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गौतम गंभीर की T20 रणनीति पर बहस, गावस्कर ने दिया सिचुएशनल क्रिकेट पर जोर

Kavita2
30 Jun 2026 10:59 AM IST
गौतम गंभीर की T20 रणनीति पर बहस, गावस्कर ने दिया सिचुएशनल क्रिकेट पर जोर
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नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर की T20 क्रिकेट को लेकर आक्रामक रणनीति एक बार फिर चर्चा में है। गंभीर लगातार हाई-स्कोरिंग और तेज गति वाले क्रिकेट को बढ़ावा देते रहे हैं और उनका मानना है कि टी20 क्रिकेट में 160-170 रन का दौर अब पुराना हो चुका है।

मार्च में भारत के T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद गंभीर ने खुलकर कहा था कि टीम का लक्ष्य हमेशा 200 से अधिक स्कोर करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि बल्लेबाजों को खुलकर खेलने की पूरी आज़ादी दी जाएगी, ताकि वे बिना डर के आक्रामक क्रिकेट खेल सकें। उनकी इस सोच को “लाइसेंस टू हिट” के तौर पर भी देखा गया, जिसमें बल्लेबाजों को जोखिम लेकर बड़े शॉट खेलने की छूट मिलती है।

हालांकि यह रणनीति भारतीय परिस्थितियों में, खासकर उपमहाद्वीप की सपाट पिचों पर अक्सर सफल साबित होती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में यह रणनीति हमेशा कारगर नहीं हो सकती। तेज गेंदबाजों, अतिरिक्त बाउंस और स्विंग वाली पिचों पर आक्रामक शॉट चयन टीम को मुश्किल में डाल सकता है।

इसका एक उदाहरण आयरलैंड के खिलाफ बेलफास्ट में खेली गई सीरीज में भी देखा गया, जहां भारत को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा था। उस सीरीज में कई भारतीय बल्लेबाज खराब शॉट चयन के कारण आउट हुए थे, जिससे टीम की रणनीति पर सवाल उठे थे।

इस बीच भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। सोमवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि क्रिकेट में किसी भी तय रणनीति से ज्यादा जरूरी हालात के अनुसार खेलना होता है। उनके अनुसार, टीम को पिच, मौसम और मैच की स्थिति को समझकर ही अपने खेल का तरीका तय करना चाहिए।

गावस्कर ने संकेत दिया कि केवल आक्रामक खेल पर निर्भर रहना हर परिस्थिति में सही नहीं हो सकता। उनका मानना है कि संतुलन और परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलन ही सफल टीम की पहचान होती है।

गंभीर की रणनीति को लेकर क्रिकेट जगत में दो विचारधाराएं उभर रही हैं। एक पक्ष इसे आधुनिक टी20 क्रिकेट की जरूरत मानता है, जहां तेजी से रन बनाना और दबाव बनाना जरूरी है। वहीं दूसरा पक्ष इसे जोखिम भरा दृष्टिकोण मानता है, जो हर परिस्थिति में काम नहीं करता।

भारतीय टीम के मौजूदा प्रदर्शन और विदेशों में मिली मिश्रित सफलता को देखते हुए यह बहस और तेज हो गई है कि क्या केवल आक्रामक बल्लेबाजी ही सफलता की गारंटी हो सकती है या फिर पारंपरिक सिचुएशनल क्रिकेट अब भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

फिलहाल टीम प्रबंधन अपनी रणनीति पर कायम नजर आ रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में परिस्थितियों के अनुसार लचीलापन ही भारत की असली परीक्षा होगी।

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