
ग्लासगो : कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो खिलाड़ी इशरूप नारंग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। रविवार को खेले गए मुकाबले में पंजाब की 19 वर्षीय खिलाड़ी ने स्कॉटलैंड की निकोल वुड को कड़े संघर्ष के बाद ‘गोल्डन स्कोर’ पीरियड में हराया।
मुकाबला निर्धारित समय तक बेहद रोमांचक रहा और दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। तय समय खत्म होने तक दोनों जूडोका बराबरी पर थीं और दोनों के खाते में एक-एक ‘शिडो’ दर्ज था। इसके बाद मुकाबले का फैसला गोल्डन स्कोर से हुआ, जहां इशरूप ने धैर्य और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की।
गोल्डन स्कोर में किया निर्णायक प्रहार
मुकाबले के शुरुआती दौर में इशरूप और निकोल वुड के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही। दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को अंक हासिल करने का कोई आसान मौका नहीं दिया। निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी स्कोर बराबर रहा, जिसके कारण मुकाबला गोल्डन स्कोर चरण में पहुंचा।
गोल्डन स्कोर में पहुंचने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी। इशरूप ने दबाव के बावजूद अपना संयम बनाए रखा और गोल्डन स्कोर शुरू होने के एक मिनट 40 सेकंड बाद निर्णायक हमला किया।
भारतीय खिलाड़ी ने ‘यूको’ स्कोर हासिल करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। कुल मिलाकर मुकाबला पांच मिनट 40 सेकंड तक चला।
क्वार्टर फाइनल में एमा रीड से मुकाबला
इशरूप नारंग की जीत के साथ ही भारत की उम्मीदें इस वर्ग में और मजबूत हो गई हैं। अब क्वार्टर फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड की जूडोका एमा रीड से होगा।
क्वार्टर फाइनल मुकाबला इशरूप के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि यहां उन्हें अपनी तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती का पूरा इस्तेमाल करना होगा। हालांकि, शुरुआती मुकाबले में मिली जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
19 साल की उम्र में बड़ा मंच
पंजाब की रहने वाली इशरूप नारंग अभी केवल 19 वर्ष की हैं, लेकिन उन्होंने इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। जूडो जैसे खेल में जहां ताकत के साथ-साथ रणनीति और धैर्य की भी बड़ी भूमिका होती है, इशरूप ने दोनों का बेहतरीन संतुलन दिखाया।
स्कॉटलैंड की अनुभवी खिलाड़ी के खिलाफ उनका प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि वह दबाव वाले मुकाबलों में भी बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
भारतीय जूडो के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट में भारतीय जूडो खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। इशरूप की यह जीत भारतीय जूडो के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के लिए खिलाड़ियों को तकनीकी कौशल के साथ-साथ मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। इशरूप ने अपने पहले मुकाबले में धैर्य दिखाकर यह साबित किया कि वह बड़े मंच पर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।
मुकाबले में दिखी शानदार रणनीति
निकोल वुड के खिलाफ मुकाबले में इशरूप ने जल्दबाजी से बचते हुए सही समय का इंतजार किया। जूडो में एक छोटी सी गलती भी मुकाबले का रुख बदल सकती है, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने पूरे मुकाबले में अपना नियंत्रण बनाए रखा।
निर्धारित समय में दोनों खिलाड़ियों को एक-एक शिडो मिलने के बाद मुकाबला और रोमांचक हो गया था। गोल्डन स्कोर में इशरूप ने मौके को पहचानते हुए निर्णायक तकनीक लगाई और जीत हासिल की।
आगे की चुनौती पर नजर
अब इशरूप नारंग का लक्ष्य क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीतकर पदक की दौड़ में आगे बढ़ना होगा। इंग्लैंड की एमा रीड के खिलाफ होने वाले मुकाबले में उन्हें अपनी पिछली रणनीति को और मजबूत करना होगा।
भारतीय दल और प्रशंसकों को उम्मीद है कि इशरूप अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सफलता हासिल करेंगी।
स्कॉटलैंड की निकोल वुड के खिलाफ मिली यह जीत इशरूप नारंग के करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है। गोल्डन स्कोर में दबाव के बीच हासिल की गई इस जीत ने उन्हें टूर्नामेंट के अगले दौर में पहुंचा दिया है और अब सभी की निगाहें उनके क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।





