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धीमी ओवर रेट पर भारत वेस्टइंडीज पर ICC का एक्शन

Ratna Netam
5 Oct 2026 4:56 PM IST
धीमी ओवर रेट पर भारत वेस्टइंडीज पर ICC का एक्शन
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नई चंडीगढ़। भारत और वेस्टइंडीज के बीच शनिवार को न्यू चंडीगढ़ में खेले गए तीन मैचों की वनडे सीरीज के तीसरे और अंतिम मुकाबले के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने दोनों टीमों पर धीमी ओवर-रेट बनाए रखने के कारण जुर्माना लगाया है। समय की निर्धारित सीमा के भीतर अपने ओवर पूरे नहीं करने पर भारत पर मैच फीस का 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है।ICC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मैच के दौरान समय की अनुमत छूट (Time Allowances) को ध्यान में रखने के बाद भी भारतीय टीम निर्धारित समय से चार ओवर पीछे रही, जबकि वेस्टइंडीज की टीम दो ओवर पीछे पाई गई। इसी आधार पर ICC ने दोनों टीमों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आर्थिक दंड लगाया।
भारत पर लगाया गया जुर्माना मैच फीस का 20 प्रतिशत है, जबकि वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को अपनी मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माने के रूप में देना होगा। यह कार्रवाई ICC की आचार संहिता के उस प्रावधान के तहत की गई है, जिसके अनुसार निर्धारित समय से प्रत्येक ओवर पीछे रहने पर खिलाड़ियों की मैच फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है। इसी नियम के अनुसार भारत चार ओवर पीछे रहने के कारण 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज दो ओवर पीछे रहने के कारण 10 प्रतिशत जुर्माने का पात्र बना।
इस मामले में सजा का फैसला एमिरेट्स ICC इंटरनेशनल पैनल ऑफ मैच रेफरीज़ के सदस्य प्रकाश भट्ट ने सुनाया। मैच रेफरी ने दोनों टीमों की ओवर-रेट रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद यह कार्रवाई की। ICC के नियमों के तहत मैच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ओवर-रेट का आकलन किया जाता है और यदि कोई टीम निर्धारित समय में अपने ओवर पूरे नहीं कर पाती है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है।ICC ने बताया कि दोनों टीमों के कप्तानों ने अपनी-अपनी टीम की गलती स्वीकार कर ली और प्रस्तावित सजा को मान लिया। कप्तानों की ओर से आरोप स्वीकार किए जाने के कारण इस मामले में किसी औपचारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी। ICC के नियमों के अनुसार यदि खिलाड़ी या कप्तान आरोप स्वीकार कर लेते हैं और दंड को चुनौती नहीं देते हैं तो सुनवाई की प्रक्रिया टाल दी जाती है।
क्रिकेट में धीमी ओवर-रेट लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि मैच निर्धारित समय के भीतर पूरे हों। इसके लिए समय-समय पर नियमों को और सख्त किया गया है ताकि खेल की गति बनी रहे और दर्शकों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।ओवर-रेट का मतलब यह होता है कि कोई टीम निर्धारित समय के भीतर अपने सभी ओवर पूरे करती है या नहीं। मैच के दौरान कुछ परिस्थितियों, जैसे चोट, डीआरएस समीक्षा, मौसम या अन्य वैध कारणों से समय में छूट दी जाती है। इन सभी अनुमत समयों को घटाने के बाद यदि कोई टीम फिर भी पीछे रहती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली गई वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबला कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। हालांकि मैच समाप्त होने के बाद दोनों टीमों को धीमी ओवर-रेट के कारण आर्थिक दंड का सामना करना पड़ा। यह कार्रवाई मैच के परिणाम से अलग ICC के निर्धारित नियमों के तहत की गई है।ICC पिछले कुछ वर्षों में खेल की गति बनाए रखने के लिए लगातार ओवर-रेट नियमों को लागू कर रही है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कई बार टीमों और कप्तानों पर इसी तरह के जुर्माने लगाए जा चुके हैं। कुछ प्रारूपों में बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त दंड या अंक कटौती जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाती हैं, हालांकि इस मामले में केवल आर्थिक जुर्माना लगाया गया है।भारतीय टीम चार ओवर पीछे रहने के कारण अधिक जुर्माने की पात्र बनी, जबकि वेस्टइंडीज केवल दो ओवर पीछे रही। दोनों टीमों ने ICC के फैसले को स्वीकार कर लिया है और किसी तरह की अपील नहीं की है।
मैच रेफरी प्रकाश भट्ट की ओर से दिए गए फैसले के बाद यह मामला औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। दोनों कप्तानों के आरोप स्वीकार करने से यह स्पष्ट हो गया कि मामले को लेकर किसी अतिरिक्त अनुशासनात्मक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है।ICC का मानना है कि ओवर-रेट के नियमों का सख्ती से पालन कराने से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में समय प्रबंधन बेहतर होगा और खेल की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। इसी उद्देश्य से समय-समय पर मैच अधिकारियों द्वारा ओवर-रेट की निगरानी की जाती है।फिलहाल न्यू चंडीगढ़ में खेले गए तीसरे वनडे के बाद भारत और वेस्टइंडीज दोनों को धीमी ओवर-रेट का खामियाजा आर्थिक दंड के रूप में भुगतना पड़ा है। भारत पर मैच फीस का 20 प्रतिशत और वेस्टइंडीज पर 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है। दोनों टीमों के कप्तानों ने गलती स्वीकार कर ली है, जिससे इस मामले में आगे किसी सुनवाई की आवश्यकता नहीं रही।
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