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एवलांच में निर्मल पुर्जा की मौत, 14 चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

Kavita2
1 Aug 2026 5:38 PM IST
एवलांच में निर्मल पुर्जा की मौत, 14 चोटियां फतह कर रचा था इतिहास
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इस्लामाबाद/काठमांडू: दुनिया के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जाना जाता था, की पाकिस्तान में ब्रॉड पीक अभियान के दौरान बर्फीले तूफान (एवलांच) की चपेट में आने से मौत हो गई। शुक्रवार को हुए हादसे के बाद पुर्जा और उनकी टीम के कुछ सदस्य लापता हो गए थे। अधिकारियों और अभियान से जुड़े लोगों ने उनकी मौत की पुष्टि की है।

एक बयान में कहा गया कि ब्रॉड पीक पर आए एवलांच के बाद निर्मल पुर्जा और अभियान के अन्य सदस्यों के जीवित नहीं बचने की पुष्टि हुई है। इस खबर के सामने आने के बाद पर्वतारोहण जगत में शोक की लहर फैल गई है।

ब्रॉड पीक पर हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपनी टीम के साथ पाकिस्तान के काराकोरम क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक पर अभियान पर थे। शुक्रवार को अचानक आए बर्फीले तूफान ने पूरे अभियान को प्रभावित कर दिया।

एवलांच के बाद पुर्जा और उनकी टीम के सदस्यों से संपर्क टूट गया था। राहत और बचाव से जुड़े प्रयासों के बीच उनकी स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही थी। बाद में अभियान से जुड़े अधिकारियों ने उनकी मौत की पुष्टि की।

ब्रॉड पीक दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों में शामिल है और इसकी ऊंचाई 8,000 मीटर से अधिक है। यहां चढ़ाई को बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मौसम तेजी से बदलता है और बर्फीले तूफान का खतरा हमेशा बना रहता है।

कौन थे निर्मल पुर्जा?

निर्मल पुर्जा नेपाल के रहने वाले एक दिग्गज पर्वतारोही थे, जिन्होंने अपनी असाधारण उपलब्धियों के कारण दुनियाभर में पहचान बनाई।

उन्होंने 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली दुनिया की सभी 14 पर्वत चोटियों पर चढ़ाई करने का रिकॉर्ड बनाया था। वर्ष 2019 में उन्होंने यह उपलब्धि केवल छह महीने और छह दिनों में हासिल की थी।

इस दौरान उन्होंने बोतलबंद ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया था। उनकी यह उपलब्धि पर्वतारोहण के इतिहास में एक बड़ा रिकॉर्ड मानी गई, क्योंकि इससे पहले इतनी कम अवधि में सभी 14 ऊंची चोटियों को फतह करने का रिकॉर्ड किसी के नाम नहीं था।

‘14 पीक्स’ अभियान से मिली वैश्विक पहचान

निर्मल पुर्जा का नाम उनके महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के कारण दुनियाभर में चर्चित हुआ। इस अभियान का उद्देश्य 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर कम से कम समय में चढ़ाई करना था।

उन्होंने इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा कर साबित किया कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और तैयारी के दम पर असंभव लगने वाले लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

उनकी उपलब्धियों ने उन्हें आधुनिक दौर के सबसे प्रभावशाली पर्वतारोहियों में शामिल कर दिया था।

पर्वतारोहण जगत में शोक

निर्मल पुर्जा की मौत की खबर सामने आने के बाद दुनियाभर के पर्वतारोहियों और उनके प्रशंसकों ने दुख व्यक्त किया है। उनके साहस, अनुशासन और जोखिम उठाने की क्षमता की हमेशा सराहना की जाती रही है।

पुर्जा ने न केवल रिकॉर्ड बनाए, बल्कि पर्वतारोहण की दुनिया में नई पीढ़ी के लोगों को प्रेरित भी किया। उनके अभियानों ने यह दिखाया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास जरूरी है।

नेपाल के लिए भी बड़ी क्षति

निर्मल पुर्जा नेपाल के उन पर्वतारोहियों में शामिल थे जिन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने हिमालयी अभियानों में नेपाल की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया।

उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थीं, बल्कि नेपाल के पर्वतारोहण इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई थीं।

एक महान पर्वतारोही का अंत

निर्मल पुर्जा का जीवन साहस, दृढ़ता और चुनौतियों को स्वीकार करने की मिसाल रहा। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा और नेपाल का झंडा पहुंचाने वाले इस पर्वतारोही ने अपने करियर में कई असंभव दिखने वाले लक्ष्य पूरे किए।

ब्रॉड पीक पर हुआ यह हादसा पर्वतारोहण की दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। निर्मल पुर्जा की उपलब्धियां और उनके साहसिक अभियान आने वाली पीढ़ियों के पर्वतारोहियों को प्रेरित करते रहेंगे।

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