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कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत को, स्कॉटलैंड ने सौंपा झंडा और बैटन

Kavita2
3 Aug 2026 2:01 PM IST
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत को, स्कॉटलैंड ने सौंपा झंडा और बैटन
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नई दिल्ली: ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन रविवार को हो गया। समापन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स की अगली बड़ी जिम्मेदारी भारत को सौंप दी गई। स्कॉटलैंड ने कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा और बैटन भारतीय प्रतिनिधिमंडल को सौंपा। वर्ष 2030 में होने वाले इन खेलों की मेजबानी भारत करेगा, जिसमें अहमदाबाद आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है।

समापन समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज और बैटन भारत के प्रतिनिधियों को सौंपा। इस मौके पर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मौजूद रहे। ध्वज और बैटन का हस्तांतरण भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना गया।

2030 का कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन खास महत्व रखता है, क्योंकि यह इन खेलों का शताब्दी संस्करण होगा। भारत इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी कर कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 साल पूरे होने के समारोह का हिस्सा बनेगा। अहमदाबाद में होने वाले इस आयोजन को भारत में खेल बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की क्षमता के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

भारत इससे पहले वर्ष 2010 में नई दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर चुका है। 2030 में अहमदाबाद में आयोजन के साथ भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसने एक से अधिक बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की है।

समापन समारोह की शुरुआत मेजबान स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रदर्शन के साथ हुई। स्कॉटिश कलाकारों ने अपने संगीत, नृत्य और परंपराओं के माध्यम से अपनी संस्कृति की झलक पेश की। इसके बाद समारोह धीरे-धीरे भारतीय रंगों में रंग गया और भारत की सांस्कृतिक विविधता का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला।

कार्यक्रम में भारत और स्कॉटलैंड की संस्कृतियों के बीच एक अनोखी ‘जुगलबंदी’ दिखाई गई। संगीतकारों और नर्तकों ने दोनों देशों की परंपराओं को एक साथ प्रस्तुत किया। भारतीय शास्त्रीय और लोक नृत्यों के साथ स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

भारत की ओर से प्रस्तुत कार्यक्रम में देश की विविधता, परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण देखने को मिला। अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों ने भारत की समृद्ध विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत के लिए खेल क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे देश में खेल सुविधाओं के विस्तार, खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खेल पहचान को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अहमदाबाद में इस आयोजन के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की जाएंगी। खेल सुविधाओं, खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए व्यवस्थाओं तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

भारतीय खेल जगत के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। ओलंपिक, एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों ने खेल संस्कृति को मजबूत किया है।

नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज और बैटन सौंपा जाना युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। यह आयोजन देश में खेलों के प्रति बढ़ती रुचि और संभावनाओं को दर्शाता है।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए केवल एक खेल आयोजन नहीं होगा, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और खेल क्षमता को दुनिया के सामने पेश करने का अवसर भी होगा। अहमदाबाद में होने वाले इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए अब तैयारियों का दौर शुरू होगा।

स्कॉटलैंड से भारत को मिली यह जिम्मेदारी कॉमनवेल्थ खेलों के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। शताब्दी संस्करण की मेजबानी भारत के लिए गौरव का विषय होगी और दुनिया की नजरें 2030 में अहमदाबाद पर होंगी।

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