिल हो गया।
जोकोविच ने मैच में कई बार मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन अपने अनुभव, धैर्य और मानसिक मजबूती के दम पर वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम किया।
पांच सेट की रोमांचक लड़ाई
क्वार्टर फाइनल मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। जोकोविच ने पहला सेट टाई-ब्रेकर में 7-6(10) से जीता, लेकिन ऑगर-अलियासिमे ने शानदार वापसी करते हुए दूसरा सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया।
इसके बाद जोकोविच ने तीसरे सेट में अपना अनुभव दिखाया और 6-3 से बढ़त बना ली। हालांकि कनाडाई खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और चौथे सेट को 6-7(4) से जीतकर मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक पहुंचा दिया।
पांचवें सेट में भी दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष हुआ। आखिरकार जोकोविच ने टाई-ब्रेकर में 7-6(4) से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
विंबलडन करियर की यादगार जीत
यह जीत जोकोविच के विंबलडन करियर की सबसे नाटकीय जीतों में से एक मानी जा रही है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी फिटनेस, मानसिक मजबूती और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता ने सभी को प्रभावित किया।
मैच के दौरान उन्हें कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति और अनुभव के सहारे वापसी की।
इस जीत के साथ जोकोविच की रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब की उम्मीदें अभी भी कायम हैं।
मेसी को दिया मजेदार ट्रिब्यूट
मैच जीतने के बाद जोकोविच ने अपने बयान से माहौल को हल्का कर दिया। पांच घंटे से ज्यादा समय तक कोर्ट पर संघर्ष करने के बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगली बार वह सेंटर कोर्ट पर इतनी लंबी मैराथन खेलने के बजाय फुटबॉल दिग्गज Lionel Messi की तरह सिर्फ 90 मिनट खेलना पसंद करेंगे।
जोकोविच का यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने फुटबॉल के महान खिलाड़ियों में शामिल मेसी के खेल और उनकी सहजता की तारीफ करते हुए मजेदार तुलना की।
उम्र को मात दे रहे हैं जोकोविच
39 साल की उम्र में भी जोकोविच जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह खेल जगत में प्रेरणा का उदाहरण माना जा रहा है। पांच सेट के लंबे मुकाबले में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परीक्षा होती है, लेकिन जोकोविच ने एक बार फिर अपनी फिटनेस और इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया।
उनकी जीत यह दिखाती है कि अनुभव और आत्मविश्वास बड़े मुकाबलों में कितना महत्वपूर्ण होता है।
ऑगर-अलियासिमे ने दी कड़ी चुनौती
कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे ने भी मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जोकोविच को हर विभाग में चुनौती दी और कई मौकों पर दबाव बनाया।
हालांकि निर्णायक क्षणों में जोकोविच का अनुभव भारी पड़ा। अहम पॉइंट्स पर उन्होंने धैर्य बनाए रखा और मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया।
अब नजर सेमीफाइनल पर
जोकोविच की नजर अब विंबलडन के सेमीफाइनल मुकाबले पर है, जहां वह एक और बड़ी जीत हासिल कर खिताब की ओर कदम बढ़ाना चाहेंगे।
टेनिस प्रशंसकों की उम्मीदें एक बार फिर इस महान खिलाड़ी से जुड़ गई हैं। अगर जोकोविच इस टूर्नामेंट में सफल रहते हैं, तो यह उनके शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ देगा।
विंबलडन 2026 में उनकी यह जीत सिर्फ एक मैच की जीत नहीं, बल्कि उम्र, दबाव और चुनौतियों पर विजय की कहानी बन गई है।





