
Meghalaya मेघालय: मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) ने अंतरराज्यीय सीमा समझौते को लेकर सवाल उठाते हुए इसे अधिकतर प्रतीकात्मक बताया है। पार्टी का कहना है कि इस समझौते में जमीनी स्तर पर वास्तविक समाधान के बजाय केवल औपचारिक पहल दिखाई देती है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पारंपरिक नेतृत्व निकायों और ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल्स (ADCs) को बातचीत प्रक्रिया से बाहर रखना इस समझौते की सबसे बड़ी कमी है। पार्टी के अनुसार, इस तरह के फैसले कई संवेदनशील इलाकों, खासकर लापंगाप जैसे क्षेत्रों में स्थिति को और जटिल बना सकते हैं, जहां लंबे समय से विवाद पूरी तरह हल नहीं हुए हैं।
मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विंसेंट एच पाला ने कहा कि अंतरराज्यीय सीमा विवादों को केवल दो राज्य सरकारों के बीच समझौतों के आधार पर हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा जमीनी स्तर से जुड़ा हुआ है और इसमें स्थानीय समुदायों की भूमिका बेहद अहम है।
पाला ने कहा कि बातचीत प्रक्रिया में रंगबाह श्नोंग्स, डोलोइस, ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल्स और प्रभावित गांवों के निवासियों जैसे सभी प्रमुख हितधारकों को शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जब तक स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक किसी भी समझौते का स्थायी समाधान निकलना मुश्किल है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझे बिना किए गए किसी भी निर्णय से असंतोष बढ़ सकता है। पार्टी का मानना है कि पारंपरिक संस्थाएं और स्थानीय प्रशासनिक ढांचे इस तरह के विवादों को समझने और समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस बयान के साथ ही MPCC ने राज्य और केंद्र सरकार से अपील की है कि सीमा विवादों के समाधान में अधिक समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम किया जा सके और स्थायी शांति स्थापित हो सके।





