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धोनी नहीं, मोईन अली ने आशीष नेहरा को बताया बेहतर क्रिकेटिंग ब्रेन

Kavita2
3 Aug 2026 12:44 PM IST
धोनी नहीं, मोईन अली ने आशीष नेहरा को बताया बेहतर क्रिकेटिंग ब्रेन
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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को दुनिया के सबसे बेहतरीन रणनीतिकारों में गिना जाता है। मैदान पर उनके फैसले, दबाव की स्थिति में शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता और खेल को पढ़ने की कला ने उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में शामिल किया है। हालांकि, इंग्लैंड के पूर्व ऑलराउंडर मोईन अली की राय इस मामले में थोड़ी अलग है। उन्होंने धोनी की जगह भारत के पूर्व तेज गेंदबाज और गुजरात टाइटंस के मौजूदा हेड कोच आशीष नेहरा को बेहतर ‘क्रिकेटिंग ब्रेन’ वाला खिलाड़ी बताया है।

मोईन अली ने एक इंटरव्यू के दौरान क्रिकेट की समझ और रणनीति पर बात करते हुए कहा कि किसी खिलाड़ी या कोच का असली मूल्यांकन इस बात से होता है कि वह खेल की हर स्थिति को कितनी गहराई से समझता है। उनके अनुसार, एक शानदार क्रिकेटिंग दिमाग रखने वाला व्यक्ति सिर्फ वर्तमान स्थिति को नहीं देखता, बल्कि आगे होने वाली संभावनाओं का भी अंदाजा लगा सकता है।

‘बियर्ड बिफोर विकेट’ शो में बातचीत के दौरान मोईन ने कहा कि उनके नजरिए में क्रिकेटिंग ब्रेन वाला व्यक्ति वह होता है, जिसके पास खेल की हर परिस्थिति के लिए एक स्पष्ट सोच और समाधान होता है। ऐसा व्यक्ति मैच के हर पहलू को समझता है और यह जानता है कि किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन में सुधार क्यों नहीं हो रहा या कोई खिलाड़ी अच्छा क्यों कर रहा है।

मोईन ने कहा कि ऐसे लोग केवल रणनीति नहीं बनाते, बल्कि खेल के छोटे-छोटे पहलुओं पर भी ध्यान देते हैं। वे यह समझते हैं कि किसी खास स्थिति में कौन सा फैसला सही होगा और आने वाले समय में उसका क्या असर पड़ सकता है।

आशीष नेहरा के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए मोईन ने उनकी क्रिकेट समझ की तारीफ की। मोईन ने बताया कि उन्होंने नेहरा के साथ इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में काम किया है और उन्हें करीब से खेल को समझते हुए देखा है।

मोईन अली 2018 से 2020 तक रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) के लिए IPL में खेले थे। उस दौरान आशीष नेहरा टीम के गेंदबाजी कोच और मेंटर की भूमिका में थे। मोईन ने नेहरा की रणनीतिक सोच, खिलाड़ियों को समझने की क्षमता और मैच की परिस्थितियों के हिसाब से फैसले लेने की योग्यता को करीब से देखा।

महेंद्र सिंह धोनी की बात करें तो उनकी कप्तानी के कई फैसले क्रिकेट इतिहास में यादगार रहे हैं। 2007 T20 वर्ल्ड कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा को देना हो या मैदान पर उनके तेज स्टंपिंग और रन आउट के फैसले, धोनी ने कई बार अपनी क्रिकेट समझ का परिचय दिया है।

धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 का T20 वर्ल्ड कप, 2011 का वनडे वर्ल्ड कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती। उनकी शांत सोच और दबाव में सही फैसला लेने की क्षमता को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।

हालांकि, मोईन अली का मानना है कि क्रिकेटिंग ब्रेन का मतलब केवल कप्तानी में लिए गए बड़े फैसले नहीं हैं। उनके अनुसार, खेल को गहराई से समझना, खिलाड़ियों की मानसिकता को पढ़ना और भविष्य की परिस्थितियों का अनुमान लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

आशीष नेहरा ने खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक योगदान दिया और बाद में कोचिंग की भूमिका में भी अपनी पहचान बनाई। गुजरात टाइटंस के साथ उन्होंने कम समय में टीम को मजबूत प्रदर्शन के लिए तैयार किया और IPL में टीम की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई।

मोईन अली की यह टिप्पणी क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गई है, क्योंकि धोनी और नेहरा दोनों ही अपनी-अपनी भूमिकाओं में अलग-अलग तरह की रणनीतिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं।

क्रिकेट में किसी एक व्यक्ति को सबसे बड़ा रणनीतिकार मानना आसान नहीं है, क्योंकि कप्तान, कोच और खिलाड़ी की भूमिका अलग होती है। धोनी ने कप्तान के रूप में अपनी समझ दिखाई, जबकि नेहरा ने कोच और मेंटर के रूप में अपनी रणनीतिक क्षमता साबित की है।

मोईन अली की राय ने एक बार फिर यह बहस शुरू कर दी है कि क्रिकेट में सबसे बड़ा ‘क्रिकेटिंग ब्रेन’ किसे कहा जाए। हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं कि धोनी और नेहरा दोनों ने भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है और खेल को समझने की उनकी क्षमता उन्हें खास बनाती है।

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