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भाला मुड़ा तो नीरज ने बढ़ाया हाथ, रोहित ने एशियन गेम्स में जीता मेडल

nidhi
12 Oct 2026 10:24 AM IST
भाला मुड़ा तो नीरज ने बढ़ाया हाथ, रोहित ने एशियन गेम्स में जीता मेडल
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रोहित यादव ने जीता कांस्य पदक
नई दिल्ली: भारतीय जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर दिखाया है कि खेल में चैंपियन बनने के साथ-साथ साथी खिलाड़ियों की मदद करना भी कितना मायने रखता है। एशियन गेम्स 2026 में भारत के रोहित यादव ने नीरज चोपड़ा के हस्ताक्षर वाले जैवलिन यानी भाले से थ्रो करते हुए कांस्य पदक जीता। रोहित ने 84.35 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर यह उपलब्धि हासिल की। खास बात यह है कि प्रतियोगिता से पहले रोहित का पसंदीदा भाला क्षतिग्रस्त होकर मुड़ गया था। ऐसे समय में नीरज ने उन्हें अपना एक हस्ताक्षर किया हुआ भाला भेजकर मदद की।
यह कहानी केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स में खिलाड़ियों के बीच सहयोग और आपसी भरोसे को भी दिखाती है। नीरज चोट के कारण एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके, लेकिन उनकी मदद से रोहित को प्रतियोगिता के लिए अपनी पसंद का उपकरण मिल गया।
रोहित का पसंदीदा भाला हुआ क्षतिग्रस्त
इस कहानी की शुरुआत जून 2026 में हुई थी। रोहित यादव ने भुवनेश्वर में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए 87.05 मीटर का थ्रो किया था और स्वर्ण पदक जीता था। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। इसके बाद जब वह पटियाला स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र लौटे, तो उन्हें पता चला कि उनका पसंदीदा जैवलिन मुड़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विमान से यात्रा के दौरान सामान रखने की जगह में रखे सुरक्षात्मक पीवीसी ट्यूब में भाले को नुकसान पहुंचा था। ऐसे में एशियन गेम्स जैसी बड़ी प्रतियोगिता से पहले रोहित के सामने अपने परिचित और पसंदीदा जैवलिन के बिना उतरने की चुनौती खड़ी हो गई। इससे पहले रोहित को कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उधार लिए गए भाले से प्रतियोगिता में हिस्सा लेना पड़ा था। ग्लासगो में उन्होंने 81.56 मीटर का थ्रो किया और सातवें स्थान पर रहे। एशियन गेम्स से पहले उन्हें एक ऐसे जैवलिन की जरूरत थी, जिसके साथ वह सहज महसूस करते हों।
नीरज चोपड़ा ने टैक्सी से भिजवाया अपना जैवलिन
10 सितंबर को पटियाला से दिल्ली जाते समय रोहित यादव ने नीरज चोपड़ा से संपर्क किया। उन्होंने नीरज को बताया कि एशियन गेम्स के लिए उनके पास अपना पसंदीदा भाला नहीं है, क्योंकि वह क्षतिग्रस्त हो चुका है। रोहित और नीरज पहले से संपर्क में थे, इसलिए उन्होंने बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया। नीरज ने अपना हस्ताक्षर किया हुआ जैवलिन निजी टैक्सी सेवा के जरिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम भिजवा दिया। इस तरह रोहित को एशियन गेम्स की तैयारी के लिए एक ऐसा भाला मिल गया, जिस पर उन्हें भरोसा था। नीरज चोपड़ा टखने के लिगामेंट में चोट के कारण अपने 2026 सीजन से हट गए थे। इसी वजह से वह एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके। इसके बावजूद साथी खिलाड़ी की मदद के लिए उनका यह कदम चर्चा में आया है।
दिल्ली में इस्तेमाल नहीं कर सके नीरज का भाला
नीरज से मिला भाला रोहित के पास पहुंच तो गया, लेकिन दिल्ली में एक तकनीकी अड़चन के कारण वह इसका इस्तेमाल नहीं कर सके। उस प्रतियोगिता के लिए भाला टेक्निकल इन्फॉर्मेशन सेंटर (टीआईसी) में निरीक्षण के लिए पंजीकृत नहीं था। ऐसे में रोहित ने वहां दूसरे पंजीकृत जैवलिन से प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और नीरज के दिए भाले को संभालकर जापान ले गए। एशियन गेम्स में उन्होंने आवश्यक प्रक्रिया के तहत दो जैवलिन पंजीकृत कराए। इसके बाद रोहित ने नीरज के दिए भाले से ही थ्रो करने का फैसला किया। उनका कहना था कि उस भाले पर उनकी पकड़ अच्छी थी और वह उसके साथ सहज महसूस कर रहे थे।
84.35 मीटर के थ्रो से जीता कांस्य पदक
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स के पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में रोहित यादव ने 84.35 मीटर का थ्रो किया और कांस्य पदक अपने नाम किया। रोहित के मुताबिक, उन्होंने नीरज के दिए भाले से ही अपना पदक जीतने वाला थ्रो किया। उन्होंने इस मदद के लिए नीरज का आभार जताया और कहा कि वह इस जैवलिन को भविष्य की प्रतियोगिताओं में भी इस्तेमाल करना चाहते हैं। इस प्रतियोगिता में भारत को जैवलिन थ्रो में दोहरी सफलता मिली। यशवीर सिंह ने रजत पदक जीता, जबकि रोहित यादव कांस्य पदक जीतने में सफल रहे। इस तरह नीरज की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में देश का नाम रोशन किया।
नीरज ने संदेश भेजकर दी बधाई
पदक जीतने के बाद रोहित यादव ने नीरज चोपड़ा का बधाई संदेश भी सुना। रोहित के मुताबिक, नीरज ने उन्हें जीत का आनंद लेने और अपने पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय पदक का जश्न मनाने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी तरह फिट होकर लौटने के बाद दोनों फिर साथ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे।
रोहित अब आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने, डायमंड लीग में जगह बनाने और विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करने का लक्ष्य रखते हैं। उनका अंतिम लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। नीरज चोपड़ा का यह सहयोग रोहित के लिए केवल एक भाला उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था। इससे उन्हें एक ऐसे उपकरण के साथ उतरने का अवसर मिला, जिस पर उनका भरोसा था। रोहित ने उसी भाले से 84.35 मीटर का थ्रो फेंककर कांस्य पदक जीता और इस कहानी को एशियन गेम्स के यादगार पलों में शामिल कर दिया।
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