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वेलिंगटन: भारत के बॉलिंग कोच मोर्ने मोर्केल ने माना है कि देश के बाहर 'व्हाइट-बॉल' क्रिकेट में टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यूजीलैंड का मौजूदा दौरा चीजों को बदलने का एक अहम मौका है, और भारतीय टीम बेहतर क्रिकेट खेलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मोर्केल ने हाल ही में विदेशों में भारत के खराब प्रदर्शन, खासकर इंग्लैंड के दौरों का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए कितनी तैयारी और योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि टीम इस दौरे को एक बड़ी चुनौती मान रही है और अपने प्रदर्शन के जरिए एक मजबूत छाप छोड़ना चाहती है।
शनिवार को दूसरे वनडे से पहले ब्रॉडकास्टर्स से बात करते हुए मोर्केल ने कहा, "इस ग्रुप के साथ हमारा तालमेल काफी समय से स्पष्ट रहा है। हमने इस दौरे को एक बड़ा मौका माना है। भारत के बाहर हमने अब तक अपना सर्वश्रेष्ठ 'व्हाइट-बॉल' क्रिकेट नहीं खेला है - इंग्लैंड के दौरे को ही देख लीजिए। इसलिए, इस बार हमारा पूरा जोर अच्छा क्रिकेट खेलने पर है। इसके लिए काफी कड़ी मेहनत और योजना की जरूरत होती है। हमें मैदान की परिस्थितियों को समझना और उसके हिसाब से ढलना होता है। आज भी हालात अलग हो सकते हैं, शायद मैदान थोड़ा गीला हो। इसलिए, खिलाड़ियों के लिए यह एक अच्छी चुनौती होगी।"
न्यूजीलैंड की परिस्थितियों, खासकर मैदान के आकार के हिसाब से खुद को ढालना भी भारत की गेंदबाजी तैयारियों का एक अहम हिस्सा रहा है। मोर्केल इस बात से खुश थे कि गेंदबाजों ने परिस्थितियों को अच्छे से समझा और अपनी योजनाओं को मैदान पर सही ढंग से लागू किया। उन्होंने बताया कि मैदान का आकार ही अक्सर यह तय करता है कि किस लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा, "खिलाड़ियों ने परिस्थितियों के हिसाब से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स दिया। टॉस के बाद खेल शुरू होने तक का समय काफी भागदौड़ भरा होता है, लेकिन खिलाड़ियों ने मैदान के आकार को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं को बहुत अच्छे से लागू किया, जो कि बहुत अच्छी बात है। मुझे लगता है कि न्यूजीलैंड में, कभी-कभी मैदान का आकार ही आपको बता देता है कि कैसी गेंदबाजी करनी है, लेकिन फिर भी आपको सही जगह पर गेंद डालनी होती है।" पूरे बॉलिंग अटैक के लिए एक जैसा तरीका अपनाने के बजाय, मोर्केल ने बताया कि कोचिंग स्टाफ ने हर खिलाड़ी के साथ अलग-अलग काम करना बेहतर समझा, ताकि उनकी अपनी खूबियों और स्किल्स का ध्यान रखा जा सके। हालांकि टीम के तौर पर चर्चा करने से यह समझने में मदद मिलती है कि मैदान के हालात से क्या उम्मीद की जा सकती है, लेकिन फाइनल तैयारी में हर बॉलर की रणनीति को मैच की जरूरतों के हिसाब से ढालना शामिल होता है।
मोर्केल ने कहा, "मैं इसे हर खिलाड़ी के हिसाब से अलग-अलग रखने की कोशिश करता हूँ। हम एक साथ बैठकर यह चर्चा जरूर करते हैं कि हमें किन हालात की उम्मीद करनी चाहिए। लेकिन हमारे सभी खिलाड़ियों की स्किल्स अलग-अलग हैं। इसलिए, मेरे लिए ट्रेनिंग और वार्म-अप के दौरान हर खिलाड़ी पर अलग से ध्यान देना और फिर उनसे थोड़ी बातचीत कर लेना ज्यादा सही रहता है। वे सभी बहुत कुशल हैं। वे अपना खेल समझते हैं, उन्हें पता है कि उन्हें क्या करना है; बस उन छोटी-छोटी चीजों को सही दिशा में लाने की जरूरत होती है।"
इसके अलावा, मोर्केल ने मोहम्मद शमी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने पर भी बात की। उन्होंने इस अनुभवी तेज गेंदबाज की तारीफ करते हुए कहा कि शमी की वजह से ही उनके लिए भारतीय ड्रेसिंग रूम में ढलना काफी आसान हो गया था। जब मोर्केल भारतीय टीम से जुड़े, तब शमी भी टीम का हिस्सा थे। मोर्केल ने बताया कि भाषा की रुकावट को दूर करने और टीम के माहौल में घुलने-मिलने में शमी ने उनकी काफी मदद की।
उन्होंने कहा, "मैं काफी किस्मत वाला था कि जब मैं पहली बार इस टीम से जुड़ा, तब शमी भी वहां मौजूद थे। वे बहुत ही कुशल खिलाड़ी हैं और टीम में उनके जैसा इंसान होना बहुत अच्छी बात है। जब मैं टीम में आया, तो उन्होंने ड्रेसिंग रूम में भारतीय भाषा को समझने में मेरी बहुत मदद की। उन्होंने सच में मेरा काफी साथ दिया। इसलिए, उनका जाना दुखद है। लेकिन अच्छी बात यह है कि वे अभी भी अपने घर पर काफी गेंदबाजी कर रहे हैं, और उन्हें ऐसा करते देखना बहुत अच्छा लगता है।"
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