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एच. आर. गोपालकृष्ण की आत्मकथा रिकॉर्ड्स गैलोर लॉन्च

Kavita2
8 Aug 2026 12:01 PM IST
एच. आर. गोपालकृष्ण की आत्मकथा रिकॉर्ड्स गैलोर लॉन्च
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बेंगलुरु। भारतीय क्रिकेट के आंकड़ों और रिकॉर्ड्स की दुनिया में पांच दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहे एच. आर. गोपालकृष्ण की आत्मकथा ‘रिकॉर्ड्स गैलोर: ए मेमॉयर’ का शुक्रवार को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में विमोचन किया गया। इस मौके पर क्रिकेट जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ और महान बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ समेत कई दिग्गज क्रिकेटरों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

यह किताब गोपालकृष्ण के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़े 52 वर्षों के सफर को सामने लाती है। उन्होंने लंबे समय तक स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन के रूप में काम करते हुए क्रिकेट के मैदान पर होने वाली घटनाओं को आंकड़ों और रिकॉर्ड्स में दर्ज किया। इस दौरान उन्होंने 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में स्कोरिंग और सांख्यिकी संबंधी जिम्मेदारियां निभाईं।

आंकड़ों के पीछे की दुनिया को करीब से दिखाती है किताब

क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन, टीम के रिकॉर्ड और मैच के आंकड़े प्रशंसकों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं। लेकिन इन आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने और संरक्षित करने के पीछे स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

गोपालकृष्ण का करियर इसी दुनिया से जुड़ा रहा। ‘रिकॉर्ड्स गैलोर: ए मेमॉयर’ में उन्होंने अपने लंबे करियर के दौरान देखे और अनुभव किए गए क्रिकेट के विभिन्न पहलुओं को दर्ज किया है।

किताब के माध्यम से पाठकों को यह समझने का अवसर मिलता है कि किस तरह एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में हर गेंद, रन, विकेट, साझेदारी और खिलाड़ी के प्रदर्शन को रिकॉर्ड किया जाता है और बाद में इन्हीं आंकड़ों से क्रिकेट के इतिहास के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड तैयार होते हैं।

52 वर्षों के सफर का दस्तावेज

गोपालकृष्ण का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़ा सफर करीब 52 वर्षों तक चला। इस दौरान क्रिकेट में कई बड़े बदलाव हुए। टेस्ट क्रिकेट के दौर से लेकर वनडे और आगे क्रिकेट के बदलते प्रारूपों तक आंकड़ों के महत्व में लगातार वृद्धि हुई।

इस लंबे सफर में गोपालकृष्ण ने क्रिकेट के मैदान के अलावा आंकड़ों की दुनिया में भी बदलावों को करीब से देखा। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने स्कोरिंग और सांख्यिकी के तरीके को काफी बदला, लेकिन रिकॉर्ड दर्ज करने की बुनियादी जिम्मेदारी का महत्व बना रहा।

उनकी आत्मकथा इस बदलाव को व्यक्तिगत अनुभवों के साथ सामने लाने का प्रयास करती है।

100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैचों में निभाई भूमिका

गोपालकृष्ण ने 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन के रूप में काम किया। इस दौरान उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कई बड़े खिलाड़ियों और ऐतिहासिक मुकाबलों को करीब से देखने का मौका मिला।

एक स्कोरर के लिए मैच के दौरान बेहद सतर्क रहना जरूरी होता है। हर गेंद और हर रन का सही रिकॉर्ड रखना होता है। एक छोटी सी गलती भी मैच के आधिकारिक आंकड़ों को प्रभावित कर सकती है।

गोपालकृष्ण का लंबा अनुभव इस क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने क्रिकेट के आंकड़ों को सिर्फ संख्याओं के रूप में नहीं देखा, बल्कि उन्हें खेल के इतिहास को समझने का माध्यम बनाया।

चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुआ विमोचन

आत्मकथा का विमोचन बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में किया गया। यह वही मैदान है जो भारतीय और कर्नाटक क्रिकेट के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

इस अवसर पर क्रिकेट से जुड़े कई पूर्व और वर्तमान दिग्गजों तथा खेल जगत से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में गोपालकृष्ण के लंबे योगदान को याद किया गया और उनके क्रिकेट सफर की सराहना की गई।

जवागल श्रीनाथ और गुंडप्पा विश्वनाथ की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। दोनों ही भारतीय क्रिकेट के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और कर्नाटक क्रिकेट से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा है।

श्रीनाथ और विश्वनाथ की मौजूदगी ने बढ़ाई शोभा

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट के प्रमुख गेंदबाजों में रहे हैं। वहीं गुंडप्पा विश्वनाथ भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। दोनों की मौजूदगी ने गोपालकृष्ण की आत्मकथा के विमोचन को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम में क्रिकेट के उस दौर को भी याद किया गया जब स्कोरिंग और आंकड़ों का काम आज की तरह डिजिटल नहीं था। उस समय स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन को रिकॉर्ड तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थी।

क्रिकेट इतिहास को सहेजने में अहम भूमिका

किसी भी खेल के इतिहास को समझने में आंकड़ों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। क्रिकेट में रिकॉर्ड्स सिर्फ खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन का हिसाब नहीं रखते, बल्कि वे टीमों, टूर्नामेंट और पूरे खेल के विकास की कहानी भी बताते हैं।

गोपालकृष्ण जैसे स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन ने इन रिकॉर्ड्स को तैयार करने और संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुभवों पर आधारित आत्मकथा क्रिकेट प्रशंसकों के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें मैदान के बाहर से क्रिकेट को देखने का नजरिया मिलता है।

नई पीढ़ी के लिए भी उपयोगी

‘रिकॉर्ड्स गैलोर: ए मेमॉयर’ सिर्फ गोपालकृष्ण की व्यक्तिगत यात्रा नहीं है, बल्कि यह क्रिकेट के आंकड़ों और स्कोरिंग की दुनिया को समझने में भी मदद कर सकती है। क्रिकेट में रुचि रखने वाले युवा, स्कोरिंग और सांख्यिकी से जुड़े लोग तथा खेल इतिहास के पाठक इस किताब से लंबे अनुभवों को जान सकते हैं।

आज के दौर में जब क्रिकेट के आंकड़े कुछ ही सेकंड में डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध हो जाते हैं, ऐसे समय में पुराने दौर के स्कोरिंग अनुभवों को जानना और भी दिलचस्प हो जाता है।

क्रिकेट से जुड़े अनुभवों की विरासत

एच. आर. गोपालकृष्ण की आत्मकथा उनके 52 साल के सफर को एक पुस्तक के रूप में सुरक्षित करती है। यह सफर सिर्फ एक व्यक्ति के पेशेवर जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए बदलावों का भी एक दस्तावेज है।

100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में स्कोरर और स्टैटिस्टिशियन के रूप में काम करने वाले गोपालकृष्ण ने क्रिकेट के उन पहलुओं को करीब से देखा जिन्हें आम दर्शक अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उनकी किताब इन अनदेखे पहलुओं को सामने लाने का प्रयास करती है।

बेंगलुरु के ऐतिहासिक चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुए विमोचन के साथ ‘रिकॉर्ड्स गैलोर: ए मेमॉयर’ अब क्रिकेट प्रेमियों के लिए गोपालकृष्ण के लंबे और समृद्ध सफर को जानने का एक माध्यम बन गई है।

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