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रणजी ट्रॉफी के लिए मुंबई टीम का ऐलान

Ashish verma
5 Oct 2026 9:38 PM IST
रणजी ट्रॉफी के लिए मुंबई टीम का ऐलान
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ranji trophy 2026-27 : रणजी ट्रॉफी 2026-27 का आगाज 11 अक्टूबर से होने जा रहा है। देश के प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट के नए सीजन के लिए टीमों के ऐलान का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई ने रणजी ट्रॉफी के लिए अपना स्क्वाड जारी कर दिया। टीम की कप्तानी सिद्धेश लाड को सौंपी गई है, जबकि युवा आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाया गया है।
मुंबई की टीम घरेलू क्रिकेट में हमेशा से मजबूत मानी जाती रही है। ऐसे में नए रणजी सीजन के लिए टीम के नेतृत्व पर खास नजर रहने वाली है। सिद्धेश लाड के पास घरेलू क्रिकेट का अच्छा अनुभव है और अब उनके कंधों पर मुंबई को मैदान पर आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। वहीं आयुष म्हात्रे को उपकप्तानी सौंपकर टीम प्रबंधन ने युवा नेतृत्व पर भी भरोसा जताया है।
11 अक्टूबर से रणजी ट्रॉफी का आगाज
रणजी ट्रॉफी भारतीय घरेलू क्रिकेट का सबसे महत्वपूर्ण प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट है। इस प्रतियोगिता में देशभर की टीमें हिस्सा लेती हैं और लंबे प्रारूप में खिलाड़ियों की तकनीक, धैर्य और फिटनेस की असली परीक्षा होती है।
2026-27 सीजन की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। टूर्नामेंट करीब आते ही अलग-अलग टीमों ने अपने स्क्वाड को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुंबई ने भी अपने खिलाड़ियों का ऐलान करते हुए
कप्तानी
की जिम्मेदारी सिद्धेश लाड को देने का फैसला किया है।
नए सीजन में मुंबई के प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रशंसकों की खास नजर रहेगी। घरेलू क्रिकेट में मुंबई का लंबा और गौरवशाली इतिहास रहा है। ऐसे में हर सीजन टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।
सिद्धेश लाड को मिली कप्तानी
मुंबई ने इस बार सिद्धेश लाड पर भरोसा जताते हुए उन्हें टीम का कप्तान बनाया है। लाड घरेलू क्रिकेट का अनुभव रखते हैं और लंबे प्रारूप में खेलने की चुनौतियों से अच्छी तरह परिचित हैं।
रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में कप्तानी केवल मैदान पर गेंदबाजी बदलाव या फील्डिंग सेट करने तक सीमित नहीं रहती। चार दिवसीय और पांच दिवसीय क्रिकेट में कप्तान को परिस्थितियों के हिसाब से लंबे समय की रणनीति तैयार करनी पड़ती है।
कब पारी घोषित करनी है, गेंदबाजों का इस्तेमाल किस तरह करना है, नई गेंद कब लेनी है और बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए किस तरह की फील्ड लगानी है, ऐसे कई फैसले मैच का रुख बदल सकते हैं। ऐसे में सिद्धेश लाड के नेतृत्व कौशल की परीक्षा पूरे सीजन के दौरान होगी।
आयुष म्हात्रे बने उपकप्तान
मुंबई टीम के ऐलान में सबसे ज्यादा ध्यान युवा आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाए जाने पर गया है। भारतीय अंडर-19 टीम की कप्तानी करते हुए विश्व चैंपियन बनने वाले म्हात्रे को अब मुंबई की रणजी टीम में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
अंडर-19 स्तर पर नेतृत्व का अनुभव उनके लिए इस भूमिका में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। युवा खिलाड़ी के तौर पर उपकप्तानी मिलना यह भी दिखाता है कि मुंबई की टीम भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब आयुष के सामने दोहरी जिम्मेदारी होगी। उन्हें अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर ध्यान देने के साथ कप्तान सिद्धेश लाड का मैदान पर सहयोग भी करना होगा। रणजी ट्रॉफी जैसे लंबे टूर्नामेंट में कप्तान और उपकप्तान के बीच बेहतर तालमेल टीम के लिए काफी अहम साबित होता है।
युवा नेतृत्व पर मुंबई का भरोसा
आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाए जाने का फैसला खास माना जा रहा है। अंडर-19 स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद उन्हें सीनियर घरेलू क्रिकेट में नेतृत्व की भूमिका मिलना उनके करियर के लिए बड़ा कदम है।
युवा खिलाड़ियों के लिए रणजी ट्रॉफी ऐसा मंच है, जहां वे अपने प्रदर्शन से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार रन बनाना या विकेट लेना खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देता है।
उपकप्तान की भूमिका निभाते हुए म्हात्रे को अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और अलग-अलग मैच परिस्थितियों में नेतृत्व को करीब से समझने का मौका भी मिलेगा।
मुंबई पर हमेशा रहता है बेहतर प्रदर्शन का दबाव
रणजी ट्रॉफी के इतिहास में मुंबई का नाम बेहद खास रहा है। घरेलू क्रिकेट में मुंबई ने लंबे समय तक अपना दबदबा कायम रखा है और यहां से कई दिग्गज खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचे हैं।
यही वजह है कि रणजी ट्रॉफी का हर नया सीजन शुरू होने पर मुंबई की टीम से उम्मीदें काफी अधिक रहती हैं। खिलाड़ियों के लिए यह गौरव के साथ दबाव भी लेकर आता है। टीम का लक्ष्य केवल मुकाबले जीतना नहीं, बल्कि टूर्नामेंट में लंबे समय तक अपनी चुनौती बनाए रखना होता है।
इस बार नेतृत्व सिद्धेश लाड के हाथों में है और उनके साथ उपकप्तान के रूप में आयुष म्हात्रे मौजूद रहेंगे। अनुभवी और युवा नेतृत्व का यह संयोजन मुंबई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
लंबे फॉर्मेट में होगी असली परीक्षा
रणजी ट्रॉफी टी20 या वनडे क्रिकेट से पूरी तरह अलग चुनौती पेश करती है। यहां बल्लेबाजों को लंबे समय तक क्रीज पर टिकना पड़ता है, जबकि गेंदबाजों को लगातार लंबे स्पेल डालने पड़ सकते हैं।
मैच के अलग-अलग दिनों में पिच का व्यवहार बदल सकता है। शुरुआती दिन तेज गेंदबाजों के लिए मददगार हो सकते हैं तो बाद में स्पिनरों की भूमिका बढ़ सकती है। कप्तान को इन्हीं परिस्थितियों को समझते हुए अपनी रणनीति तैयार करनी होती है।
सिद्धेश लाड के लिए भी यही सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह उपलब्ध खिलाड़ियों का परिस्थितियों के अनुसार सही इस्तेमाल करें। वहीं आयुष म्हात्रे को उपकप्तान के रूप में टीम की रणनीति और मैदान पर फैसलों में अहम भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है।
खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच
रणजी ट्रॉफी केवल टीमों के बीच खिताबी मुकाबला नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के लिए अपने करियर को आगे बढ़ाने का भी बड़ा मंच है। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर रहती है।
युवा खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यहां उन्हें अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलता है। मुंबई की टीम में शामिल खिलाड़ियों के लिए भी नया सीजन अपनी दावेदारी मजबूत करने का अवसर होगा।
11 अक्टूबर से नजर मुंबई के प्रदर्शन पर
रणजी ट्रॉफी 2026-27 के शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। 11 अक्टूबर से मुकाबले शुरू होने के साथ ही मुंबई की नई नेतृत्व जोड़ी की परीक्षा भी शुरू हो जाएगी।
सिद्धेश लाड कप्तान के रूप में टीम को किस तरह आगे लेकर जाते हैं और युवा आयुष म्हात्रे उपकप्तान की जिम्मेदारी में कैसा प्रदर्शन करते हैं, इस पर खास नजर रहेगी। अंडर-19 स्तर पर कप्तानी का सफल अनुभव रखने वाले म्हात्रे के लिए यह सीनियर घरेलू क्रिकेट में नेतृत्व क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर होगा।
मुंबई ने सिद्धेश लाड और आयुष म्हात्रे के रूप में अनुभव तथा युवा जोश का संयोजन तैयार किया है। अब मैदान पर प्रदर्शन तय करेगा कि यह नेतृत्व जोड़ी रणजी ट्रॉफी 2026-27 में मुंबई की चुनौती को कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाती है।
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