
ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स दल ने एक और शानदार उपलब्धि हासिल की है। पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश का नाम रोशन किया। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि युवा एथलीट सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया।
शनिवार को हुए इस रोमांचक मुकाबले में दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रवीण ने 16.58 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर की सीजन की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया। मेडल सेरेमनी के दौरान दो भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी ने देश के लिए गर्व का पल बना दिया।
प्रवीण चित्रवेल का लंबे इंतजार के बाद पोडियम फिनिश
प्रवीण चित्रवेल के लिए यह पदक बेहद खास रहा। बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में वह बेहद करीबी अंतर से मेडल जीतने से चूक गए थे। उस समय वह पोडियम से केवल तीन सेंटीमीटर दूर रह गए थे।
इस बार उन्होंने अपने अनुभव और शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए शुरुआत से ही मजबूत चुनौती पेश की। उनकी 16.58 मीटर की छलांग ने उन्हें सिल्वर मेडल दिलाया और लंबे समय से चले आ रहे मेडल के इंतजार को खत्म किया।
प्रवीण भारतीय ट्रिपल जंप के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं और उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है। कॉमनवेल्थ के मंच पर उनका यह प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
सेल्वा प्रभु ने दिखाया दम
वहीं, युवा खिलाड़ी सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने 16.52 मीटर की छलांग लगाकर ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया।
सेल्वा ने पूरे मुकाबले के दौरान आत्मविश्वास दिखाया और दबाव भरे माहौल में शानदार प्रदर्शन किया। उनका यह प्रदर्शन भविष्य में भारतीय ट्रिपल जंप के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कम उम्र में बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेडल जीतकर सेल्वा ने साबित किया कि वह आने वाले वर्षों में भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
गोल्ड पर जमैका के जॉर्डन स्कॉट का कब्जा
इस स्पर्धा में गोल्ड मेडल जमैका के जॉर्डन स्कॉट ने जीता। उन्होंने 16.72 मीटर की अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया।
जॉर्डन स्कॉट और प्रवीण चित्रवेल के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा। जमैका के खिलाड़ी ने प्रवीण को केवल 14 सेंटीमीटर के अंतर से पीछे छोड़ा।
पूरे मुकाबले में खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली और अंतिम दौर तक मेडल की स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि
कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर ट्रिपल जंप में दो भारतीय खिलाड़ियों का मेडल जीतना देश के एथलेटिक्स कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में लगातार सुधार कर रहा है। लंबी कूद, भाला फेंक, दौड़ और अन्य एथलेटिक्स इवेंट्स में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।
प्रवीण और सेल्वा की सफलता इस बात का संकेत है कि भारत में फील्ड इवेंट्स में प्रतिभाओं की कमी नहीं है और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
दो भारतीय झंडों से यादगार बना मेडल समारोह
मेडल सेरेमनी के दौरान सिल्वर और ब्रॉन्ज़ दोनों पदकों पर भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी ने एक यादगार दृश्य बनाया। जब प्रवीण और सेल्वा के सम्मान में भारतीय तिरंगा लहराया गया, तो यह पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बन गया।
दोनों खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से न केवल पदक जीते, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का संदेश भी दिया।
भविष्य के लिए नई उम्मीद
प्रवीण चित्रवेल का अनुभव और सेल्वा प्रभु थिरुमारन की युवा ऊर्जा भारतीय ट्रिपल जंप के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। दोनों खिलाड़ियों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों को प्रेरित करेगी।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का यह प्रदर्शन बताता है कि देश अब एथलेटिक्स में भी मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है। ट्रिपल जंप में मिले ये दो पदक भारतीय खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हैं।





