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शतरंज में भारत की बड़ी उपलब्धि दोनों वर्गों में जीता स्वर्ण पदक
मुंबई: भारतीय शतरंज के युवा सितारों मयंक चक्रवर्ती और प्रतीति बोरदोलोई ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियन जूनियर शतरंज चैंपियनशिप 2026 में अपने-अपने वर्गों का खिताब जीत लिया है। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि के साथ भारत ने टूर्नामेंट में 'गोल्डन डबल' पूरा किया।
असम के रहने वाले ग्रैंडमास्टर मयंक चक्रवर्ती ने ओपन कैटेगरी में खिताब अपने नाम किया, जबकि प्रतीति बोरदोलोई ने गर्ल्स कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। दोनों खिलाड़ी टूर्नामेंट के शीर्ष वरीय खिलाड़ियों में शामिल थे और शुरुआत से ही खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।
मयंक ने दिखाया दमदार खेल
ओपन वर्ग में मयंक चक्रवर्ती ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार नियंत्रण बनाए रखा। निर्णायक दौर से पहले भी वह शीर्ष स्थान पर बने हुए थे और आठ राउंड के बाद 7 अंकों के साथ बढ़त बनाए हुए थे।
फाइनल मुकाबलों में बेहतरीन रणनीति और धैर्य के साथ खेलते हुए मयंक ने खिताब पर कब्जा जमाया। वह असम और पूर्वोत्तर भारत से आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा बनकर उभरे हैं।
प्रतीति बोरदोलोई का शानदार प्रदर्शन
गर्ल्स वर्ग में प्रतीति बोरदोलोई ने भी पूरे टूर्नामेंट में अपना दबदबा कायम रखा। वह शुरुआती दौर से ही अंक तालिका में शीर्ष पर रहीं और निर्णायक मुकाबलों में शानदार खेल दिखाकर खिताब जीतने में सफल रहीं।
प्रतीति की जीत ने भारतीय महिला जूनियर शतरंज की मजबूत स्थिति को भी दर्शाया है।
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
एशियन जूनियर शतरंज चैंपियनशिप में दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतना भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों के लगातार बेहतर प्रदर्शन से देश में शतरंज की नई प्रतिभाओं को बढ़ावा मिल रहा है।
असम के खिलाड़ियों ने बढ़ाया मान
मयंक और प्रतीति दोनों असम से आते हैं और उनकी सफलता ने राज्य के खेल जगत में उत्साह बढ़ा दिया है। मयंक पहले ही असम से भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल कर चुके हैं।
उनकी यह उपलब्धि दिखाती है कि छोटे शहरों और राज्यों से आने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।
भविष्य के लिए उम्मीद
मयंक चक्रवर्ती और प्रतीति बोरदोलोई की यह जीत भारतीय शतरंज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत मानी जा रही है। दोनों खिलाड़ियों से आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर और बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
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