
नई दिल्ली : भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले मेजबान टीम ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। इंग्लैंड क्रिकेट टीम टी20 सीरीज में अपनाई गई रणनीति को वनडे मुकाबलों में भी जारी रखने की तैयारी कर रही है। इंग्लैंड का लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजों की शॉर्ट-पिच गेंदों के खिलाफ कमजोरी का फायदा उठाना है।
पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज में भारतीय टीम को इंग्लैंड के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा था। इंग्लैंड ने भारत को 0-4 से क्लीन स्वीप किया था। अब दोनों टीमें तीन मैचों की वनडे सीरीज में आमने-सामने होंगी, जहां भारतीय बल्लेबाजों के सामने एक बार फिर तेज गेंदबाजों की चुनौती होगी।
टी20 सीरीज के दौरान इंग्लैंड के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ शॉर्ट गेंदों का जमकर इस्तेमाल किया था। कई मौकों पर भारतीय बल्लेबाज इस रणनीति के सामने संघर्ष करते नजर आए। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने इसका फायदा उठाते हुए अहम विकेट हासिल किए और मैचों पर अपनी पकड़ मजबूत की।
पहले वनडे से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंग्लैंड के बल्लेबाज बेन डकेट ने कहा कि उनकी टीम भारतीय बल्लेबाजों को शॉर्ट गेंदों से चुनौती देने की योजना बना रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारतीय बल्लेबाज इस रणनीति के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो इंग्लैंड अपनी योजना में बदलाव कर सकता है।
डकेट ने कहा कि इंग्लैंड भारतीय बल्लेबाजों की क्षमता को परखेगा। अगर शॉर्ट गेंदों से उन्हें परेशानी होती है तो टीम इस रणनीति का इस्तेमाल जारी रखेगी। लेकिन अगर भारतीय बल्लेबाज इस चुनौती को अच्छी तरह संभाल लेते हैं तो इंग्लैंड दूसरी योजनाओं पर भी विचार करेगा।
उन्होंने कहा, “हम उन्हें टेस्ट करेंगे। अगर वे शॉर्ट गेंदों के खिलाफ अच्छे साबित होते हैं तो शायद हम इस रणनीति का उतना इस्तेमाल नहीं करेंगे। लेकिन अगर हमें लगेगा कि यह काम कर रही है तो हम इसे जारी रख सकते हैं।”
टी20 सीरीज के आंकड़े भी इंग्लैंड की रणनीति को मजबूत करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पांचवें टी20 मुकाबले से पहले भारतीय बल्लेबाजों ने 118 शॉर्ट-पिच गेंदों का सामना करते हुए 171 रन बनाए थे और इस दौरान 11 विकेट गंवाए थे। इससे साफ है कि भारतीय बल्लेबाजों को तेज और उछाल वाली गेंदों के खिलाफ परेशानी हुई।
युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से लेकर अनुभवी खिलाड़ियों तक कई भारतीय बल्लेबाज शॉर्ट गेंदों के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए। इंग्लैंड अब वनडे सीरीज में भी इसी कमजोरी को निशाना बनाने की कोशिश करेगा।
हालांकि, वनडे क्रिकेट का प्रारूप टी20 से अलग होता है और इसमें बल्लेबाजों के पास परिस्थितियों को समझने और अपनी रणनीति बदलने का ज्यादा समय होता है। भारतीय टीम के पास अनुभवी बल्लेबाज मौजूद हैं, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं और ऐसी परिस्थितियों से निपटने का अनुभव रखते हैं।
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की आक्रामक रणनीति का सामना करना होगी। इंग्लैंड के गेंदबाज नई गेंद के साथ-साथ बीच के ओवरों में भी शॉर्ट गेंदों का इस्तेमाल कर भारतीय बल्लेबाजों को दबाव में डालने की कोशिश करेंगे।
दूसरी ओर, भारतीय बल्लेबाज भी इस बार बेहतर तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहेंगे। टीम मैनेजमेंट शॉर्ट गेंदों के खिलाफ बल्लेबाजों की तकनीक और मानसिक तैयारी पर काम कर रहा है।
वनडे सीरीज दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंग्लैंड टी20 सीरीज की सफलता को वनडे में भी दोहराना चाहेगा, जबकि भारतीय टीम पिछली हार को पीछे छोड़कर वापसी करने के इरादे से उतरेगी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इंग्लैंड की शॉर्ट गेंदों वाली रणनीति वनडे में भी उतनी ही प्रभावी साबित होती है या भारतीय बल्लेबाज इस चुनौती का जवाब देने में सफल रहते हैं।





