
Bhubaneswar : कर्नाटक के शीर्ष ट्रैक एंड फील्ड एथलीट यशस पलाक्षा और एसएस स्नेहा ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर भरोसा जताते हुए अपने साथ न्याय की उम्मीद व्यक्त की है। दोनों खिलाड़ियों को राज्य सरकार की फ्लैगशिप सालाना इंसेंटिव स्कीम से बाहर रखा गया था, जो ओलंपिक प्रशिक्षण और एथलीटों के विकास के लिए चलाई जाती है।
नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शनिवार को दोनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। 400 मीटर हर्डल्स में यशस पलाक्षा ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि स्प्रिंट इवेंट में एसएस स्नेहा ने सिल्वर मेडल हासिल किया। इन उपलब्धियों के साथ दोनों एथलीटों ने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफिकेशन भी प्राप्त कर लिया है।
यशस पलाक्षा का नाम पहले भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुना गया था, जब उन्होंने 49.00 सेकंड का समय निकालकर देश के सबसे तेज सक्रिय हर्डलर बनने का रिकॉर्ड बनाया था। उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स में उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
यशस पलाक्षा भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं और खेल के साथ-साथ अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, जो स्वयं एक पूर्व एथलीट रह चुके हैं, राज्य के खिलाड़ियों के लिए बेहतर नीतियों पर काम करेंगे और उन्हें उचित सहायता प्रदान करेंगे।
यशस का कहना है कि राज्य सरकार की यह योजना 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक तक खिलाड़ियों को हर साल 10 लाख रुपये की सहायता देने के लिए बनाई गई है, लेकिन उन्हें अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए मुख्यमंत्री इस मामले को गंभीरता से देखेंगे और योग्य खिलाड़ियों को उनका हक मिलेगा।
उन्होंने कहा, “हमारे नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सर भी एक पूर्व एथलीट हैं। जब से उन्होंने पद संभाला है, मुझे विश्वास है कि वे राज्य में एथलीटों के हित में कुछ ठोस कदम उठाएंगे।”
एसएस स्नेहा ने भी अपने प्रदर्शन से एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई कर राज्य का नाम रोशन किया है। दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने कर्नाटक में एथलेटिक्स की मजबूत स्थिति को एक बार फिर उजागर किया है।
इस पूरे मामले ने राज्य में खेल नीति और खिलाड़ियों को मिलने वाली सहायता पर भी चर्चा शुरू कर दी है। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का मानना है कि प्रतिभाशाली एथलीटों को समय पर समर्थन मिलना जरूरी है, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कुल मिलाकर यशस पलाक्षा और एसएस स्नेहा का प्रदर्शन न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार पर हैं कि वह इन खिलाड़ियों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरती है।





