
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया। शनिवार को मुक्केबाजों के दमदार प्रदर्शन और इससे पहले जूडो खिलाड़ियों की ऐतिहासिक उपलब्धियों की बदौलत भारत मेडल टैली में तेजी से ऊपर पहुंचा। भारतीय दल ने प्रतियोगिता का समापन 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ कुल 39 पदकों के साथ किया और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया।
भारत के इस प्रदर्शन में सबसे बड़ी भूमिका मुक्केबाजों ने निभाई, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल अपने नाम किए। बॉक्सिंग रिंग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला और उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने देश को पदक तालिका में मजबूत स्थिति दिलाई।
इससे पहले जूडो खिलाड़ियों ने भी भारत के लिए यादगार प्रदर्शन किया। जूडो में आए दो गोल्ड मेडल ने भारतीय दल के आत्मविश्वास को बढ़ाया और पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत करने में अहम योगदान दिया।
कई खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
मुक्केबाजी और जूडो के अलावा कई अन्य खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने वालों में पैरा-एथलीट शर्मिला धनखड़ का नाम शामिल रहा। उन्होंने महिलाओं की शॉट पुट F5 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।
इसके अलावा दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ T47 स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया। पैरा-एथलेटिक्स में सोमन राणा ने पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की पदक संख्या बढ़ाई।
वेटलिफ्टिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस खेल में भारत ने कुल आठ पदक जीते, जिनमें छह सिल्वर मेडल शामिल रहे। वेटलिफ्टिंग में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद और स्टार खिलाड़ी मीराबाई चानू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए पदक जीता।
बदले हुए कार्यक्रम के बावजूद बेहतर प्रदर्शन
भारत का चौथे स्थान पर रहना इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के कार्यक्रम में कई बदलाव किए गए थे। भारत को जिन खेलों से परंपरागत रूप से बड़ी संख्या में पदक मिलते रहे हैं, उनमें से कई खेल इस बार ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थे।
शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे खेलों में भारत का प्रदर्शन हमेशा मजबूत रहा है और इन खेलों से देश को कई पदक मिलते रहे हैं। लेकिन इन खेलों की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने अन्य स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए 39 पदक हासिल किए।
युवा खिलाड़ियों ने दिखाई नई उम्मीद
इस कॉमनवेल्थ गेम्स में कई युवा भारतीय खिलाड़ियों ने भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने दबाव के बीच बेहतरीन खेल दिखाया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।
भारतीय दल के प्रदर्शन से यह साफ हुआ कि देश में खेलों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। अब केवल पारंपरिक खेलों पर निर्भरता नहीं रही, बल्कि एथलेटिक्स, पैरा-स्पोर्ट्स, जूडो और मुक्केबाजी जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय खिलाड़ी लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।
मुक्केबाजी बना भारत की बड़ी ताकत
कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी भारत के लिए सबसे सफल खेलों में से एक रही। भारतीय मुक्केबाजों ने तकनीक, आत्मविश्वास और आक्रामक खेल के दम पर कई मुकाबलों में जीत दर्ज की। सात गोल्ड और तीन सिल्वर मेडल का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि भारत की बॉक्सिंग प्रतिभा लगातार मजबूत हो रही है।
जूडो में ऐतिहासिक उपलब्धि
जूडो में मिले दो गोल्ड मेडल भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे। इस खेल में भारत की सफलता ने यह दिखाया कि जिन खेलों में देश की परंपरागत पकड़ कम मानी जाती थी, उनमें भी खिलाड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
भारत के लिए सकारात्मक संकेत
39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना भारतीय खेल जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। खास बात यह रही कि कई प्रमुख पदक वाले खेलों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर शानदार प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य के कॉमनवेल्थ और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन और टेबल टेनिस जैसे खेल फिर से शामिल होते हैं, तो भारत की पदक संख्या और बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि देश की खेल प्रतिभा लगातार मजबूत हो रही है। मुक्केबाजों की सफलता, जूडो खिलाड़ियों की ऐतिहासिक जीत और पैरा-एथलीटों के शानदार प्रदर्शन ने भारत को गौरवपूर्ण चौथे स्थान तक पहुंचाया।





