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हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी पर विवाद, दिग्गज खिलाड़ियों ने उठाए सवाल

Kavita2
31 July 2026 12:52 PM IST
हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी पर विवाद, दिग्गज खिलाड़ियों ने उठाए सवाल
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बेंगलुरु। भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। हॉकी इंडिया (HI) ने आगामी वर्ल्ड कप के लिए पुरुष और महिला टीमों की नई जर्सी जारी की है, जिसका रंग केसरिया रखा गया है। हालांकि, इस फैसले पर भारतीय हॉकी के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने नाराजगी जताई है और कहा है कि टीम की पहचान से जुड़ा पारंपरिक नीला रंग नहीं बदला जाना चाहिए था।

पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह और महान खिलाड़ी धनराज पिल्लै समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने हॉकी इंडिया के इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि नीली जर्सी भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक पहचान रही है और इसे बदलने से भावनात्मक जुड़ाव प्रभावित होगा।

नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू होने वाले वर्ल्ड कप से पहले गुरुवार को हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया के जरिए पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए नई जर्सी लॉन्च की थी। नई जर्सी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई।

हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे तकनीकी कारण बताए हैं। संस्था का कहना है कि खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ से चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। हॉकी इंडिया के मुताबिक, नीली यूनिफॉर्म कई बार नीली सिंथेटिक टर्फ के साथ मिल जाती थी, जिससे मैदान पर खिलाड़ियों को पहचानने में परेशानी होती थी।

हॉकी इंडिया का तर्क है कि नए रंग से खिलाड़ियों की दृश्यता बेहतर होगी और मैच के दौरान प्रदर्शन में मदद मिलेगी। हालांकि, कई पूर्व खिलाड़ियों ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया है।

1998 के बैंकॉक एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे धनराज पिल्लै ने कहा कि नीला रंग भारतीय हॉकी के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1928 के ओलंपिक से लेकर ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर, मोहम्मद शाहिद, जफर इकबाल और 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम तक भारतीय खिलाड़ी नीली जर्सी में खेलते रहे हैं।

पिल्लै ने कहा कि उन्होंने अपने लगभग 15 साल के करियर में हमेशा नीली जर्सी पहनी और यह रंग खिलाड़ियों तथा प्रशंसकों के लिए खास महत्व रखता है। उनके अनुसार, जर्सी केवल एक कपड़ा नहीं होती, बल्कि उससे देश की खेल विरासत और भावनाएं जुड़ी होती हैं।

पूर्व कप्तान परगट सिंह ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारतीय हॉकी की पहचान लंबे समय से नीले रंग से जुड़ी रही है और अचानक बदलाव करने से पहले व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए था।

दिग्गज खिलाड़ियों का मानना है कि खेलों में परंपरा और इतिहास का महत्व होता है। उनका कहना है कि तकनीकी जरूरतों के लिए बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन टीम की पहचान से जुड़े प्रतीकों को बदलते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

वहीं, हॉकी इंडिया का कहना है कि यह बदलाव खिलाड़ियों के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि नई जर्सी तैयार करने से पहले टीम के सदस्यों और सपोर्ट स्टाफ की राय ली गई थी।

भारतीय हॉकी टीम का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। ओलंपिक में भारत ने कई स्वर्ण पदक जीते हैं और नीली जर्सी लंबे समय से टीम की पहचान रही है। ऐसे में जर्सी के रंग में बदलाव को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक माना जा रहा है।

नई जर्सी को लेकर उठे विवाद के बीच अब भारतीय टीम का ध्यान आगामी वर्ल्ड कप की तैयारियों पर होगा। खिलाड़ियों के लिए मैदान पर प्रदर्शन सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी, लेकिन जर्सी को लेकर शुरू हुई बहस ने भारतीय हॉकी में परंपरा और बदलाव के बीच संतुलन को लेकर नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

फिलहाल हॉकी इंडिया अपने फैसले पर कायम है, जबकि पूर्व खिलाड़ी पारंपरिक नीले रंग को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है और क्या नई जर्सी भारतीय टीम के लिए नई सफलता लेकर आती है।

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