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‘Jolly LLB 3' मुश्किल में! ये 3 वजहें रोक सकती हैं बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी

Harrison
19 Oct 2025 7:48 PM IST
‘Jolly LLB 3 मुश्किल में! ये 3 वजहें रोक सकती हैं बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी
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Entertainment, मनोरंजन : जॉली एलएलबी’ फ्रेंचाइज़ी की तीसरी किस्त को लेकर दर्शकों में भारी उत्साह था, लेकिन अब जब ‘जॉली एलएलबी 3’ की शूटिंग और शुरुआती रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं, तो यह फिल्म अपनी रिलीज़ से पहले ही आलोचना और अनिश्चितता के घेरे में आ गई है।
कहा जा रहा है कि यह फिल्म पहले जैसी ‘जॉली’ नहीं रही। बॉक्स ऑफिस पर दो सफल पार्ट्स देने के बाद, तीसरा भाग जितनी उम्मीदें जगा रहा था, अब उतने ही नकारात्मक संकेत भी दे रहा है। कई ट्रेड एनालिस्ट और फिल्म समीक्षक इस फिल्म के हिट न हो पाने की आशंका जता रहे हैं।
यहां हम बता रहे हैं वो तीन बड़ी वजहें, जो ‘जॉली एलएलबी 3’ की सफलता की राह में रोड़ा बन सकती हैं।
1. कहानी में नयापन नहीं, बल्कि टकराव
‘जॉली एलएलबी’ और ‘जॉली एलएलबी 2’ दोनों ही फिल्में अपने समय की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था पर तीखा कटाक्ष करती थीं। उनके पास मजबूत पटकथा, सधी हुई अदाकारी और कोर्टरूम ड्रामा का दमदार मिश्रण था।
लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘जॉली एलएलबी 3’ का फोकस मनोरंजन और दो वकीलों (अर्जुन कपूर और अक्षय कुमार) के बीच की खींचतान पर ज्यादा है, जबकि सामाजिक संदेश और संवेदनशील विषयों को पीछे छोड़ दिया गया है।
जैसे-जैसे कंटेंट ओरिएंटेड सिनेमा की डिमांड बढ़ रही है, वैसे-वैसे केवल फॉर्मूला पर चलने वाली फिल्में दर्शकों से कनेक्ट नहीं कर पा रहीं।
2. अक्षय कुमार की ओवरएक्सपोज़र से घटती स्टार वैल्यू
अक्षय कुमार ने पिछले कुछ सालों में इतनी अधिक फिल्में की हैं कि अब उनका प्रभाव कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। ‘सम्राट पृथ्वीराज’, ‘राम सेतु’, ‘बच्चन पांडे’, ‘रक्षा बंधन’ जैसी कई फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद अब दर्शकों का भरोसा डगमगाया है।
‘जॉली एलएलबी 2’ में उनका परफॉर्मेंस सराहा गया था, लेकिन तब परिस्थितियां अलग थीं। आज के समय में दर्शक एक मजबूत कहानी और नई प्रस्तुतिकरण की अपेक्षा करते हैं। सिर्फ बड़े स्टार की मौजूदगी अब फिल्म को हिट नहीं बना सकती।
3. कोर्टरूम ड्रामा की थकान और तुलना का बोझ
‘जॉली एलएलबी’ सीरीज़ के पहले भाग में अर्जुन कपूर और दूसरे भाग में अक्षय कुमार को देखा गया था। अब तीसरे भाग में दोनों को आमने-सामने लाकर मेकर्स शायद मसाला और ड्रामा बढ़ाना चाह रहे हैं, लेकिन इससे फिल्म अपनी असल पहचान खो सकती है।
कई दर्शकों और समीक्षकों का मानना है कि यह कोर्टरूम से ज्यादा क्लैश शो बन गया है, जहां असली मुद्दे गायब हो गए हैं।
साथ ही, 'ओटीटी' पर कई शानदार लीगल ड्रामा (जैसे क्रिमिनल जस्टिस, गिल्टी माइंड्स) के बाद अब दर्शकों की अपेक्षा और भी बढ़ गई है। ऐसे में कमजोर स्क्रिप्ट और घिसे-पिटे डायलॉग्स दर्शकों को बांध नहीं पाएंगे।
क्या अब भी है उम्मीद?
फिल्म को लेकर अभी भी कुछ उम्मीदें बाकी हैं। निर्देशक सुभाष कपूर अगर अपनी पुरानी पकड़ और सामाजिक संदेश की परत को फिर से उभार सकें, तो फिल्म को आलोचकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है। साथ ही, पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकारों की मौजूदगी भी फिल्म में जान डाल सकती है—अगर उन्हें सही ढंग से उपयोग किया जाए।
‘जॉली एलएलबी 3’ एक बेहतरीन फ्रेंचाइज़ी का हिस्सा होते हुए भी, अपनी आत्मा से भटकती नजर आ रही है। कहानी का सतही हो जाना, ओवरएक्सपोज़्ड स्टारकास्ट, और ओरिजिनल फॉर्मूले की कमी — ये तीन प्रमुख कारण फिल्म की संभावित असफलता की ओर इशारा करते हैं।
अब देखना होगा कि मेकर्स इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हैं या नहीं, क्योंकि दर्शक अब सिर्फ नाम पर नहीं, कंटेंट पर टिकट खरीदते हैं।
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