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अंपायर के फैसले पर भड़के गावस्कर, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की टिप्पणी से बढ़ा विवाद

nidhi
19 Oct 2026 7:03 AM IST
अंपायर के फैसले पर भड़के गावस्कर, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
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70 रन पर आउट दिए गए गावस्कर ने उठाया था बड़ा कदम
नई दिल्ली: भारत और ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता में कई ऐसे मुकाबले हुए हैं, जो खेल के साथ विवादों के कारण भी याद किए जाते हैं। फरवरी 1981 का मेलबर्न टेस्ट ऐसा ही मुकाबला था। भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर अंपायर के फैसले से नाराज हुए और फिर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की कथित टिप्पणियों के बाद अपने साथी बल्लेबाज चेतन चौहान को भी मैदान छोड़ने के लिए कह दिया। हालांकि, टीम प्रबंधन के हस्तक्षेप से स्थिति संभल गई। जिस मैच में भारत के खेल जारी रखने पर संकट आ गया था, उसी में भारतीय टीम ने बाद में शानदार जीत हासिल की।
यह घटना 7 से 11 फरवरी 1981 के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए तीसरे टेस्ट की है। भारत अपनी दूसरी पारी में पहली पारी की बड़ी बढ़त उतारने की कोशिश कर रहा था। गावस्कर और चेतन चौहान ने मजबूत शुरुआत देकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा। इसी दौरान डेनिस लिली की गेंद पर गावस्कर के खिलाफ एलबीडब्ल्यू की अपील हुई और अंपायर रेक्स व्हाइटहेड ने उन्हें आउट दे दिया। गावस्कर उस समय 70 रन बना चुके थे।
गावस्कर का मानना था कि गेंद पैड पर लगने से पहले उनके बल्ले से टकराई थी। इस वजह से वह फैसले से सहमत नहीं थे। उन्होंने कुछ देर क्रीज पर खड़े रहकर नाराजगी दिखाई और बल्ले से पैड भी थपथपाया। लिली और गावस्कर के बीच बातचीत हुई। बाद में गावस्कर ने बताया कि वह गेंद के बल्ले से लगने की बात कह रहे थे, जबकि लिली पैड पर लगने की ओर इशारा कर रहे थे। गावस्कर के बाद के स्पष्टीकरण के अनुसार, मैदान छोड़ने की कोशिश की तत्काल वजह केवल एलबीडब्ल्यू का फैसला नहीं था। जनवरी 2021 में उन्होंने बताया कि वह पवेलियन की ओर बढ़ चुके थे, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने उन्हें अपमानजनक ढंग से चले जाने के लिए कहा। इसी टिप्पणी के बाद वह वापस मुड़े और चौहान को अपने साथ मैदान छोड़ने को कहा।
कप्तान का निर्देश मिलने पर चौहान भी उनके साथ चल पड़े। इससे मैदान पर असामान्य स्थिति बन गई। आउट बल्लेबाज का पवेलियन लौटना सामान्य था, लेकिन दूसरे छोर पर मौजूद बल्लेबाज को भी वापस बुलाने से मैच जारी रखने पर सवाल खड़ा हो गया। बाउंड्री के पास टीम मैनेजर शाहिद दुर्रानी और सहायक मैनेजर बापू नाडकर्णी ने हस्तक्षेप किया। चौहान को वापस खेलने के लिए भेजा गया, जबकि गावस्कर पवेलियन लौट गए।
इस हस्तक्षेप ने विवाद को और गंभीर होने से रोक दिया। भारतीय टीम ने मुकाबला जारी रखा। कई वर्षों बाद दिसंबर 2014 में गावस्कर ने अपनी प्रतिक्रिया पर पछतावा जताया। उन्होंने स्वीकार किया कि कप्तान के तौर पर उन्हें इस तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए था। उनका कहना था कि आउट का फैसला सही था या गलत, उनकी प्रतिक्रिया उचित नहीं थी। कपिल देव ने उसी चर्चा में बताया था कि उस समय टीम अपने कप्तान के साथ खड़ी थी। मई 2026 में सामने आई एक बातचीत में गावस्कर ने इस घटनाक्रम से जुड़ा एक और प्रसंग सुनाया। उनके मुताबिक, पिछले दिन सैयद किरमानी ने एक स्टंपिंग अपील के दौरान अपनी ईमानदारी पर सवाल उठने की स्थिति में मैदान छोड़ने की बात कही थी। गावस्कर ने हल्के अंदाज में बताया कि मैदान छोड़ने वाला विचार उनके दिमाग में रह गया था और अगले दिन विवाद होने पर वही प्रतिक्रिया सामने आई।
इस बातचीत में मौजूद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलन बॉर्डर ने भी गावस्कर के खिलाफ दिए गए फैसले को संदिग्ध माना। हालांकि, किसी फैसले का विवादित होना अपने आप में जानबूझकर बेईमानी किए जाने का प्रमाण नहीं है। उपलब्ध बयानों में गावस्कर की नाराजगी, बल्ले से गेंद लगने का उनका दावा और खिलाड़ियों की टिप्पणियों का उल्लेख मिलता है। अंपायर तथा पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम पर बेईमानी का आरोप स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
मैच के क्रिकेट संबंधी आंकड़े भी इसकी कहानी को खास बनाते हैं। भारत पहली पारी में 237 रन पर आउट हुआ था। गुंडप्पा विश्वनाथ ने 114 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया ने जवाब में 419 रन बनाकर 182 रन की बढ़त हासिल की। दूसरी पारी में भारत ने 324 रन बनाए। चेतन चौहान ने 85 और गावस्कर ने 70 रन का योगदान दिया। इस तरह मेजबान टीम के सामने जीत के लिए 143 रन का लक्ष्य रखा गया। छोटे लक्ष्य के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने मुकाबला पलट दिया। कपिल देव ने 28 रन देकर पांच विकेट लिए। करसन घावरी और दिलीप दोशी को दो-दो विकेट मिले। ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 83 रन पर सिमट गई और भारत ने 59 रन से जीत दर्ज की। तीन टेस्ट की सीरीज 1-1 से बराबर रही। विश्वनाथ को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।
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