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क्रिकेट जगत से गुज़र गए मशहूर अंपायर विक्रम राजू, 92 वर्ष की आयु में निधन

Kavita2
8 Jun 2026 10:05 AM IST
क्रिकेट जगत से गुज़र गए मशहूर अंपायर विक्रम राजू, 92 वर्ष की आयु में निधन
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बेंगलुरु : क्रिकेट की दुनिया ने रविवार को एक बड़े नाम को खो दिया। विक्रम राजू, जिन्हें विशेष रूप से सितंबर 1986 में मद्रास (अब चेन्नई) में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए मशहूर टाई टेस्ट में खड़े होने वाले अंपायरों में से एक के रूप में याद किया जाता है, मैसूर में उम्र से संबंधित बीमारी के कारण निधन हो गया। उनका उम्र 92 वर्ष थी।

राजू का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में विशेष स्थान रखता है। वे उस टाई टेस्ट मैच के अंपायर थे, जो टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में केवल दो बार हुआ। इस मैच में भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्कोर अंतिम गेंद तक बराबर रहा। विक्रम राजू ने इस मैच में महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिनमें से सबसे यादगार फैसला तब आया जब उन्होंने भारत के आखिरी खिलाड़ी मनिंदर सिंह को ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद पर LBW आउट करार दिया। इस फैसले ने मैच को टाई में समाप्त होने में निर्णायक भूमिका निभाई। क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए यह घटना आज भी यादगार बनी हुई है।

विक्रम राजू का पेशा सिर्फ अंपायरिंग तक सीमित नहीं था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय पत्रकारिता में बिताया और तीन दशक से ज़्यादा समय तक डेक्कन हेराल्ड और प्रजावाणी के सर्कुलेशन डिपार्टमेंट में काम किया। हालांकि, उनके लिए क्रिकेट हमेशा एक जुनून रहा और अंपायरिंग ने उन्हें खेल की कहानियों का हिस्सा बना दिया।

उनके काम और योगदान को क्रिकेट प्रेमियों ने हमेशा सराहा। उनके निर्णयों की सटीकता और खेल के प्रति उनका समर्पण उन्हें अन्य अंपायरों से अलग बनाता था। उनका मानना था कि अंपायर का काम केवल नियम लागू करना नहीं है, बल्कि खेल की भावना और खिलाड़ियों के बीच निष्पक्षता बनाए रखना भी है।

विशेषज्ञों और क्रिकेट इतिहासकारों का कहना है कि विक्रम राजू जैसे अंपायर खेल के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने न केवल खेल को समझने और न्यायपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता दिखाई, बल्कि अपने व्यवहार और शांति से खिलाड़ियों और दर्शकों का सम्मान भी अर्जित किया।

राजू के निधन पर क्रिकेट संगठनों और खिलाड़ियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। उनकी उपलब्धियों और क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए, कई क्रिकेट क्लबों और पत्रकार संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके अंपायरिंग के किस्से और मैचों में लिए गए फैसले आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

विक्रम राजू का जीवन यह दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी नौकरी और जुनून दोनों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने न केवल पत्रकारिता में अपनी छाप छोड़ी, बल्कि अंपायरिंग में अपने निर्णयों और खेल के प्रति ईमानदारी के लिए भी याद किए जाएंगे।

उनकी मृत्यु से क्रिकेट जगत और पत्रकारिता की दुनिया दोनों को एक अपूरणीय क्षति हुई है। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा और उनके नाम से जुड़े यादगार मैचों का जिक्र हमेशा क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा।

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