
नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करने वाली जूडोका अस्मिता डे का देश लौटने पर शानदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर परिवार, दोस्तों, समर्थकों और खेल प्रेमियों की बड़ी संख्या ने पहुंचकर कॉमनवेल्थ चैंपियन का अभिनंदन किया और उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया।
अस्मिता डे के स्वागत के दौरान एयरपोर्ट का माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया। जैसे ही वह बाहर आईं, समर्थकों ने जोरदार नारों और तालियों के साथ उनका स्वागत किया। लोगों ने भारतीय जूडोका की इस बड़ी उपलब्धि पर गर्व जताते हुए उन्हें बधाई दी।
स्वागत समारोह के दौरान भावुक कर देने वाले कई पल देखने को मिले। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अस्मिता डे को समर्थकों और परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ देखा गया। इस दौरान उन्हें पारंपरिक तरीके से नोटों की बड़ी माला पहनाई गई, जो भारत में कई बार बड़ी उपलब्धियों और सम्मान के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल की जाती है।
#WATCH | Delhi | Indian Judoka Asmita Dey receives a grand welcome at the IGI airport after winning Gold Medal in the Judo Women's 48kg category at 2026 Commonwealth Games in Glasgow. pic.twitter.com/mufUgi1nvW
— ANI (@ANI) August 3, 2026
समर्थकों ने अस्मिता को कंधों पर उठाकर खुशी जाहिर की और उन्हें गर्व के साथ एयरपोर्ट से बाहर लेकर गए। चारों तरफ भारत माता की जय और अस्मिता डे के समर्थन में नारे गूंजते रहे। इस स्वागत ने दिखाया कि खेल उपलब्धियां केवल खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन जाती हैं।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम जूडो वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। कठिन मुकाबलों के बीच उन्होंने अपनी तकनीक, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन किया और फाइनल में बेहतरीन खेल दिखाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
अस्मिता की यह सफलता भारतीय जूडो के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कॉमनवेल्थ जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के करियर में खास स्थान रखता है। उनकी इस उपलब्धि से देश के युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता डे ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, परिवार के समर्थन और कोचों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना और तिरंगे के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व का क्षण है।
अस्मिता के परिवार के लिए भी यह पल बेहद भावुक और यादगार रहा। लंबे समय की मेहनत और संघर्ष के बाद बेटी को चैंपियन बनकर लौटते देख परिवार के सदस्यों की खुशी साफ नजर आई। एयरपोर्ट पर मौजूद परिजनों ने कहा कि अस्मिता ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
भारतीय खेल जगत में पिछले कुछ वर्षों में जूडो जैसे खेलों में खिलाड़ियों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ी लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। अस्मिता डे की सफलता इसी बढ़ती मजबूती का उदाहरण है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन देश में जूडो को और लोकप्रिय बनाने में मदद करेंगे। युवा खिलाड़ियों को यह संदेश मिलेगा कि मेहनत, अनुशासन और सही प्रशिक्षण के जरिए वे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल कर सकते हैं।
अस्मिता डे का एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत केवल एक खिलाड़ी का सम्मान नहीं था, बल्कि उस मेहनत और समर्पण का उत्सव था जिसने उन्हें कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया। समर्थकों का उत्साह और परिवार का गर्व इस बात का प्रमाण था कि उनकी जीत ने लोगों के दिलों में खास जगह बना ली है।
भारत लौटने के बाद अस्मिता अब अपने अगले लक्ष्यों की तैयारी में जुटेंगी। कॉमनवेल्थ गोल्ड के बाद उनके आत्मविश्वास में और बढ़ोतरी हुई है और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि वह आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भी देश के लिए कई और उपलब्धियां हासिल करेंगी।
अस्मिता डे की यह सफलता भारतीय खेल इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। ग्लासगो से गोल्ड मेडल लेकर लौटी इस जूडोका का भव्य स्वागत देशभर में उनकी उपलब्धि के प्रति सम्मान और गर्व को दर्शाता है।





