
दुबई। दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक यात्री उड़ान में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब विमान से ऐसे इमरजेंसी सिग्नल भेजे गए जिनमें एक को संभावित गैरकानूनी हस्तक्षेप या हाईजैकिंग से जोड़ा जाता है। शुरुआती सूचना के बाद इजरायल में सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं, लेकिन बाद में सामने आया कि विमान को कथित रूप से पायलटों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद सऊदी अरब की ओर मोड़ा गया था। विमान ने सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की।
A passenger on the Dubai–Tel Aviv flight recounts:
— Pepel Klaasa (@pepel_klaasa) September 30, 2026
“We are currently in Saudi Arabia.
One of the crew members attacked the pilot with a knife and disabled the aircraft’s systems. Yaniv (pictured?) and another passenger stormed the cockpit and subdued the attacker.
Luckily,… pic.twitter.com/hmg7QvvTuM
घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 से जुड़ी है। यह विमान 30 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक विमान बोइंग 737 MAX 8 था और उसकी रजिस्ट्रेशन संख्या A6-FKF दर्ज की गई। उड़ान के दौरान विमान ने पहले सामान्य आपात स्थिति वाला 7700 कोड और फिर 7500 कोड प्रसारित किया, जो विमान में संभावित गैरकानूनी हस्तक्षेप या हाईजैकिंग की स्थिति से जुड़ा होता है।
7500 कोड सामने आते ही स्थिति गंभीर मानी गई। इजरायल की ओर से तत्काल सुरक्षा प्रतिक्रिया शुरू की गई और लड़ाकू विमानों को भी सक्रिय किया गया। उस समय यह आशंका बनी कि विमान हाईजैक हो सकता है या उसके कॉकपिट में किसी तरह का गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो गया है। बाद में इजरायली अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मामला हाईजैकिंग का नहीं, बल्कि पायलटों के बीच हुई शारीरिक झड़प से जुड़ा था।
विमान ने अपने निर्धारित तेल अवीव मार्ग से हटकर सऊदी अरब की ओर रुख किया। फ्लाइट ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार विमान अंततः उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर उतरा। आपात स्थिति के दौरान विमान की ऊंचाई में भी अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्टों के मुताबिक विमान करीब 14 हजार फीट नीचे आया, जिससे उड़ान पर नजर रख रहे लोगों की चिंता और बढ़ गई।
पूरे घटनाक्रम को लेकर शुरुआत में कई तरह की सूचनाएं सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि पायलट और सह-पायलट के बीच तीखी बहस के बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। वहीं अन्य शुरुआती दावों में कॉकपिट के भीतर और भी गंभीर परिस्थितियों की बात कही गई। हालांकि फ्लाईदुबई की ओर से इन सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं की गई। इसलिए घटना के सटीक कारणों को लेकर आधिकारिक जांच अहम मानी जा रही है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विमान सुरक्षित उतर गया और यात्रियों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में यात्रियों की संख्या अलग-अलग बताई गई, लेकिन लगभग 150 यात्रियों के विमान में मौजूद होने की जानकारी सामने आई।
घटना के बाद यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकालने और आगे की यात्रा की व्यवस्था करने की प्रक्रिया शुरू की गई। सऊदी अधिकारियों और संबंधित विमानन एजेंसियों ने भी घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू की।
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया क्योंकि विमान इजरायल की ओर जा रहा था और उसे अचानक सऊदी अरब में उतरना पड़ा। इजरायल और सऊदी अरब के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव उड़ानें संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल के बीच नियमित हवाई संपर्क का हिस्सा हैं। 2020 में दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने के बाद इस मार्ग पर वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू हुआ था।
🚨 HIJACK SCARE!🤯
— Rajat Jain (@RajatJain) September 30, 2026
A @flydubai flight from Dubai to Tel Aviv, carrying about 100 Israelis, set off a major security response today.
Here's what we know so far.
🛑What happened:
• The Boeing 737 MAX 8 first squawked 7700 (general emergency), It then transmitted 7500, the code… pic.twitter.com/kpfRNL3G3Q
FZ1073 की घटना के दौरान 7700 और 7500 दोनों कोड भेजे जाने से भ्रम और चिंता बढ़ गई। 7700 विमान में किसी सामान्य आपात स्थिति का संकेत देता है, जबकि 7500 कोड का इस्तेमाल आम तौर पर गैरकानूनी हस्तक्षेप से जुड़ी स्थिति बताने के लिए किया जाता है। यही वजह रही कि शुरुआती कुछ मिनटों में इसे संभावित हाईजैकिंग के रूप में देखा गया।
बाद में जब विमान सुरक्षित उतर गया और अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी साझा की तो हाईजैकिंग की आशंका कम हुई। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि कॉकपिट में ऐसा क्या हुआ जिसके कारण एक अंतरराष्ट्रीय यात्री विमान को इतने गंभीर आपातकालीन संकेत भेजने पड़े।
यदि पायलटों के बीच शारीरिक संघर्ष की पुष्टि होती है तो यह विमानन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला होगा। कॉकपिट में पायलटों के बीच समन्वय किसी भी उड़ान की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उड़ान के दौरान हिंसक विवाद विमान और उसमें सवार सभी यात्रियों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि विवाद किस कारण शुरू हुआ, इमरजेंसी कोड किसने सक्रिय किया और विमान को सऊदी अरब की ओर मोड़ने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
फ्लाइट डेटा, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनसे यह साफ हो सकेगा कि कॉकपिट में घटनाक्रम किस क्रम में हुआ और विमान की अचानक ऊंचाई में गिरावट क्यों आई।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार घटना को हाईजैकिंग नहीं माना जा रहा है और सभी यात्री सुरक्षित हैं। हालांकि पायलटों के बीच कथित हिंसक विवाद की आधिकारिक स्तर पर पूरी पुष्टि और उसके कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
FZ1073 की इस घटना ने एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ान को कुछ ही मिनटों में बड़े सुरक्षा संकट में बदल दिया। हाईजैकिंग के संकेत से शुरू हुई स्थिति का अंत सऊदी अरब में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग के साथ हुआ, लेकिन अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि कॉकपिट में वास्तव में क्या हुआ और ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे।





