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एक रिप्ले पॉइंट से मचा बवाल
बीजिंग: चीन ओपन में अमेरिकी टेनिस स्टार कोको गॉफ की जीत के बाद एक विवादित पॉइंट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। गॉफ ने चीन की 16 वर्षीय खिलाड़ी सुन शिनरान को 7-5, 6-1 से हराकर अगले दौर में जगह बनाई, लेकिन मैच के पहले सेट में एक पॉइंट दोबारा खेले जाने के फैसले के बाद उन्हें बड़ी संख्या में नस्लभेदी टिप्पणियों और संदेशों का सामना करना पड़ा।
विवाद उस समय हुआ जब गॉफ पहले सेट में 4-5 से पीछे थीं। एक रैली के दौरान कोर्ट के आसपास लगे विज्ञापन बोर्ड की लाइट में अचानक बदलाव हुआ। गॉफ ने हाथ उठाकर इसे बाधा बताया। उसी दौरान सुन ने गेंद को विनर की तरह खेला, लेकिन वीडियो रिव्यू के बाद अंपायर ने पॉइंट दोबारा खेलने का फैसला किया। गॉफ ने रिप्ले पॉइंट जीता और इसके बाद गेम बचाकर स्कोर 5-5 कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने गॉफ पर गलत तरीके से फायदा उठाने के आरोप लगाए। मामला तब ज्यादा गंभीर हो गया जब उन्हें नस्लभेदी टिप्पणियां और निजी संदेश मिलने लगे। गॉफ ने इसका जवाब देते हुए कहा कि लोग उनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन नस्लभेदी हमला स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने लिखा, “मैं धोखेबाज़ या चोर नहीं हूं।”
गॉफ ने यह भी साफ किया कि उन्होंने नियमों के भीतर रहकर वीडियो रिव्यू की मांग की थी। WTA नियमों के अनुसार अगर किसी बाहरी कारण से खिलाड़ी की रैली प्रभावित होती है तो परिस्थितियों के आधार पर ‘लेट’ या पॉइंट रिप्ले कराया जा सकता है। इस मामले में अंपायर ने वीडियो देखने के बाद यही फैसला दिया।
मैच के बाद गॉफ ने सुन शिनरान से भी बात की और पूरे घटनाक्रम के लिए उनसे माफी मांगी। गॉफ के मुताबिक सुन ने स्थिति को समझा और दोनों के बीच बात सकारात्मक रही। गॉफ ने चीनी खिलाड़ी की प्रतिभा की भी तारीफ की और कहा कि वह अपने करियर की शुरुआत में हैं और आगे बहुत अच्छा कर सकती हैं।
गॉफ ने यह भी कहा कि उन्हें यह देखकर अच्छा नहीं लगा कि इस घटना से सुन भावुक हो गईं। उन्होंने माना कि ऐसी परिस्थितियां किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए मुश्किल हो सकती हैं। इसके बावजूद गॉफ ने जोर दिया कि कोर्ट पर हुआ फैसला उनके नियंत्रण में नहीं था और अंतिम निर्णय अंपायर का था। ऑनलाइन नस्लभेदी दुर्व्यवहार का मामला महिला टेनिस में पहले भी चिंता का विषय रहा है। WTA और World Tennis ने ऑनलाइन दुर्व्यवहार की निगरानी के लिए तकनीकी सिस्टम भी लागू किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार 2025 में महिला खिलाड़ियों और अधिकारियों के खिलाफ 12 हजार से ज्यादा अपमानजनक पोस्ट और संदेश दर्ज किए गए थे।
इस पूरे विवाद के बीच गॉफ की जीत बरकरार रही और उन्होंने टूर्नामेंट के अगले दौर में जगह बनाई। लेकिन मैच से ज्यादा चर्चा उस एक पॉइंट और उसके बाद सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं की रही। गॉफ का साफ संदेश था कि खेल से जुड़े फैसलों पर बहस हो सकती है, लेकिन नस्लीय दुर्व्यवहार की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
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