
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स के बॉक्सिंग रिंग में शनिवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक कई स्वर्ण पदक अपने नाम किए। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने अपने दमदार प्रदर्शन से विरोधियों को मात दी और देश के पदकों की संख्या में बड़ा इजाफा किया।
शनिवार को भारतीय महिला मुक्केबाजों ने दिन की शुरुआत शानदार अंदाज में की। प्रीति, जैस्मिन, साक्षी, प्रिया और अरुंधति ने अपने-अपने मुकाबलों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीते। इनमें कुछ खिलाड़ियों ने अपने विरोधियों को पूरी तरह दबाव में रखा, जबकि कुछ मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। भारतीय मुक्केबाजों की तकनीक, आक्रामकता और आत्मविश्वास पूरे टूर्नामेंट में देखने को मिला।
महिला वर्ग में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दिखाने वाला था कि देश में बॉक्सिंग की प्रतिभा लगातार मजबूत हो रही है। रिंग में खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और विरोधियों को वापसी का ज्यादा मौका नहीं दिया। उनके शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय दल में उत्साह का माहौल बन गया।
इसके बाद देर शाम पुरुष वर्ग में भी भारतीय मुक्केबाजों ने महिला खिलाड़ियों की सफलता को आगे बढ़ाया। सचिन सिवाच और अंकुश पांगल ने भी अपने मुकाबले जीतकर भारत की स्वर्णिम सफलता को और मजबूत किया। इन जीतों के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के बॉक्सिंग गोल्ड मेडल की संख्या बढ़कर सात हो गई।
पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सचिन सिवाच का मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। उन्होंने नामीबिया के मुक्केबाज ट्राईअगेन न्डेवेलो के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। मुकाबले के अंतिम क्षणों में सिवाच के एक जबरदस्त पंच ने पूरे मैच का रुख बदल दिया।
राउंड खत्म होने की घंटी बजने से ठीक पहले सिवाच ने एक शानदार ओवरहेड लेफ्ट हुक लगाया, जिससे न्डेवेलो लड़खड़ाकर पीछे की ओर चले गए और उन्हें रिंग की रस्सियों का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद रेफरी ने उन्हें स्टैंडिंग काउंट दिया। इस महत्वपूर्ण क्षण ने मुकाबले में सिवाच को बढ़त दिला दी और अंत में फैसला उनके पक्ष में गया।
हालांकि, मुकाबले की शुरुआत सिवाच के लिए आसान नहीं रही थी। न्डेवेलो ने पहला राउंड 3-2 के अंतर से अपने नाम किया था। इसके बाद सिवाच ने वापसी करते हुए दूसरा राउंड भी 3-2 से जीत लिया। ऐसे में तीसरा राउंड निर्णायक बन गया था और दोनों मुक्केबाजों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगा दी।
निर्णायक राउंड में सिवाच ने आक्रामक रुख अपनाया और लगातार हमले किए। उनकी रणनीति साफ थी कि वह मुकाबले को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। आखिरकार उनका आखिरी समय का शानदार पंच निर्णायक साबित हुआ और उन्होंने 3-2 के स्प्लिट फैसले से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
मुकाबले के बाद सचिन सिवाच ने अपने निर्णायक पंच को लेकर कहा कि वह शुरुआत से ही उस लेफ्ट हुक को सही समय पर लगाने का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह विरोधी को उस पंच से हिट करना चाहते थे और आखिरकार उन्हें मौका मिल गया।
23 वर्षीय सिवाच की यह जीत भारतीय बॉक्सिंग के लिए बेहद खास मानी जा रही है। उन्होंने दबाव भरे मुकाबले में धैर्य बनाए रखा और आखिरी क्षण तक हार नहीं मानी। उनकी जीत ने यह साबित किया कि भारतीय मुक्केबाज बड़े मंच पर भी दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करने में सक्षम हैं।
दूसरी ओर, अंकुश पांगल की जीत ने भी भारतीय टीम के उत्साह को बढ़ाया। पुरुष वर्ग में उनकी सफलता ने भारत की पदक तालिका को और मजबूत किया। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने टीम को एक यादगार दिन दिया।
भारतीय बॉक्सिंग टीम के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत, कोचिंग स्टाफ की रणनीति और लंबे समय की तैयारी का बड़ा योगदान माना जा रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंच पर लगातार स्वर्ण पदक जीतना भारतीय बॉक्सिंग के बढ़ते स्तर को दर्शाता है।
शनिवार का दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का अवसर बन गया। बॉक्सिंग रिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह दबदबा कायम किया, उससे आने वाले मुकाबलों के लिए भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में मिली इन सफलताओं ने भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया है।





