खेल

गांगुली ने सच में ड्रिंक्स ले जाने से किया था इनकार? अजहरुद्दीन ने बताया था आरोपों का सच

nidhi
29 Oct 2026 9:59 AM IST
गांगुली ने सच में ड्रिंक्स ले जाने से किया था इनकार? अजहरुद्दीन ने बताया था आरोपों का सच
x
भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली अपने आत्मविश्वास और आक्रामक नेतृत्व के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत में उनकी छवि को लेकर ऐसी खबरें सामने आई थीं, जो लंबे समय तक उनके साथ जुड़ी रहीं। दावा किया गया कि टीम से बाहर बैठने के दौरान उन्होंने साथी खिलाड़ियों के लिए मैदान पर ड्रिंक्स ले जाने से इनकार कर दिया था। हालांकि गांगुली और उस समय भारतीय कप्तान रहे मोहम्मद अजहरुद्दीन, दोनों ने इस आरोप को खारिज किया था। इसलिए इस प्रसंग को दोनों खिलाड़ियों के बीच साबित हो चुके बड़े टकराव की तरह पेश करना सही नहीं होगा। उपलब्ध पुराने साक्षात्कारों और बयानों से तस्वीर अलग सामने आती है। जिस कप्तान के साथ विवाद की कहानी जोड़ी गई, उसी अजहरुद्दीन ने बाद में गांगुली के व्यवहार और प्रतिभा का समर्थन किया।
1992 के ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ी कहानी
यह मामला भारत के 1991-92 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के आसपास का है। गांगुली उस समय युवा बल्लेबाज के रूप में भारतीय टीम में शामिल हुए थे। उन्होंने 1992 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला वनडे खेला, जिसमें 13 गेंदों पर तीन रन बनाए। इसके बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगला अवसर मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इसी दौर को लेकर खबरें फैलीं कि अंतिम एकादश से बाहर रहने पर गांगुली ने बारहवें खिलाड़ी की भूमिका निभाने में रुचि नहीं दिखाई। ड्रिंक्स पहुंचाने से इनकार करने के दावे को उनके कथित अहंकार से जोड़ा गया। बाद में अलग-अलग लेखों में यह कहानी बार-बार दोहराई गई, जिससे आरोप और स्थापित तथ्य के बीच का अंतर धुंधला होता चला गया।
गांगुली ने अपने साक्षात्कार में क्या कहा था?
मार्च 2000 में रेडिफ को दिए साक्षात्कार में गांगुली से सीधे पूछा गया था कि क्या उन्होंने शुरुआती करियर में ड्रिंक्स ले जाने से इनकार किया था। जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता यह कहानी कहां से आई। उन्होंने उस दौरे के टीम प्रबंधन के साथ अपने अनुभव पर नाराजगी भी जताई थी। गांगुली ने तत्कालीन मैनेजर रणबीर सिंह के व्यवहार पर सवाल उठाए और अपनी ओर से पक्षपात की आशंका व्यक्त की। यह उनका व्यक्तिगत आरोप और अनुभव था; इसे स्वतंत्र रूप से साबित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। उनके जवाब का मुख्य बिंदु यही था कि उन्होंने ड्रिंक्स से संबंधित प्रचलित कहानी को स्वीकार नहीं किया।
उस साक्षात्कार में गांगुली ने लंबे विदेशी दौरों पर युवा खिलाड़ियों की देखभाल करने वाले प्रबंधन की भूमिका पर भी जोर दिया था। उनके अनुसार, ऐसे दौरों में मजबूत व्यक्तित्व और समझ रखने वाले लोगों की जरूरत होती है। rediff.com
अजहरुद्दीन ने भी किया था गांगुली का बचाव
जून 2020 में प्रकाशित रिपब्लिक वर्ल्ड की रिपोर्ट में अजहरुद्दीन के स्पोर्ट्सकीड़ा को दिए साक्षात्कार का उल्लेख है। इसमें अजहर ने गांगुली की कथित अनुशासनहीनता संबंधी खबरों को मनगढ़ंत बताया था। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय टीम में गांगुली के साथ ऐसा कोई अनुशासन संबंधी मामला नहीं था।
अजहरुद्दीन ने गांगुली को लोगों का सम्मान करने वाला व्यक्ति और प्रतिभाशाली क्रिकेटर बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अवसर मिलने पर गांगुली ने अपनी क्षमता साबित की और सफल सलामी बल्लेबाज बने। यह बयान उस धारणा के विपरीत था कि कप्तान और युवा खिलाड़ी के बीच ड्रिंक्स ले जाने को लेकर गंभीर झगड़ा हुआ था। इन बयानों के रहते यह निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा कि टीम से गांगुली का बाहर होना केवल इसी आरोप का परिणाम था। चयन के किसी निर्णय की वजह तय करने के लिए संबंधित समय के आधिकारिक रिकॉर्ड या स्पष्ट पुष्टि की जरूरत होती है।
1996 में मिला करियर बदलने वाला मौका
शुरुआती निराशा के बाद गांगुली ने 1996 के इंग्लैंड दौरे में अपनी पहचान बनाई। लॉर्ड्स में उन्होंने टेस्ट पदार्पण किया और पहली पारी में 131 रन बनाए। इसके बाद नॉटिंघम में अगले टेस्ट में 136 रन की पारी खेली। लगातार दो शतकों ने उनकी बल्लेबाजी को चर्चा के केंद्र में ला दिया। उनके लिए यह वापसी केवल रन बनाने का अवसर नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबा करियर बनाने की दावेदारी भी इसी प्रदर्शन से मजबूत हुई। हालांकि इन पारियों को किसी विशेष आरोप की औपचारिक जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता, लेकिन क्रिकेट की दृष्टि से उन्होंने अपनी क्षमता का स्पष्ट प्रमाण दिया।
आरोप और वास्तविक विवाद में फर्क जरूरी
गांगुली के करियर में कई चर्चित घटनाएं हुईं, लेकिन प्रत्येक प्रसंग का अपना संदर्भ है। शुरुआती ऑस्ट्रेलिया दौरे की ड्रिंक्स वाली कहानी को बाद के दूसरे विवादों के साथ जोड़कर उनके व्यवहार का निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य संबंधित दोनों खिलाड़ियों का खंडन है। पुराने खेल प्रसंगों को दोहराते समय यह स्पष्ट रहना चाहिए कि कौन-सी बात आरोप थी, किसने उसका जवाब दिया और क्या वास्तव में पुष्ट हुआ। गांगुली के इस प्रसंग में कहानी ‘घमंडी खिलाड़ी और नाराज कप्तान’ की जितनी सरल सुनाई जाती है, उपलब्ध बयान उसका समर्थन नहीं करते। अजहरुद्दीन की सफाई इस पुराने आरोप को समझने का आवश्यक हिस्सा है।
Next Story